निजी मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट ने 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून को लेकर अपने अनुमान में बदलाव किया है। सोमवार को जारी संशोधित पूर्वानुमान में एजेंसी ने मानसूनी बारिश का अनुमान घटाकर लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) का 85 फीसदी कर दिया है।
नई दिल्ली: भारत में 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून को लेकर चिंता बढ़ गई है। निजी मौसम पूर्वानुमान एजेंसी Skymet Weather ने अपने ताजा अनुमान में मौसमी बारिश का पूर्वानुमान घटाकर लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) का 85% कर दिया है। एजेंसी ने सामान्य से काफी कम बारिश की स्थिति को देखते हुए पूरे मानसून सीजन में सूखे की 70% संभावना जताई है। यह संशोधन ऐसे समय आया है जब प्रशांत महासागर में El Niño की स्थिति मजबूत होने के संकेत मिल रहे हैं।
Skymet के नए अनुमान के मुताबिक, अगस्त और सितंबर में भी बारिश सामान्य से कम रह सकती है। एजेंसी ने अगस्त में बारिश को LPA का लगभग 84% और सितंबर में करीब 80% रहने का अनुमान लगाया है। दोनों महीनों के लिए कम बारिश की संभावना को लेकर भी एजेंसी ने चिंता जताई है।
अप्रैल के अनुमान से बड़ा बदलाव
Skymet ने अप्रैल 2026 में देश में पूरे मानसून सीजन के दौरान बारिश LPA की 94% रहने का अनुमान लगाया था, यानी सामान्य से करीब 6% कम। अब संशोधित पूर्वानुमान 85% तक आ गया है। एजेंसी के मुताबिक, इस बदलाव के पीछे El Niño की मजबूती और हिंद महासागर में Indian Ocean Dipole (IOD) को लेकर बनी अनिश्चितता प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
Skymet का कहना है कि मौजूदा समुद्री और वायुमंडलीय परिस्थितियां मानसून के बचे हुए हिस्से में बारिश के वितरण और तीव्रता को प्रभावित कर सकती हैं। एजेंसी ने यह भी संकेत दिया है कि सितंबर की शुरुआत में El Niño से जुड़ा पैटर्न “स्ट्रॉन्ग” से “वेरी स्ट्रॉन्ग” श्रेणी की ओर बढ़ सकता है। हालांकि, El Niño और सूखे के बीच संबंध सीधा और हर बार एक जैसा नहीं होता। Skymet की अपनी विश्लेषणात्मक सामग्री भी बताती है कि मजबूत El Niño की स्थिति हमेशा भारत में सूखे का कारण नहीं बनती।
जून-जुलाई में भी बारिश रही कम

Skymet के मुताबिक, 1 जून से 31 जुलाई 2026 के बीच देशभर में संचयी बारिश LPA से लगभग 13% कम रही। एजेंसी का कहना है कि कमजोर मानसूनी परिस्थितियों का असर आगे भी दिखाई दे सकता है, खासकर यदि अगस्त और सितंबर में बारिश का घाटा बढ़ता है। हालांकि, मानसून की तस्वीर पूरे देश में एक जैसी नहीं होती।
किसी एक महीने या क्षेत्र में अच्छी बारिश होने के बावजूद पूरे सीजन का प्रदर्शन अलग हो सकता है। इसलिए खेती, जल संसाधन और खाद्य उत्पादन के लिहाज से केवल कुल बारिश ही नहीं, बल्कि उसका समय और भौगोलिक वितरण भी बेहद महत्वपूर्ण है।
IMD का अनुमान Skymet से अलग
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मई 2026 में पूरे जून-सितंबर मानसून सीजन के लिए देशभर की बारिश का अनुमान LPA का 90% लगाया था। विभाग ने इसे सामान्य से कम बारिश की स्थिति बताया था और मध्य भारत तथा दक्षिण प्रायद्वीपीय हिस्सों में सामान्य से कम बारिश की आशंका जताई थी। इसका मतलब है कि फिलहाल Skymet और IMD के अनुमानों में अंतर बना हुआ है।
मौसम पूर्वानुमानों में समय के साथ बदलाव सामान्य प्रक्रिया है, क्योंकि समुद्र की सतह का तापमान, ENSO, IOD और अन्य वायुमंडलीय संकेत लगातार बदलते रहते हैं।
धान, कपास और दालों पर पड़ सकता है असर
भारत की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए मानसून बेहद महत्वपूर्ण है। देश की बड़ी मात्रा में वार्षिक वर्षा जून से सितंबर के बीच होती है और खरीफ फसलों की बुवाई तथा शुरुआती विकास काफी हद तक इसी बारिश पर निर्भर करता है। कम या असमान बारिश का असर धान, कपास, दाल, तिलहन और अन्य खरीफ फसलों पर पड़ सकता है। बारिश में कमी से सिंचाई की जरूरत बढ़ सकती है, जबकि जलाशयों और भूजल संसाधनों पर भी दबाव बढ़ने की संभावना रहती है।











