मुरादाबाद रेलखंड पर शुरू हुई नई सिग्नलिंग व्यवस्था, एक ट्रैक पर बढ़ेंगी ट्रेनों की संख्या

मुरादाबाद मंडल के पिलखुवा-हापुड़-बाबूगढ़ रेलखंड पर ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग लागू हुई। इससे एक ट्रैक पर अधिक ट्रेनें सुरक्षित और समय पर चल सकेंगी।

उत्तर रेलवे के मुरादाबाद मंडल ने पिलखुवा-हापुड़-बाबूगढ़-कुचेसर रोड रेलखंड पर ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग प्रणाली लागू की है। नई तकनीक से ट्रेनों का संचालन अधिक सुरक्षित, तेज और व्यवस्थित होगा, जिससे यात्रियों को समय पर ट्रेन सेवाओं का लाभ मिलने की उम्मीद है।

मुरादाबाद: उत्तर रेलवे ने रेल संचालन को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पिलखुवा-हापुड़-बाबूगढ़-कुचेसर रोड सेक्शन में ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग प्रणाली शुरू कर दी है। इस तकनीक के लागू होने से एक ही ट्रैक पर सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए अधिक ट्रेनों का संचालन संभव होगा, जिससे रेल यातायात की क्षमता बढ़ेगी और यात्रियों को बेहतर सुविधा मिल सकेगी।

नई तकनीक से बदलेगा ट्रेनों के संचालन का तरीका

उत्तर रेलवे के मुरादाबाद मंडल ने व्यस्त रेल मार्गों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए पिलखुवा-हापुड़-बाबूगढ़-कुचेसर रोड रेलखंड को आधुनिक सिग्नलिंग तकनीक से लैस कर दिया है। 24.73 किलोमीटर लंबे इस सेक्शन में इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग और ऑप्टिकल कम्युनिकेशन आधारित ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग प्रणाली लागू की गई है। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि इससे ट्रेनों के संचालन में न केवल गति आएगी बल्कि सुरक्षा मानकों में भी उल्लेखनीय सुधार होगा।

मुरादाबाद रेलखंड पर शुरू हुई नई सिग्नलिंग व्यवस्था, एक ट्रैक पर बढ़ेंगी ट्रेनों की संख्या

नई व्यवस्था लागू होने के बाद अब ट्रेनों की वास्तविक स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जाएगी। इससे ट्रेनों के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए एक ही लाइन पर अधिक संख्या में ट्रेनें चलाई जा सकेंगी। खासकर व्यस्त रूटों पर इसका सीधा लाभ देखने को मिलेगा।

तीन रेल सेक्शन को किया गया आधुनिक सिस्टम से जोड़ने का काम

इस परियोजना के तहत पिलखुवा-हापुड़, हापुड़-बाबूगढ़ और बाबूगढ़-कुचेसर रोड सेक्शन को ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग नेटवर्क से जोड़ा गया है। रेलवे ने इसमें ड्यूल डिटेक्शन आधारित आधुनिक एमएसडीएसी तकनीक का इस्तेमाल किया है, जो ट्रैक पर मौजूद ट्रेनों की स्थिति का दोहरी स्तर पर आकलन करती है।

रेलवे विशेषज्ञों के अनुसार यह तकनीक किसी भी संभावित तकनीकी खराबी या मानवीय त्रुटि की संभावना को काफी हद तक कम कर देती है। ट्रेनों की लोकेशन की सटीक जानकारी मिलने से संचालन अधिक व्यवस्थित होगा और देरी की घटनाओं में भी कमी आने की उम्मीद है।

इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम सिग्नल और ट्रैक के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेगा, जिससे ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुरक्षित और नियंत्रित तरीके से हो सकेगी।

फाटकों और सिग्नलों के बीच बढ़ा समन्वय

नई परियोजना के तहत कई रेलवे समपार फाटकों को भी आधुनिक प्रणाली से जोड़ा गया है। अब फाटक और सिग्नल एक-दूसरे के साथ समन्वय बनाकर कार्य करेंगे। इससे फाटक संचालन में मानवीय हस्तक्षेप कम होगा और दुर्घटनाओं की आशंका भी घटेगी।

रेलवे ने फाटकों पर अप्रोच लॉकिंग, अप्रोच वार्निंग, रोड सिग्नल और डेल्ट्रान गेट ऑपरेशन पैनल जैसी सुविधाएं भी स्थापित की हैं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य सड़क और रेल यातायात के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करना है।

यात्रियों को मिलेगा सीधा लाभ

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि नई सिग्नलिंग व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यात्रियों को मिलेगा। एक ही ट्रैक पर अधिक ट्रेनों का संचालन संभव होने से ट्रेनों की समयबद्धता में सुधार होगा। कई बार ट्रेनों को सिग्नल मिलने का इंतजार करना पड़ता था, जिससे देरी होती थी। नई तकनीक इस समस्या को काफी हद तक कम कर सकती है।

इसके अलावा बढ़ती रेल यात्री संख्या और मालगाड़ियों के दबाव को देखते हुए यह प्रणाली भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में भी सहायक साबित होगी। रेलवे नेटवर्क की क्षमता बढ़ने से नए रूटों और अतिरिक्त ट्रेनों के संचालन की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।

रेलवे के इस आधुनिकीकरण कदम को उत्तर भारत के व्यस्त रेल नेटवर्क के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह अन्य महत्वपूर्ण रेलखंडों पर भी आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम लागू किए जाते हैं तो भारतीय रेलवे की परिचालन क्षमता और सुरक्षा दोनों में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है।

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