मुरादाबाद के बहापुर बलिया गांव में तेंदुए ने घर के बाहर सो रहे 35 वर्षीय जगराज पर हमला कर दिया। शनिवार सुबह उनका शव घर से 100 मीटर दूर जंगल में मिला। क्षेत्र में 25 दिनों में चार मौतों से दहशत है।
मुरादाबाद: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के ग्रामीण इलाके में तेंदुए के हमलों से दहशत का माहौल है। ठाकुरद्वारा थाना क्षेत्र के बहापुर बलिया गांव में शनिवार सुबह 35 वर्षीय जगराज का शव घर से करीब 100 मीटर दूर जंगल में मिला। परिजनों के अनुसार, जगराज रात में घर के बाहर चारपाई पर सो रहे थे, तभी तेंदुआ उन्हें कथित तौर पर खींचकर जंगल की ओर ले गया। इस घटना के बाद ग्रामीणों में भय बढ़ गया है। स्थानीय जानकारी के मुताबिक, पिछले 25 दिनों में इलाके में तेंदुए के हमलों में चार लोगों की मौत हो चुकी है।
रात में चारपाई पर सो रहे थे जगराज
बहापुर बलिया गांव के बाहरी हिस्से में जगराज का झोपड़ीनुमा घर है। बताया गया कि घर में उचित दरवाजा नहीं होने के कारण वह अक्सर बाहर चारपाई पर सोते थे। शुक्रवार रात भी उन्होंने अपने बच्चों को खाना खिलाकर घर के अंदर सुलाया और खुद बाहर चारपाई पर सो गए।
जगराज अपने परिवार की जिम्मेदारी अकेले संभाल रहे थे। करीब तीन साल पहले उनकी पत्नी की मौत हो गई थी। इसके बाद वह अपने आठ वर्षीय बेटे और छह वर्षीय बेटी का पालन-पोषण कर रहे थे। परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए वह ई-रिक्शा चलाते थे।
परिवार के लिए शुक्रवार रात सामान्य दिन की तरह शुरू हुई थी, लेकिन कुछ ही समय बाद सब कुछ बदल गया। आशंका है कि रात के दौरान तेंदुआ घर के पास पहुंचा और सो रहे जगराज पर हमला कर दिया।
गर्दन पर हमला कर जंगल में ले गया
परिजनों के मुताबिक, तेंदुए ने जगराज की गर्दन को जबड़े में दबोचा और उन्हें चारपाई से खींचकर घर से दूर ले गया। शनिवार सुबह जब परिवार के सदस्यों ने देखा कि जगराज चारपाई पर नहीं हैं, तो उनकी तलाश शुरू की गई।
तलाश करते हुए परिजन घर से करीब 100 मीटर दूर जंगल की तरफ पहुंचे। वहां उन्हें जगराज का शव मिला। शव पर गंभीर चोटों के निशान बताए गए हैं। घटना की सूचना मिलते ही गांव में बड़ी संख्या में लोग जुट गए और इलाके में दहशत फैल गई।
घटना के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग और पुलिस को सूचना दी। वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और तेंदुए की तलाश तथा उसे पकड़ने की कार्रवाई शुरू की।
तीन दिन पहले महिला पर भी हुआ था हमला
बहापुर बलिया और आसपास के इलाके में तेंदुए की गतिविधियों को लेकर पहले से चिंता बनी हुई है। स्थानीय जानकारी के अनुसार, जगराज की मौत से सिर्फ तीन दिन पहले इसी क्षेत्र में खेत में काम कर रही एक महिला पर तेंदुए ने हमला किया था। इस हमले में महिला की मौत हो गई थी।
लगातार सामने आ रही घटनाओं के कारण ग्रामीणों में डर का माहौल है। खेतों में काम करने वाले किसान और ग्रामीण अब अकेले बाहर निकलने से बच रहे हैं। खासतौर पर सुबह और शाम के समय तेंदुए की संभावित मौजूदगी को लेकर लोग सतर्क हैं।
स्थानीय स्तर पर पिछले 25 दिनों में तेंदुए के हमलों से चार लोगों की मौत होने की बात कही जा रही है। इससे वन विभाग के सामने तेंदुए को पकड़ने और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
वन विभाग ने लगाए ट्रैप कैमरे और पिंजरे
घटना की सूचना मिलने के बाद वन विभाग ने इलाके में तेंदुए की निगरानी बढ़ा दी है। टीम ने संभावित रास्तों और तेंदुए की गतिविधियों वाले स्थानों पर ट्रैप कैमरे लगाए हैं। इसके अलावा उसे पकड़ने के लिए पिंजरे और अन्य निगरानी उपकरण भी लगाए गए हैं।
वन विभाग की टीम आसपास के क्षेत्रों में तेंदुए के पैरों के निशान और अन्य संकेतों की भी तलाश कर रही है। उद्देश्य यह पता लगाना है कि तेंदुआ किस दिशा में जा रहा है और उसका मूवमेंट किस इलाके में अधिक है।
मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम के साथ ग्रामीण भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। सुरक्षा को देखते हुए लोगों से तेंदुए की तलाश में खुद जंगल या खेतों में जाने से बचने की अपील की जा रही है।
ग्रामीणों में बढ़ी दहशत
जगराज की मौत के बाद गांव में भय का माहौल है। घटना स्थल पर बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र हो गए। कई लोग लाठी-डंडे लेकर मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों की मांग है कि वन विभाग तेंदुए को जल्द से जल्द पकड़कर सुरक्षित स्थान पर ले जाए, ताकि आगे किसी इंसान पर हमला न हो।
ग्रामीणों का कहना है कि लगातार हो रहे हमलों के कारण रात के समय घरों से निकलना मुश्किल हो गया है। खेतों में काम करने वाले लोग भी समूह में जाने को मजबूर हैं। बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी परिवार चिंतित हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, तेंदुए के प्राकृतिक आवास के आसपास मानव गतिविधियां बढ़ने पर इंसान और वन्यजीव के बीच टकराव की घटनाएं सामने आ सकती हैं। ऐसे मामलों में ग्रामीणों की सुरक्षा के साथ-साथ वन्यजीव को सुरक्षित तरीके से पकड़ना भी जरूरी होता है।
DFO ने बताई इलाके में बढ़े हमलों की वजह
मुरादाबाद के प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) डॉ. विनय कुमार पांडेय ने बताया कि यह क्षेत्र तेंदुओं का प्राकृतिक इलाका है और यहां पहले भी तेंदुओं की मौजूदगी रही है। उनके मुताबिक, पहले संचार और सूचना के साधन सीमित थे, इसलिए इस तरह की घटनाओं की जानकारी बड़े स्तर पर सामने नहीं आती थी।
DFO ने यह भी कहा कि इस बार इलाके में बाढ़ नहीं आई। इसके चलते किसान लगातार खेतों में पहुंच रहे हैं। ग्रामीणों और तेंदुओं की आवाजाही एक ही क्षेत्र में बढ़ने से आमना-सामना होने की संभावना बढ़ी है। वन विभाग इसी कारण मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में वृद्धि को भी देख रहा है।
हालांकि, जगराज की मौत और हालिया अन्य हमलों की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। वन विभाग तेंदुए की पहचान और उसकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कैमरों से मिलने वाली तस्वीरों और अन्य साक्ष्यों का विश्लेषण करेगा।
तेंदुए को पकड़ने के लिए अभियान तेज
जगराज की मौत के बाद वन विभाग ने इलाके में निगरानी और पकड़ने की कार्रवाई तेज कर दी है। ट्रैप कैमरों के जरिए तेंदुए की लोकेशन का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। इसके साथ ही संभावित रास्तों पर पिंजरे लगाए गए हैं।
वन विभाग की प्राथमिकता तेंदुए को बिना नुकसान पहुंचाए पकड़ना और ग्रामीणों को तत्काल सुरक्षा देना है। इसके लिए टीम इलाके में लगातार निगरानी कर रही है। यदि कैमरों में तेंदुए की स्पष्ट तस्वीर या गतिविधि रिकॉर्ड होती है, तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
ग्रामीणों से भी अपील की जा रही है कि वे तेंदुए को पकड़ने या उसका पीछा करने की कोशिश न करें। भीड़ द्वारा जानवर को घेरने से स्थिति और खतरनाक हो सकती है।
बच्चों की जिम्मेदारी अकेले संभाल रहे थे जगराज
जगराज की मौत का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि उनके पीछे दो छोटे बच्चे रह गए हैं। पत्नी की मृत्यु के बाद वह आठ वर्षीय बेटे और छह वर्षीय बेटी की देखभाल अकेले कर रहे थे। ई-रिक्शा चलाकर वह परिवार का खर्च उठाते थे।
रात को बच्चों को घर के अंदर सुलाकर खुद बाहर सोना उनकी रोज की मजबूरी थी। घर में दरवाजा नहीं होने के कारण बाहर सोने की यह व्यवस्था उनके लिए बेहद जोखिमपूर्ण साबित हुई। तेंदुए के हमले में उनकी मौत के बाद दोनों बच्चों के भविष्य और देखभाल को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
मानव-वन्यजीव संघर्ष ने बढ़ाई चिंता
मुरादाबाद के ग्रामीण क्षेत्रों में सामने आ रही घटनाएं मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष की गंभीर तस्वीर पेश करती हैं। जंगल और खेतों के आसपास रहने वाले लोगों को वन्यजीवों की गतिविधियों का सामना करना पड़ता है। वहीं, तेंदुओं के प्राकृतिक आवास के करीब बढ़ती मानवीय गतिविधियां भी संघर्ष की संभावना बढ़ा सकती हैं।
फिलहाल वन विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती उस तेंदुए को पकड़ना है, जिसके हमले में जगराज की मौत हुई। साथ ही, इलाके में मौजूद अन्य तेंदुओं की गतिविधियों पर नजर रखना भी जरूरी है।
जगराज की मौत के बाद बहापुर बलिया गांव और आसपास के इलाकों में लोग सतर्क हैं। वन विभाग की टीमें कैमरों और पिंजरों के माध्यम से निगरानी कर रही हैं। अब ग्रामीणों की नजर इस बात पर है कि तेंदुआ कब पकड़ में आता है और इलाके में सामान्य स्थिति कब बहाल होती है।









