मध्य प्रदेश में संगठित ड्रग तस्करी को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि 31 दिसंबर 2029 के बाद मध्य प्रदेश में बेटे-बेटियों के लिए नशे की जगह नहीं होगी। शाह ने अभिभावकों और खासकर माताओं से नशे के खिलाफ अभियान में सहयोग की अपील की।
भोपाल: मध्य प्रदेश में नशे के खिलाफ अभियान को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 31 दिसंबर 2029 की समय-सीमा तय की है। उन्होंने कहा कि इस तारीख के बाद मध्य प्रदेश में आपके बेटे-बेटियों के लिए नशे की जगह नहीं होगी। राज्य में ड्रग तस्करी के तरीकों को लेकर भी गंभीर तस्वीर सामने आई है, जहां तस्कर स्टेपनी से लेकर सलवार-कुर्ते तक का इस्तेमाल नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए कर रहे हैं। अमित शाह ने अभिभावकों, खासकर माताओं से युवाओं को नशे से दूर रखने में सहयोग की अपील की।
स्टेपनी से सलवार-कुर्ते तक तस्करी के नए तरीके
मध्य प्रदेश में ड्रग तस्करी के मामले में तस्करों द्वारा अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है। नशीले पदार्थों को छिपाकर ले जाने के लिए वाहनों की स्टेपनी जैसी जगहों से लेकर कपड़ों तक का इस्तेमाल किया जा रहा है। तस्करी के ऐसे तरीकों के कारण नशीले पदार्थों की सप्लाई पर निगरानी रखना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बनी हुई है।
नशीले पदार्थों के खिलाफ केंद्र सरकार की ओर से देशभर में अभियान चलाया जा रहा है। सितंबर 2026 में केंद्र ने नशामुक्त भारत के लिए 2026-2029 का रोडमैप भी सामने रखा था। इसमें ड्रग नेटवर्क पर कार्रवाई, सिंथेटिक ड्रग्स और उनके प्रीकर्सर पर नियंत्रण, नशे की मांग कम करने और उपचार-क्षमता बढ़ाने जैसे चार प्रमुख आधार तय किए गए हैं।
31 दिसंबर 2029 तक MP को नशामुक्त करने का लक्ष्य
भोपाल में अमित शाह ने मध्य प्रदेश को नशामुक्त बनाने के लिए 31 दिसंबर 2029 की डेडलाइन तय की। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए विस्तृत योजना पर काम किया जाएगा। शाह ने कहा कि मध्य प्रदेश में नशे के लिए कोई जगह नहीं होगी।
अमित शाह ने कहा, “मैं सभी अभिभावकों, खासकर माताओं से कहने आया हूं… 31 दिसंबर 2029 के बाद मध्य प्रदेश में आपके बेटे-बेटियों के लिए नशे की जगह नहीं होगी। उनका भविष्य उज्ज्वल होगा।”
उन्होंने नशे के खिलाफ अभियान में समाज की भागीदारी पर भी जोर दिया। केंद्र के नशामुक्त भारत रोडमैप में भी युवाओं को नशे से बचाने, जागरूकता बढ़ाने और उपचार एवं पुनर्वास की व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया गया है।
देशभर में 2029 तक नशामुक्ति का रोडमैप
केंद्र सरकार ने नशामुक्त भारत के लिए जुलाई 2026 से जुलाई 2029 तक तीन साल का रोडमैप तैयार किया है। सरकार के अनुसार, इस अभियान का उद्देश्य ड्रग नेटवर्क को खत्म करना और नशीले पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी कार्रवाई करना है। इसके लिए खुफिया और ऑपरेशन आधारित कार्रवाई, सिंथेटिक ड्रग्स पर नियंत्रण, मांग और नुकसान कम करने के उपाय तथा क्षमता निर्माण और समन्वय को प्रमुख आधार बनाया गया है।
रोडमैप के तहत नशे की लत से जूझ रहे लोगों के उपचार और पुनर्वास की क्षमता बढ़ाने का भी लक्ष्य रखा गया है। सरकार ने ड्रग डी-एडिक्शन सेंटरों की संख्या बढ़ाने, बच्चों और महिलाओं के लिए विशेष सुविधाएं विकसित करने तथा स्कूल-कॉलेजों को नशे के खिलाफ जागरूकता की पहली पंक्ति बनाने की योजना बताई है।
मध्य प्रदेश में अमित शाह की 31 दिसंबर 2029 की समय-सीमा इसी व्यापक नशामुक्ति अभियान के बीच सामने आई है। अब राज्य में ड्रग नेटवर्क पर कार्रवाई के साथ युवाओं और परिवारों के स्तर पर जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।










