मध्य प्रदेश में मानसून की देरी के कारण गर्मी और उमस का असर बना हुआ है। मौसम विभाग ने जबलपुर समेत पांच जिलों में हीटवेव का अलर्ट जारी किया है। वहीं कई जिलों में आंधी और बारिश की संभावना जताई गई है। मानसून 25 जून के बाद प्रदेश में प्रवेश कर सकता है।
भोपाल: मध्य प्रदेश में मानसून की प्रतीक्षा के बीच मौसम का दोहरा रूप देखने को मिल रहा है। एक ओर कई जिलों में गर्म हवाएं और हीटवेव लोगों को परेशान कर रही हैं, तो दूसरी ओर कुछ इलाकों में आंधी और बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक प्रदेश के कई जिलों में लू चलने की चेतावनी जारी की है और मानसून के 25 जून के बाद प्रवेश करने की संभावना जताई है।
जबलपुर समेत पांच जिलों में हीटवेव का अलर्ट
मौसम विभाग के अनुसार सोमवार को नरसिंहपुर, जबलपुर, मंडला, उमरिया और डिंडौरी जिलों में हीटवेव का प्रभाव देखने को मिल सकता है। इन क्षेत्रों में दिन के समय गर्म हवाएं चलेंगी और तापमान सामान्य से अधिक बना रहेगा।
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पिछले दो दिनों से जबलपुर संभाग के कई हिस्सों में लू का असर महसूस किया जा रहा है। मानसून की धीमी रफ्तार और प्री-मानसून गतिविधियों में कमी के कारण उमस और गर्मी लगातार बढ़ रही है।
21 से ज्यादा जिलों में आंधी और बारिश की संभावना
गर्मी के साथ-साथ प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम बदलने के भी संकेत हैं। मौसम विभाग ने झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बड़वानी, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, अनूपपुर, कटनी, दमोह, सागर, विदिशा और अशोकनगर समेत 21 से अधिक जिलों में तेज आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि शाम के समय कई क्षेत्रों में बादल छाने और हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना बनी हुई है, जिससे कुछ इलाकों में तापमान में अस्थायी गिरावट आ सकती है।
रायसेन और भोपाल में हुई अच्छी बारिश
रविवार को प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश दर्ज की गई। रायसेन में सबसे अधिक 61 मिलीमीटर यानी करीब ढाई इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। राजधानी भोपाल में भी दोपहर के समय तेज बारिश हुई, जबकि सतना में लगभग पौन इंच पानी गिरा।
इसके अलावा जबलपुर, खजुराहो, नौगांव और सिवनी में भी बारिश का दौर देखने को मिला। बारिश के कारण कुछ शहरों में तापमान में कमी दर्ज की गई, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिली।
25 जून के बाद आ सकता है मानसून
मौसम विभाग के अनुसार इस बार मध्य प्रदेश में मानसून सामान्य समय से करीब एक सप्ताह देर से पहुंच रहा है। आमतौर पर प्रदेश में मानसून 15 जून के आसपास प्रवेश कर जाता है, लेकिन इस बार इसकी रफ्तार धीमी रही है।
मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 23 जून तक मानसून छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ सकता है। यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो 25 जून के बाद मध्य प्रदेश में मानसून की एंट्री हो सकती है।
कम बारिश से बढ़ी किसानों की चिंता
मानसून की देरी का सबसे अधिक असर किसानों पर पड़ रहा है। खरीफ सीजन की प्रमुख फसलों जैसे सोयाबीन, उड़द, मूंग और तुअर की बुवाई प्रभावित हो रही है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि बोवाई के लिए खेतों में पर्याप्त नमी जरूरी है, जिसके लिए कम से कम चार इंच बारिश आवश्यक मानी जाती है।
कई किसानों ने मानसून आने की उम्मीद में पहले ही बुवाई कर दी थी। अब बारिश नहीं होने से बीज खराब होने का खतरा बढ़ गया है। ऐसी स्थिति में किसानों को दोबारा बुवाई करनी पड़ सकती है, जिससे लागत बढ़ने की आशंका है।
प्रदेश में सामान्य से 48 प्रतिशत कम बारिश
जून महीने में अब तक मध्य प्रदेश में सामान्य से 48 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के जिलों में वर्षा की कमी और अधिक रही है। वहीं पश्चिमी हिस्सों में भी सामान्य से कम बारिश रिकॉर्ड की गई है।
मौसम विभाग का मानना है कि यदि जून के अंतिम सप्ताह में मानसून सक्रिय होता है तो वर्षा की कमी की भरपाई कुछ हद तक हो सकती है। फिलहाल प्रदेशवासियों को अगले कुछ दिनों तक गर्मी, उमस और छिटपुट बारिश वाले मौसम का सामना करना पड़ेगा।












