मॉर्गन स्टेनली का बड़ा अनुमान: 2031 तक भारत का कैपेक्स पहुंचेगा $2.2 ट्रिलियन, ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में बढ़ेगा निवेश

मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट के अनुसार, 2031 तक भारत का कैपेक्स $2.2 ट्रिलियन तक पहुंच सकता है। ऊर्जा, रक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में बड़े निवेश से देश

Morgan Stanley की ताजा रिपोर्ट “India Economics and Strategy - Opportunities and Risk Amid Conflict” के अनुसार मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष भारत के लिए कुछ अहम सेक्टरों में घरेलू निवेश बढ़ाने का अवसर बन सकता है।

बिजनेस न्यूज़: वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े जोखिमों के बीच भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर एक सकारात्मक तस्वीर सामने आई है। वैश्विक वित्तीय संस्था Morgan Stanley ने अपनी नई रिपोर्ट में अनुमान जताया है कि भारत का कुल पूंजीगत व्यय (Capex) वित्त वर्ष 2031 तक बढ़कर 2.2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत ऊर्जा, उर्वरक, रक्षा और डेटा सेंटर जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में घरेलू निवेश बढ़ाकर अपनी आर्थिक मजबूती को और मजबूत कर सकता है।

वैश्विक संकट के बीच भारत के लिए अवसर

मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट “India Economics and Strategy – Opportunities and Risks Amid Conflict” में कहा गया है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियां भारत के लिए आत्मनिर्भरता बढ़ाने और घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने का अवसर बन सकती हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत सरकार ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और रक्षा उत्पादन को प्राथमिकता देते हुए बड़े पैमाने पर पूंजीगत निवेश बढ़ा सकती है। इससे देश बाहरी झटकों और आपूर्ति संकट से बेहतर तरीके से निपट पाएगा।

भारत फिलहाल अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर काफी निर्भर है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 की शुरुआत तक भारत लगभग 85% कच्चे तेल और 50% प्राकृतिक गैस का आयात कर रहा था। इस स्थिति को देखते हुए मॉर्गन स्टेनली ने सुझाव दिया है कि भारत को:

  • पेट्रोलियम भंडारण क्षमता बढ़ानी चाहिए
  • कोयला गैसीकरण को बढ़ावा देना चाहिए
  • नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं का विस्तार करना चाहिए
  • परमाणु ऊर्जा कार्यक्रमों को तेज करना चाहिए
  • बिजली आधारित ऊर्जा उपयोग (Electrification) बढ़ाना चाहिए

रिपोर्ट के अनुसार, कोयला और रिन्यूएबल एनर्जी का संतुलित उपयोग भारत को मध्यम अवधि में ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा।

उर्वरक क्षेत्र को रणनीतिक महत्व

रिपोर्ट में उर्वरक क्षेत्र को भारत की खाद्य सुरक्षा का मुख्य आधार बताया गया है। भारत में उर्वरकों की मांग लगातार बढ़ रही है। 2018-19 में जहां कुल खपत लगभग 53 मिलियन टन थी, वहीं 2023-24 तक यह बढ़कर 60 मिलियन टन हो गई। मॉर्गन स्टेनली का मानना है कि रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद वैश्विक सप्लाई चेन में आई बाधाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत को उर्वरक उत्पादन में घरेलू क्षमता बढ़ाने की जरूरत है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत को:

  • आयात स्रोतों में विविधता लानी होगी
  • घरेलू उत्पादन बढ़ाना होगा
  • कृषि में उन्नत तकनीक और संसाधन दक्षता पर जोर देना होगा
  • रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर फोकस

Defense Manufacturing को भी भारत की दीर्घकालिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है। मॉर्गन स्टेनली के अनुसार, वैश्विक संघर्षों और क्षेत्रीय तनावों ने भारत को रक्षा खर्च बढ़ाने और घरेलू उत्पादन को मजबूत करने के लिए प्रेरित किया है। भारत पहले से ही दुनिया के शीर्ष पांच रक्षा खर्च करने वाले देशों में शामिल है।

सरकार का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में रक्षा खर्च को GDP के 2.5% तक पहुंचाना है। “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” जैसी पहलें रक्षा उत्पादन में स्थानीयकरण को बढ़ावा दे रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इससे:

  • विनिर्माण क्षेत्र को मजबूती मिलेगी
  • रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे
  • आयात पर निर्भरता घटेगी
  • दीर्घकालिक आर्थिक विकास को समर्थन मिलेगा
  • डेटा सेंटर और नई अर्थव्यवस्था के सेक्टर होंगे लाभ में

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत वैश्विक डेटा सेंटर निवेश के लिए तेजी से पसंदीदा गंतव्य बन सकता है। डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर, AI और क्लाउड सेवाओं की बढ़ती मांग भारत में बड़े निवेश को आकर्षित कर सकती है। मॉर्गन स्टेनली का अनुमान है कि FY2031 तक कुल अतिरिक्त पूंजीगत व्यय का लगभग 60% हिस्सा ऊर्जा परिवर्तन, डेटा सेंटर और रक्षा जैसे “न्यू-एज” क्षेत्रों में जाएगा।

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