MSME Sector: सरकार की नई पहल से मिलेगा बढ़ावा, आसान ऋण और वित्तीय सहायता से मजबूत होगा कारोबार

MSME सेक्टर को मजबूती देने के लिए सरकार ने आसान ऋण, वित्तीय सहायता और नई योजनाओं पर जोर बढ़ाया है। इन पहलों से छोटे और मध्यम उद्यमों को पूंजी जुटाने, कारोबार

मानसून सत्र के दौरान संसद में सवाल-जवाब का सिलसिला जारी है। इसी क्रम में वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को मिलने वाले लोन और आर्थिक सहायता से जुड़े सवालों का जवाब दिया।

बिजनेस न्यूज़: भारत सरकार ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और उद्यमियों के लिए ऋण तक पहुंच आसान करने के उद्देश्य से कई नई योजनाएं और वित्तीय पहलें शुरू की हैं। संसद के मानसून सत्र के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में एक लिखित जवाब के माध्यम से MSME क्षेत्र को समर्थन देने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी साझा की।

सरकार का मानना है कि MSME क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जो रोजगार सृजन, निर्यात वृद्धि और स्थानीय उद्योगों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने वित्तीय सहायता, क्रेडिट गारंटी और डिजिटल लेंडिंग के माध्यम से इस क्षेत्र को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।

ECLGS 5.0 के जरिए बढ़ेगा ऋण प्रवाह

वित्त मंत्री के अनुसार, मई 2026 में शुरू की गई Emergency Credit Line Guarantee Scheme (ECLGS) 5.0 का उद्देश्य MSME सहित विभिन्न क्षेत्रों में अतिरिक्त वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत लगभग ₹2.55 लाख करोड़ के अतिरिक्त क्रेडिट फ्लो का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।योजना के तहत पात्र MSME इकाइयों को वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही के उच्चतम फंड-बेस्ड वर्किंग कैपिटल बकाया का 20 प्रतिशत तक अतिरिक्त ऋण प्राप्त करने की सुविधा मिलेगी। 

इस अतिरिक्त ऋण पर सदस्य ऋणदाता संस्थानों (Member Lending Institutions - MLIs) को 100 प्रतिशत सरकारी गारंटी प्रदान की जाएगी। सरकार का मानना है कि इस कदम से छोटे और मध्यम उद्यमों को कार्यशील पूंजी की कमी से राहत मिलेगी और वे अपने कारोबार का विस्तार करने में सक्षम होंगे।

SIDBI ने बढ़ाया MSME ऋण पोर्टफोलियो

MSME Sector: सरकार की नई पहल से मिलेगा बढ़ावा, आसान ऋण और वित्तीय सहायता से मजबूत होगा कारोबार

भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI) MSME क्षेत्र को वित्तीय सहायता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। संसद में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक SIDBI का कुल अप्रत्यक्ष ऋण (Indirect Loan) पोर्टफोलियो बढ़कर ₹5.24 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। SIDBI विभिन्न बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs), स्मॉल फाइनेंस बैंकों और माइक्रो फाइनेंस संस्थानों को पुनर्वित्त (Refinance) और ऑन-लेंडिंग सुविधाएं उपलब्ध कराता है। 

इससे देशभर के छोटे उद्यमों तक ऋण की पहुंच बढ़ाने में मदद मिलती है। यह मॉडल विशेष रूप से उन क्षेत्रों में प्रभावी साबित हो रहा है जहां पारंपरिक बैंकिंग सेवाओं की पहुंच सीमित है।

नए उद्यमियों को मिलेगा आसान वित्तपोषण

सरकार ने यह भी बताया कि SIDBI अपनी 167 शाखाओं के नेटवर्क के माध्यम से MSME इकाइयों को प्रत्यक्ष ऋण सहायता उपलब्ध करा रहा है। इसके अलावा, छोटे और नए उद्यमियों के लिए वित्तपोषण को सरल बनाने के उद्देश्य से NBFC और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) के साथ को-लेंडिंग मॉडल लागू किया गया है।

इस मॉडल के तहत विभिन्न वित्तीय संस्थान मिलकर ऋण प्रदान करते हैं, जिससे उधारकर्ताओं को कम ब्याज दरों और आसान शर्तों पर वित्तीय सहायता मिल सकती है।

डिजिटल लेंडिंग को बढ़ावा

MSME क्षेत्र में डिजिटल वित्तीय सेवाओं को मजबूत करने के लिए सरकार और SIDBI तकनीकी प्लेटफॉर्म का भी उपयोग कर रहे हैं। GST Sahay App और Trade Receivables Discounting System (TReDS) जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से उद्यमियों को तेजी से ऋण उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

इन प्लेटफॉर्म्स का उद्देश्य दस्तावेजी प्रक्रियाओं को सरल बनाना और छोटे व्यवसायों को समय पर वित्तीय सहायता प्रदान करना है। इससे नकदी प्रवाह की समस्या कम होती है और व्यवसायों की परिचालन क्षमता बढ़ती है।

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