N Chandrasekaran ने Tata Sons चेयरमैन पद से दिया इस्तीफा, 18 अगस्त की AGM से पहले बड़ा बदलाव

N Chandrasekaran ने Tata Sons के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया है। 18 अगस्त की AGM से पहले हुए इस बड़े बदलाव के बाद टाटा ग्रुप में नेतृत्व को लेकर हलचल तेज है।

टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, जिससे उनका करीब एक दशक लंबा कार्यकाल खत्म होने की दिशा में है। सूत्रों के मुताबिक, 63 वर्षीय चंद्रशेखरन ने टाटा संस के बोर्ड को अपने फैसले की जानकारी दे दी है।

बिजनेस न्यूज़: टाटा समूह के शीर्ष नेतृत्व में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने पद से हटने का फैसला किया है। हालांकि, वह अपने मौजूदा कार्यकाल की समाप्ति तक फरवरी 2027 तक पद पर बने रह सकते हैं। उनका यह फैसला ऐसे समय सामने आया है, जब टाटा संस की 18 अगस्त 2026 को होने वाली वार्षिक आम बैठक (AGM) में उनके निदेशक पद पर पुनर्नियुक्ति को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय होना था।

एन चंद्रशेखरन फरवरी 2017 में टाटा संस के चेयरमैन बने थे। 2022 में उन्हें पांच साल का दूसरा कार्यकाल दिया गया था, जो फरवरी 2027 तक निर्धारित है। आधिकारिक कंपनी दस्तावेजों के अनुसार उनका मौजूदा कार्यकाल 21 फरवरी 2022 से 20 फरवरी 2027 तक है।

करीब एक दशक बाद टाटा समूह में नेतृत्व परिवर्तन

चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा समूह ने टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, एयरलाइन और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे कई क्षेत्रों में विस्तार की रणनीति पर काम किया। वह टाटा संस के अलावा समूह की कई प्रमुख कंपनियों के बोर्ड और नेतृत्व से भी जुड़े रहे हैं। उनके पद छोड़ने की खबर से निवेशकों और कॉरपोरेट जगत में हलचल बढ़ गई है। 

रिपोर्ट सामने आने के बाद टाटा समूह की सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में भी दबाव देखा गया। बाजार रिपोर्टों के मुताबिक कुछ प्रमुख टाटा कंपनियों के शेयरों में करीब 4 फीसदी तक गिरावट आई।

18 अगस्त की AGM क्यों है अहम?

चंद्रशेखरन के भविष्य को लेकर असमंजस की एक बड़ी वजह 18 अगस्त को होने वाली टाटा संस की AGM थी। उनके चेयरमैन के रूप में बने रहने के लिए निदेशक के तौर पर उनका पुनर्नियुक्त होना जरूरी है। इस मुद्दे पर शेयरधारकों के मतदान को लेकर काफी समय से अनिश्चितता बनी हुई थी। टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स की करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है। 

ऐसे में ट्रस्ट्स का रुख कंपनी के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े फैसलों में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। हाल के महीनों में चंद्रशेखरन के अगले कार्यकाल को लेकर टाटा ट्रस्ट्स के भीतर भी चर्चा और मतभेद की खबरें सामने आती रही हैं।

Noel Tata की भूमिका पर भी नजर

टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा का नाम भी इस पूरे घटनाक्रम में महत्वपूर्ण है। रिपोर्टों के अनुसार, चंद्रशेखरन के भविष्य को लेकर टाटा ट्रस्ट्स की ओर से कुछ शर्तों और चिंताओं पर चर्चा हुई थी। इससे उनके पुनर्नियुक्ति प्रस्ताव को लेकर स्थिति जटिल हुई। हालांकि, किसी व्यक्ति के विरोध या समर्थन को लेकर सामने आई रिपोर्टों को अंतिम आधिकारिक निर्णय नहीं माना जाना चाहिए। टाटा समूह की नेतृत्व व्यवस्था से जुड़े सभी महत्वपूर्ण फैसले संबंधित बोर्ड और शेयरधारकों की औपचारिक प्रक्रिया के तहत ही तय होंगे।

Tata Trusts के सामने कानूनी चुनौतियां

टाटा संस के सबसे बड़े शेयरधारकों में शामिल कुछ ट्रस्ट्स से जुड़े मामलों ने भी हाल के महीनों में कॉरपोरेट गवर्नेंस पर ध्यान खींचा है। महाराष्ट्र के चैरिटी आयुक्त के हस्तक्षेप के चलते सर रतन टाटा ट्रस्ट से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण मामलों पर निर्णय लेने की प्रक्रिया प्रभावित हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक ट्रस्ट बोर्ड की बैठकों में कुछ विवादास्पद मुद्दों को एजेंडे से अलग रखा गया था।

इस पृष्ठभूमि में चंद्रशेखरन के नेतृत्व को लेकर फैसला और भी महत्वपूर्ण हो गया था। टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस में बड़ी हिस्सेदारी होने के कारण उसकी राय कंपनी की रणनीतिक दिशा पर व्यापक प्रभाव डाल सकती है।

चंद्रशेखरन का कार्यकाल क्यों रहा अहम?

एन चंद्रशेखरन ने टाटा समूह के सबसे कठिन दौरों में से एक में नेतृत्व संभाला था। वह इससे पहले टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के प्रमुख रहे और 2017 में टाटा संस की कमान संभाली। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार वह 2007 में TCS बोर्ड में शामिल हुए थे और बाद में टाटा संस के चेयरमैन नियुक्त किए गए।उनके नेतृत्व में समूह ने एयर इंडिया के अधिग्रहण, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में निवेश तथा इलेक्ट्रिक वाहन कारोबार जैसे नए क्षेत्रों पर जोर दिया। हालांकि, कुछ नए और बड़े कारोबारी उपक्रमों में नुकसान को लेकर भी समूह के भीतर सवाल उठते रहे हैं।

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