नागालैंड में बारिश बनी जानलेवा, मोकोकचुंग में भूस्खलन से दो छात्रों की मौत

नागालैंड के मोकोकचुंग जिले में भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन में दो किशोर भाइयों की मौत हो गई, जबकि उनकी मां घायल हो गईं। जानिए पूरी घटना और राहत कार्य।

नागालैंड के मोकोकचुंग जिले में भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन में दो किशोर भाइयों की मौत हो गई, जबकि उनकी मां घायल हो गईं। लगातार हो रही बारिश से राज्य के कई हिस्सों में भूस्खलन और बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।

कोहिमा: नागालैंड में लगातार हो रही भारी बारिश ने एक और परिवार को गहरे शोक में डुबो दिया। राज्य के मोकोकचुंग जिले के अपर पेनली वार्ड में बुधवार को बारिश के कारण हुए भूस्खलन में दो सगे किशोर भाइयों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि उनकी मां गंभीर रूप से घायल हो गईं। यह घटना राज्य में जारी मानसूनी आपदा की गंभीरता को एक बार फिर उजागर करती है।

स्थानीय प्रशासन और राहत एजेंसियों के अनुसार, भूस्खलन उस समय हुआ जब परिवार अपने किराए के मकान में मौजूद था। पहाड़ी ढलान से अचानक मलबा और मिट्टी घर पर आ गिरी, जिससे मकान का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे में दोनों भाइयों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनकी मां घायल अवस्था में मलबे से बाहर निकाली गईं।

मृतक दोनों छात्र थे

हादसे में जान गंवाने वाले भाइयों की पहचान मुवालोंग संगतम (19 वर्ष) और थ्रिडिबा संगतम (16 वर्ष) के रूप में हुई है। मुवालोंग कक्षा 12 के छात्र थे, जबकि थ्रिडिबा कक्षा 11 में पढ़ते थे। दोनों क्वीन मैरी हायर सेकेंडरी स्कूल के छात्र थे और मूल रूप से नागालैंड के अलिसोपुर गांव के रहने वाले थे।

दोनों भाई पढ़ाई के लिए मोकोकचुंग में अपनी मां के साथ किराए के मकान में रह रहे थे। अचानक आए भूस्खलन ने परिवार की जिंदगी बदल दी और कुछ ही क्षणों में दोनों बेटों की जान चली गई।

मां का अस्पताल में इलाज जारी

हादसे में घायल हुई दोनों छात्रों की मां को तुरंत स्थानीय अस्पताल पहुंचाया गया। चिकित्सकों के अनुसार उनका इलाज जारी है और उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। हालांकि उनकी हालत को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है। परिवार और स्थानीय समुदाय उनकी शीघ्र स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।

चर्च के पास स्थित था मकान

जानकारी के अनुसार, जिस मकान में यह परिवार रह रहा था वह संगतम बैपटिस्ट चर्च के पादरी के आवास के ऊपर स्थित था। लगातार बारिश के कारण पहाड़ी की मिट्टी कमजोर हो गई थी, जिसके चलते अचानक बड़ा हिस्सा खिसक गया और मकान उसकी चपेट में आ गया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में पिछले कई दिनों से लगातार वर्षा हो रही थी, जिससे भूस्खलन का खतरा पहले से बना हुआ था।

स्थानीय संगठन ने जताया शोक

घटना के बाद ईस्टर्न नागालैंड पीपुल्स यूनियन मोकोकचुंग (ENPUM) ने गहरा शोक व्यक्त किया। संगठन ने मृतक भाइयों के पार्थिव शरीर को चर्च परिसर में प्रार्थना सभा के बाद उनके पैतृक गांव ले जाने की घोषणा की।

संगठन ने शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए दिवंगत छात्रों की आत्मा की शांति और उनकी मां के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना की।

नागालैंड में बढ़ रहे हैं बारिश से जुड़े हादसे

यह घटना ऐसे समय हुई है जब नागालैंड के कई जिलों में लगातार भारी बारिश हो रही है। मानसून के दौरान राज्य के पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और अचानक बाढ़ की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।

कई स्थानों पर सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं, पुलों को नुकसान पहुंचा है और सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन भी बाधित हो गया है, जिससे राहत और बचाव कार्यों में कठिनाई आ रही है।

प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की

राज्य प्रशासन ने संवेदनशील और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। अधिकारियों ने कहा है कि लगातार बारिश के चलते भूस्खलन का खतरा अभी भी बना हुआ है।

आपदा प्रबंधन टीमें विभिन्न जिलों में स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और जरूरत पड़ने पर राहत एवं बचाव अभियान चलाए जा रहे हैं। प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है।

मानसून में क्यों बढ़ जाता है भूस्खलन का खतरा?

विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार बारिश होने पर पहाड़ियों की मिट्टी में अत्यधिक नमी भर जाती है। इससे मिट्टी की पकड़ कमजोर हो जाती है और ढलानों पर मौजूद चट्टानें तथा मिट्टी अचानक नीचे खिसक सकती हैं।

यदि ऐसे क्षेत्रों में मकान या अन्य निर्माण कार्य किए गए हों तो जोखिम और बढ़ जाता है। इसलिए मानसून के दौरान पहाड़ी राज्यों में विशेष निगरानी और समय पर चेतावनी व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

आपदा प्रबंधन को और मजबूत करने की जरूरत

पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों की तरह नागालैंड भी हर वर्ष मानसून के दौरान भूस्खलन और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं का सामना करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि संवेदनशील इलाकों की पहचान, बेहतर जल निकासी व्यवस्था, ढलानों की वैज्ञानिक निगरानी और समय रहते लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने जैसी व्यवस्थाओं को और मजबूत करना आवश्यक है।

साथ ही जोखिम वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए जागरूकता अभियान और आपदा पूर्व तैयारी भी भविष्य में ऐसी घटनाओं से होने वाले नुकसान को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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