शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने महाराष्ट्र के स्कूल अनुमोदन प्रक्रिया में ₹200 करोड़ के कथित वसूली रैकेट का आरोप लगाया। उन्होंने स्कूल मंजूरी के लिए रिश्वत का कथित 'रेट कार्ड' जारी करते हुए सरकार पर शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार, पेपर लीक और फर्जी डिग्री घोटालों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।
मुंबई: शिवसेना UBT के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने महाराष्ट्र की शिक्षा व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि राज्य में निजी स्कूलों की मान्यता और अनुमोदन प्रक्रिया कथित तौर पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का केंद्र बन चुकी है। राउत ने आरोप लगाया कि स्कूलों को अनुमति दिलाने के नाम पर लगभग ₹200 करोड़ का कथित वसूली रैकेट संचालित किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में कथित रूप से रिश्वत की एक तय व्यवस्था या "रेट कार्ड" लागू है।
राउत ने नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत और सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा बयान में कहा कि शिक्षा क्षेत्र में भ्रष्टाचार के कारण महाराष्ट्र की प्रतिष्ठा प्रभावित हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूलों को अनुमति दिलाने की प्रशासनिक प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रह गई है और विभिन्न स्तरों पर कथित रूप से धन की मांग की जाती है।
स्कूल अनुमोदन प्रक्रिया में रिश्वत का लगाया आरोप
संजय राउत के अनुसार, निजी शैक्षणिक संस्थाएं पहले ही स्कूल भवन, भूमि और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर करोड़ों रुपये का निवेश करती हैं। इसके बावजूद उन्हें विभिन्न सरकारी मंजूरियों के लिए अतिरिक्त धनराशि देने का दबाव झेलना पड़ता है। उन्होंने दावा किया कि एक स्कूल को सभी प्रशासनिक मंजूरियां प्राप्त करने के लिए लगभग ₹50 लाख तक खर्च करने पड़ते हैं। राउत ने आरोप लगाया कि अलग-अलग स्तरों पर मंजूरी के लिए तय रकम मांगी जाती है और इसी कथित व्यवस्था को उन्होंने "रेट कार्ड" बताया।
कथित 'रेट कार्ड' में क्या-क्या आरोप लगाए गए
राउत ने दावा किया कि स्कूलों से प्रारंभिक लेटर ऑफ इंटेंट (LOI) के लिए ₹5 लाख, स्व-वित्तपोषित स्कूलों की अंतिम मंजूरी के लिए अलग-अलग स्तरों पर ₹5 लाख से ₹10 लाख और अतिरिक्त कक्षाओं की अनुमति के लिए लगभग ₹8 लाख तक की कथित मांग की जाती है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित सरकारी विभाग की ओर से इस पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अधिकारी पर भी लगाए गंभीर आरोप
संजय राउत ने स्कूल शिक्षा मंत्री के कार्यालय में तैनात एक अधिकारी (OSD) पर भी आरोप लगाए। उनका दावा है कि संबंधित अधिकारी बिना कथित भुगतान के स्कूल प्रबंधन से मुलाकात तक नहीं करते। उन्होंने कहा कि कई संस्थान रिश्वत देने के बाद भी महीनों तक मंजूरी का इंतजार करते रहते हैं और उन्हें बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। राउत ने आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारी अपने राजनीतिक संरक्षण का हवाला देकर कार्रवाई से बचने का दावा करते हैं।
₹200 करोड़ के कथित वसूली नेटवर्क का दावा
राउत ने कहा कि कई निजी शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधियों ने उनसे व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर कथित भ्रष्टाचार से जुड़े दस्तावेज और जानकारी साझा की है। उनके अनुसार पूरे राज्य में यह कथित नेटवर्क करीब ₹200 करोड़ की वसूली कर चुका है। हालांकि उन्होंने कहा कि वह इन आरोपों से जुड़े साक्ष्य सार्वजनिक करेंगे, लेकिन अभी तक इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

सरकारी स्कूलों की स्थिति पर भी उठाए सवाल
संजय राउत ने कहा कि एक ओर निजी स्कूलों से कथित तौर पर भारी रकम वसूली जा रही है, वहीं दूसरी ओर राज्य के लगभग 2,000 सरकारी स्कूल संसाधनों और वित्तीय संकट के कारण बंद हो चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा क्षेत्र में प्राथमिकताओं का संतुलन बिगड़ गया है और सरकारी स्कूलों की स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है।
पेपर लीक और फर्जी डिग्री का भी मुद्दा उठाया
राउत ने केवल स्कूल अनुमोदन तक ही अपनी बात सीमित नहीं रखी। उन्होंने राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े कथित पेपर लीक मामलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC), शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET), ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती और NEET-UG जैसी परीक्षाओं को लेकर भी गंभीर सवाल उठ चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने राज्य में फर्जी अंकतालिकाओं और डिग्रियों के कथित प्रसार पर भी चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि पिछले एक दशक में बड़ी संख्या में फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्र जारी हुए हैं। हालांकि इस दावे के समर्थन में कोई आधिकारिक आंकड़ा प्रस्तुत नहीं किया गया।
शिक्षकों की गैर-शैक्षणिक ड्यूटी पर आपत्ति
राउत ने यह भी कहा कि शिक्षकों को पढ़ाई के बजाय विभिन्न प्रशासनिक और सर्वेक्षण कार्यों में लगाया जा रहा है। उनका मानना है कि ऐसे कार्यों के लिए बेरोजगार युवाओं की नियुक्ति की जानी चाहिए ताकि शिक्षक केवल शिक्षा पर ध्यान केंद्रित कर सकें। उन्होंने कहा कि इससे स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता बेहतर होगी और युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।
सरकार पर राजनीतिक हमला
संजय राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था में सुधार के बजाय राजनीतिक बहस में उलझी हुई है। उन्होंने कहा कि संसद में पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों पर वर्तमान समस्याओं के समाधान की बजाय ऐतिहासिक राजनीतिक बहस छेड़ी जाती है। राउत ने शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और जवाबदेही तय करने की मांग की।
सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार
राउत के आरोपों के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। हालांकि इस खबर के प्रकाशित होने तक महाराष्ट्र सरकार या संबंधित विभाग की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि सरकार की ओर से कोई स्पष्टीकरण या जांच संबंधी घोषणा की जाती है, तो यह मामला और अधिक राजनीतिक तथा प्रशासनिक महत्व हासिल कर सकता है।










