धान की खेती के मौसम से ठीक पहले नालंदा के किसानों की चिंता बढ़ गई है। जिले में सिंचाई व्यवस्था की स्थिति संतोषजनक नहीं है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 355 सरकारी नलकूपों में से केवल 196 ही चालू हालत में हैं, जबकि 159 नलकूप विभिन्न कारणों से बंद पड़े हैं। ऐसे में खेती की तैयारी कर रहे किसानों के सामने सिंचाई का बड़ा संकट खड़ा होता दिखाई दे रहा है।
नालंदा कृषि प्रधान जिला माना जाता है और यहां बड़ी संख्या में किसान धान की खेती पर निर्भर हैं। धान की रोपाई शुरू होने से पहले खेतों में पर्याप्त पानी की आवश्यकता होती है। लेकिन बड़ी संख्या में सरकारी नलकूपों के बंद होने से किसानों को वैकल्पिक साधनों पर निर्भर होना पड़ सकता है, जिससे उनकी लागत बढ़ने की आशंका है।
किसानों का कहना है कि हर वर्ष सिंचाई व्यवस्था को लेकर समस्याएं सामने आती हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल पाता। कई नलकूप लंबे समय से खराब पड़े हैं और उनकी मरम्मत नहीं हो सकी है। कुछ स्थानों पर मोटर खराब है तो कहीं बिजली आपूर्ति और तकनीकी खामियों के कारण नलकूप चालू नहीं हो पा रहे हैं।
स्थिति को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रस्तावित लगभग 12 करोड़ रुपये की योजना भी अब तक धरातल पर नहीं उतर सकी है। बताया जा रहा है कि यह योजना विभिन्न प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रियाओं में फंसी हुई है। किसानों का आरोप है कि यदि समय पर योजना लागू हो जाती तो सिंचाई संकट काफी हद तक कम किया जा सकता था।
बिहार में मानसून की स्थिति को लेकर भी किसान लगातार नजर बनाए हुए हैं। हालांकि बारिश की उम्मीद है, लेकिन खेती पूरी तरह मानसून पर निर्भर नहीं रह सकती। शुरुआती दौर में सिंचाई की व्यवस्था नहीं होने से धान की रोपाई प्रभावित हो सकती है, जिसका असर उत्पादन पर भी पड़ सकता है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी नलकूप ग्रामीण सिंचाई व्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। यदि इनका संचालन सही तरीके से हो तो किसानों की लागत कम होती है और समय पर सिंचाई उपलब्ध हो जाती है। लेकिन बड़ी संख्या में नलकूपों का बंद रहना कृषि उत्पादन के लिए चुनौती बन सकता है।
स्थानीय किसानों ने प्रशासन से बंद पड़े नलकूपों की तत्काल मरम्मत कराने और लंबित योजना को जल्द लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि धान की खेती शुरू होने से पहले यदि व्यवस्था दुरुस्त नहीं हुई तो हजारों किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।
कृषि विभाग और संबंधित अधिकारियों का कहना है कि बंद नलकूपों को चालू करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। जिन स्थानों पर तकनीकी खामियां हैं, वहां मरम्मत का काम कराया जाएगा। साथ ही लंबित योजनाओं को भी आगे बढ़ाने की प्रक्रिया जारी है।











