नंदीग्राम उपचुनाव: जमानत मिलने पर कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को चुनाव लड़ने दे बंगाल सरकार- हाईकोर्ट

नंदीग्राम उपचुनाव से पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा कि जमानत मिलने पर कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को चुनाव लड़ने दिया जाए। प्रधान फिलहाल जेल में हैं।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार से कहा कि जमानत मिलने पर नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को चुनाव लड़ने दिया जाए। प्रधान 11 मामलों में आरोपी हैं और पांच मामलों में गिरफ्तारी के बाद फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव से पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कहा है कि यदि कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को जमानत मिलती है, तो उन्हें चुनाव लड़ने दिया जाए। मंगलवार को मामले की सुनवाई जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की अदालत में हुई। प्रधान फिलहाल जेल में हैं और उनके खिलाफ कुल 11 मामले दर्ज हैं।

मिलन प्रधान नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार हैं। उन्हें पांच मामलों में गिरफ्तार किया जा चुका है। उनके खिलाफ दर्ज मामलों में 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से जुड़े मामले भी शामिल हैं। अदालत में हुई सुनवाई के दौरान चुनाव लड़ने और प्रचार करने से जुड़े उनके अधिकारों को लेकर स्थिति पर चर्चा हुई।

6 अक्टूबर को होगी नंदीग्राम उपचुनाव की वोटिंग

नंदीग्राम विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए मतदान 6 अक्टूबर को होगा। चुनाव प्रचार 4 अक्टूबर को समाप्त हो जाएगा, जबकि मतगणना 9 अक्टूबर को होगी।

मौजूदा स्थिति में मिलन प्रधान के लिए व्यक्तिगत रूप से चुनाव प्रचार करना मुश्किल हो गया है, क्योंकि वे न्यायिक हिरासत में हैं। उन्हें चुनाव प्रचार में शामिल होने का अवसर तभी मिल सकेगा, जब संबंधित अदालत से उन्हें जमानत मिलती है।

हाईकोर्ट की सुनवाई में राज्य सरकार के वकील से कहा गया कि जमानत मिलने की स्थिति में प्रधान को चुनाव लड़ने की अनुमति दी जानी चाहिए। इस निर्देश का महत्व इसलिए भी है क्योंकि मतदान में अब सीमित समय बचा है।

दो निचली अदालतों ने भेजा न्यायिक हिरासत में

मिलन प्रधान को 18 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद हल्दिया सब-डिविजनल कोर्ट ने 19 सितंबर को चार मामलों में उन्हें 3 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। ये मामले वर्ष 2007 के नंदीग्राम आंदोलन से संबंधित हैं।

इसके बाद 21 सितंबर को कांथी कोर्ट ने आर्म्स एक्ट के लगभग दो दशक पुराने मामले में उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

इन दोनों न्यायिक आदेशों के कारण प्रधान के लिए चुनाव प्रचार की संभावनाएं काफी सीमित हो गई हैं। यदि उन्हें समय रहते जमानत नहीं मिलती है, तो वे चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं रह पाएंगे।

प्रधान के वकील ने कांथी कोर्ट के आदेश को चुनौती देने की बात कही

सुनवाई के दौरान मिलन प्रधान की ओर से पेश वकील अयान भट्टाचार्य ने बताया कि प्रधान को 18 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने कहा कि कांथी कोर्ट के आदेश को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी।

प्रधान ने सोमवार को छह मामलों में पुलिस की जबरन कार्रवाई से सुरक्षा की मांग की थी। सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि इनमें से पांच मामले पिछली सरकार द्वारा वापस लिए जा चुके हैं।

सरकार ने यह भी बताया कि शेष एक मामले में मिलन प्रधान वांटेड नहीं हैं। प्रधान के वकील ने अदालत में स्पष्ट किया कि वे उन पांच मामलों में राहत की मांग नहीं कर रहे हैं, जिनमें प्रधान पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

इनमें से कुछ मामले वर्ष 2007 में नंदीग्राम में भूमि अधिग्रहण के विरोध में हुए आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए थे।

वकील का आरोप- राजनीतिक समर्थन के बाद हुई गिरफ्तारी

मिलन प्रधान के वकील ने अदालत में आरोप लगाया कि नंदीग्राम उपचुनाव के लिए ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले TMC धड़े से समर्थन मिलने के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की गई और उन्हें गिरफ्तार किया गया।

यह आरोप प्रधान के पक्ष की दलील का हिस्सा था। दूसरी ओर, राज्य सरकार ने गिरफ्तारी को अदालत द्वारा जारी वारंट से जुड़ा बताया।

मामले की सुनवाई के दौरान प्रधान के वकील ने पुलिस से यह जानकारी उपलब्ध कराने की मांग भी की कि 11 दर्ज मामलों के अलावा उनके खिलाफ कोई अन्य आपराधिक मामला लंबित है या नहीं।

सरकार ने गिरफ्तारी को अदालत के वारंट से जोड़ा

पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश एडिशनल एडवोकेट जनरल ने अदालत को बताया कि मिलन प्रधान की गिरफ्तारी निचली अदालत की ओर से जारी वारंट के आधार पर हुई थी।

सरकार के अनुसार, यह वारंट वर्ष 2007 के एक आपराधिक मामले में जारी किया गया था और 2021 से लंबित था। सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि चुनाव के दौरान पुलिस के लिए लंबित गिरफ्तारी वारंट पर कार्रवाई को लेकर चुनाव आयोग की गाइडलाइन लागू होती है।

एडिशनल एडवोकेट जनरल ने कहा कि किसी क्षेत्र में चुनाव होने पर संबंधित पुलिस अधिकारी की जिम्मेदारी होती है कि मतदान से पहले लंबित गिरफ्तारी वारंट पर कार्रवाई की जाए।

राज्य सरकार ने यह भी बताया कि इस मामले में जिन अन्य आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट लंबित थे, उन्हें भी गिरफ्तार किया गया है। इस तरह सरकार ने प्रधान की गिरफ्तारी को चुनावी प्रक्रिया से अलग, लंबित न्यायिक वारंट की कार्रवाई के रूप में प्रस्तुत किया।

क्यों महत्वपूर्ण है नंदीग्राम उपचुनाव?

नंदीग्राम पश्चिम बंगाल की राजनीति में महत्वपूर्ण विधानसभा क्षेत्रों में से एक है। वर्ष 2007 में भूमि अधिग्रहण के विरोध में हुए आंदोलन ने राज्य की राजनीति पर व्यापक प्रभाव डाला था। उस समय ममता बनर्जी के नेतृत्व में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन हुआ था और सुवेंदु अधिकारी ने भी इसमें मदद की थी।

वर्ष 2026 के विधानसभा चुनाव में सुवेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम विधानसभा सीट से जीत दर्ज की थी। उन्होंने कोलकाता की भवानीपुर सीट से भी चुनाव जीता। इसके बाद उन्होंने नंदीग्राम विधानसभा सीट छोड़ दी।

सुवेंदु अधिकारी के सीट छोड़ने के बाद निर्वाचन आयोग ने नंदीग्राम में उपचुनाव की घोषणा की। अब इस सीट पर होने वाला चुनाव राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मुकाबले के रूप में देखा जा रहा है।

जेल में उम्मीदवार के सामने चुनाव प्रचार की चुनौती

मिलन प्रधान के मामले में अदालत की कार्यवाही का एक अहम पहलू यह है कि वे फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। चुनाव प्रचार 4 अक्टूबर को समाप्त होना है और मतदान 6 अक्टूबर को होगा। ऐसे में जमानत मिलने का समय उनके चुनाव प्रचार की संभावनाओं को सीधे प्रभावित कर सकता है।

हालांकि, चुनाव लड़ने की पात्रता और जेल से बाहर रहकर प्रचार करने की स्थिति अलग-अलग कानूनी प्रश्न हैं। हाईकोर्ट की सुनवाई में राज्य सरकार को यह स्पष्ट किया गया कि जमानत मिलने पर प्रधान को चुनाव लड़ने दिया जाना चाहिए।

अब इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और जमानत पर होने वाली सुनवाई नंदीग्राम उपचुनाव के संदर्भ में महत्वपूर्ण होगी। चुनाव का परिणाम 9 अक्टूबर को मतगणना के बाद सामने आएगा।

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