रेप केस में नारायण साई को हाई कोर्ट से झटका, सजा निलंबित करने की याचिका खारिज

गुजरात हाई कोर्ट ने रेप केस में उम्रकैद काट रहे नारायण साई की सजा निलंबन याचिका खारिज की। कोर्ट ने सुनवाई में सहयोग न करने पर नाराजगी जताई।

गुजरात हाई कोर्ट ने रेप केस में उम्रकैद की सजा काट रहे नारायण साई की सजा निलंबित करने की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि वह 2019 से लंबित अपील की सुनवाई में सहयोग नहीं कर रहा था और कार्यवाही में देरी की कोशिश करता रहा।

अहमदाबाद: गुजरात हाई कोर्ट ने आसाराम के बेटे और रेप केस में दोषी नारायण साई को राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने उसकी उम्रकैद की सजा निलंबित करने की मांग वाली याचिका खारिज करते हुए कहा कि वह पिछले कई वर्षों से अपनी अपील की सुनवाई में सहयोग नहीं कर रहा था। अदालत ने यह भी माना कि मामले की कार्यवाही को टालने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए गए।

जस्टिस इलेश वोरा और जस्टिस आरटी वच्छानी की खंडपीठ ने 4 मई को पारित अपने आदेश में कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रथम दृष्टया यह मानना मुश्किल है कि आरोपी के अपीलीय अदालत से बरी होने की पर्याप्त संभावना है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में सजा निलंबित करने और जमानत देने के लिए मजबूत आधार होना जरूरी है, जो इस मामले में दिखाई नहीं देता।

हाई कोर्ट ने सुनवाई में सहयोग न करने पर जताई नाराजगी

कोर्ट ने अपने आदेश में नारायण साई के रवैये पर भी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि वह करीब 11 साल जेल में रह चुका है, लेकिन 2019 से लंबित अपनी अपील की अंतिम सुनवाई में उसने अपेक्षित सहयोग नहीं किया। कोर्ट के अनुसार, आरोपी ने समय-समय पर अलग-अलग याचिकाएं दायर कर अस्थायी और स्थायी जमानत लेने की कोशिश की।

खंडपीठ ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड से यह स्पष्ट होता है कि आरोपी को अपनी अपील की शीघ्र सुनवाई में विशेष रुचि नहीं थी। अदालत के मुताबिक उसने कार्यवाही में देरी करने के लिए कई तरह के कानूनी हथकंडे अपनाए, जिससे मामले की सुनवाई प्रभावित हुई।

2013 में दर्ज हुआ था मामला

यह मामला साल 2013 में सामने आया था, जब एक पूर्व महिला अनुयायी ने नारायण साई के खिलाफ दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के बाद मामले की जांच हुई और लंबी सुनवाई के बाद अप्रैल 2019 में सूरत की अदालत ने नारायण साई को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि आरोपी के खिलाफ पेश किए गए सबूत और गवाहों के बयान पर्याप्त हैं। इसी फैसले को चुनौती देते हुए नारायण साई ने गुजरात हाई कोर्ट में अपील दाखिल की थी, जो अभी भी लंबित है।

कई बार पैरोल और फर्लो पर बाहर आ चुका है साई

उम्रकैद की सजा मिलने के बाद नारायण साई कई बार पैरोल और फर्लो के जरिए जेल से बाहर आ चुका है। उसने स्वास्थ्य और पारिवारिक कारणों सहित कई आधारों पर अदालत से राहत मांगी थी। हालांकि, इस बार हाई कोर्ट ने सजा निलंबित करने की मांग को खारिज करते हुए साफ कर दिया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए उसे राहत नहीं दी जा सकती।

इस फैसले के बाद फिलहाल नारायण साई को जेल में ही रहना होगा। वहीं, उसकी मुख्य अपील पर सुनवाई आगे भी जारी रहेगी।

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