नेशनल हैंडलूम डे: कृतिका कामरा की अपील, ‘सिर्फ पोस्ट नहीं, खरीदारी से करें बुनकरों का समर्थन’

नेशनल हैंडलूम डे के अवसर पर अभिनेत्री कृतिका कामरा ने लोगों से भारतीय हथकरघा और बुनकरों का समर्थन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि केवल सोशल मीडिया पोस्ट साझा

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर अभिनेत्री कृतिका कामरा ने भारतीय हैंडलूम और पारंपरिक बुनाई से जुड़ी अपनी भावनाएं साझा कीं। उन्होंने अपनी शादी की साड़ी से जुड़ी यादों का जिक्र करते हुए बताया कि वह साड़ी उनके लिए सिर्फ एक परिधान नहीं, बल्कि भारतीय शिल्पकला, संस्कृति और कारीगरों की मेहनत का प्रतीक है।

एंटरटेनमेंट न्यूज़: राष्ट्रीय हथकरघा दिवस (National Handloom Day) के अवसर पर अभिनेत्री कृतिका कामरा ने भारतीय हैंडलूम उद्योग, पारंपरिक बुनकरों और टिकाऊ फैशन (Sustainable Fashion) को लेकर अपने विचार साझा किए। उनका मानना है कि सोशल मीडिया पर जागरूकता फैलाना महत्वपूर्ण है, लेकिन वास्तविक बदलाव तब आएगा जब लोग हैंडलूम उत्पादों को खरीदकर कारीगरों और बुनकरों का प्रत्यक्ष समर्थन करेंगे।

एक विशेष बातचीत में कृतिका ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों, चंदेरी हैंडलूम से जुड़ाव और फैशन उद्योग में पारंपरिक शिल्प के महत्व पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि भारत की समृद्ध हथकरघा परंपरा केवल सांस्कृतिक विरासत नहीं है, बल्कि लाखों बुनकर परिवारों की आजीविका का आधार भी है।

शादी की साड़ी से जुड़ी खास यादें

कृतिका कामरा ने बताया कि उनकी शादी की साड़ी उनके लिए केवल एक परिधान नहीं, बल्कि भावनाओं और पारिवारिक जुड़ाव का प्रतीक थी। उनके अनुसार, यह साड़ी उनकी मां ने चंदेरी के स्थानीय कारीगरों के साथ मिलकर विशेष रूप से तैयार करवाई थी। उन्होंने कहा कि वह अपनी शादी के लिए एक खास लाल रंग की साड़ी चाहती थीं और उस रंग को चुनने में काफी समय लगा। 

साड़ी में पारंपरिक तकनीकों के साथ असली जरी का उपयोग किया गया था। कृतिका के अनुसार, जब वह साड़ी तैयार होकर आई, तो उसमें केवल शिल्प कौशल ही नहीं बल्कि उनकी मां का स्नेह और समर्पण भी दिखाई देता था। उनका मानना है कि हाथों से तैयार की गई वस्तुओं में एक अलग प्रकार की आत्मीयता होती है, जिसे मशीन से बने उत्पादों में महसूस नहीं किया जा सकता।

चंदेरी से भावनात्मक जुड़ाव

कृतिका ने बताया कि उनका पैतृक क्षेत्र चंदेरी के आसपास स्थित है और बचपन से ही उनका इस ऐतिहासिक बुनकरी केंद्र से जुड़ाव रहा है। पहले चंदेरी की यात्राएं सामान्य पारिवारिक दौरों की तरह लगती थीं, लेकिन समय के साथ उन्होंने वहां के कारीगरों की मेहनत और कला को गहराई से समझा। उनके अनुसार, एक हैंडलूम साड़ी को तैयार करने में कई दिन या कई बार कई सप्ताह तक का समय लग सकता है। हर धागा, हर डिजाइन और हर बुनाई के पीछे कारीगरों का धैर्य, अनुभव और समर्पण जुड़ा होता है।

उन्होंने कहा कि आज के तेज़ रफ्तार दौर में, जहां अधिकांश उत्पाद बड़े पैमाने पर और कम समय में तैयार किए जाते हैं, वहीं हाथ से बनी वस्तुएं अपनी विशिष्टता और गुणवत्ता के कारण अलग पहचान रखती हैं।

युवाओं में बढ़ रही हैंडलूम की लोकप्रियता

हैंडलूम के भविष्य को लेकर कृतिका आशावादी नजर आती हैं। उनका मानना है कि नई पीढ़ी अब अपने कपड़ों की उत्पत्ति और निर्माण प्रक्रिया को लेकर अधिक जागरूक हो रही है। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने लोगों को यह समझने में मदद की है कि उनके कपड़े किन कारीगरों द्वारा और किन परिस्थितियों में बनाए जाते हैं।

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि हैंडलूम को केवल त्योहारों, शादियों या विशेष अवसरों तक सीमित नहीं रखना चाहिए। इसे दैनिक जीवन और आधुनिक फैशन का हिस्सा बनाने की जरूरत है। कृतिका स्वयं सार्वजनिक कार्यक्रमों, फैशन इवेंट्स और रेड कार्पेट अवसरों पर हैंडलूम पहनने का प्रयास करती हैं। उनका मानना है कि यदि अधिक लोग अपने रोजमर्रा के जीवन में हैंडलूम को अपनाते हैं, तो इससे पूरे उद्योग को बड़ा समर्थन मिलेगा।

‘सिर्फ हैशटैग से नहीं आएगा बदलाव’

नेशनल हैंडलूम डे पर चलने वाले अभियानों और सोशल मीडिया ट्रेंड्स पर टिप्पणी करते हुए कृतिका ने कहा कि जागरूकता अभियान महत्वपूर्ण हैं, लेकिन केवल पोस्ट साझा करने या हैशटैग इस्तेमाल करने से बुनकरों की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव नहीं आएगा। उन्होंने कहा कि यदि लोग वास्तव में पारंपरिक शिल्प और कारीगरों का समर्थन करना चाहते हैं, तो उन्हें हैंडलूम उत्पाद खरीदने चाहिए। प्रत्यक्ष खरीदारी से ही बुनकरों को रोजगार, आय और लंबे समय तक काम के अवसर मिल सकते हैं।

उनके अनुसार, उपभोक्ताओं की पसंद ही बाजार की दिशा तय करती है। जब अधिक लोग हैंडलूम को प्राथमिकता देंगे, तब इस क्षेत्र में निवेश, उत्पादन और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

अभिनय और उद्यमिता के बीच संतुलन

अभिनय के साथ-साथ कृतिका अब उद्यमिता के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि व्यवसाय की दुनिया उनके लिए नई है और इसमें उन्हें लगातार सीखना पड़ रहा है। कृतिका का कहना है कि अभिनय उनका पहला जुनून है, लेकिन हैंडलूम और पारंपरिक शिल्प के संरक्षण के लिए व्यवसायिक दृष्टिकोण भी आवश्यक है। उनका मानना है कि यदि इस क्षेत्र को आर्थिक रूप से मजबूत नहीं बनाया गया, तो कारीगरों और बुनकरों को स्थायी समर्थन देना मुश्किल होगा।

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