NEET-UG Protest: सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारी छात्रों को दी बड़ी राहत, दिल्ली समेत 5 राज्यों में FIR रद्द

NEET-UG Protest: सुप्रीम कोर्ट ने Article 142 के तहत दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और असम में प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने का आदेश

नीट-यूजी पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शनों में शामिल छात्रों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। मंगलवार को CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिले विशेष अधिकार का इस्तेमाल करते हुए दिल्ली समेत चार राज्यों में दर्ज प्रदर्शन से जुड़ी एफआईआर को बंद करने का आदेश दिया।

NEET-UG Protest: नीट-यूजी पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने दिल्ली समेत चार राज्यों में प्रदर्शन के दौरान दर्ज की गई एफआईआर को रद्द करने का आदेश दिया है। अदालत ने यह फैसला संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिले विशेष अधिकार का इस्तेमाल करते हुए सुनाया। हालांकि, मामले में 2,873 ऐसे लोगों के खिलाफ नई एफआईआर दर्ज करने की अनुमति दी गई है, जिनके बारे में अधिकारियों ने आपराधिक पृष्ठभूमि होने की जानकारी दी है।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद प्रदर्शनकारी संगठन सीजेपी ने 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च वापस लेने का निर्णय लिया है। अदालत ने केंद्र सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच संवाद को सकारात्मक बताते हुए कहा कि आपसी विश्वास और खुले मन से बातचीत के जरिए जटिल विवादों का समाधान निकाला जा सकता है।

किन राज्यों में दर्ज FIR होंगी रद्द?

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का असर दिल्ली के अलावा असम, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और बिहार में दर्ज उन मामलों पर पड़ेगा, जो नीट-यूजी प्रदर्शन से जुड़े थे। ये एफआईआर 20 से 25 जुलाई के बीच हुए विरोध-प्रदर्शनों से संबंधित बताई गई हैं। दिल्ली पुलिस और संबंधित राज्य सरकारों की ओर से इन मामलों को समाप्त करने के लिए अदालत से अनुच्छेद 142 के तहत विशेष राहत देने का आग्रह किया गया था।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे, ने मामले की सुनवाई के बाद एफआईआर रद्द करने का आदेश दिया।

प्रदर्शन के दौरान जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रदर्शनकारियों को दिए गए आश्वासन को दोहराया। उन्होंने अदालत को बताया कि नीट प्रदर्शन के दौरान आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने का भरोसा सरकार ने दिया है। केंद्र ने इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए तीन महीने का समय मांगा है। 

मुआवजे की व्यवस्था और उसके तौर-तरीके तय करने के लिए केंद्र संबंधित राज्य सरकारों और अन्य पक्षों के साथ विचार-विमर्श करेगा। इस आश्वासन को अदालत के सामने महत्वपूर्ण बिंदु के रूप में रखा गया और प्रदर्शनकारी पक्ष ने भी सरकार के रुख को सकारात्मक माना।

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2873 लोगों पर फिर FIR क्यों?

एफआईआर रद्द करने की राहत सभी प्रदर्शनकारियों के लिए बिना शर्त नहीं है। सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से बताया गया कि 2,873 लोगों के बारे में आपराधिक रिकॉर्ड होने की जानकारी उपलब्ध है। इसी आधार पर अदालत ने इन लोगों के खिलाफ कानून के मुताबिक नई एफआईआर दर्ज करने की अनुमति दी है। प्रदर्शनकारियों की ओर से पेश वकील हरिहरन ने इन लोगों की सूची उपलब्ध कराने की मांग की, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किन व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई प्रस्तावित है और उनके कथित आपराधिक रिकॉर्ड का आधार क्या है।

इस तरह अदालत के आदेश में एक तरफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन से जुड़े मामलों में राहत दी गई है, वहीं आपराधिक पृष्ठभूमि वाले बताए गए लोगों के मामलों को अलग रखने का रास्ता खुला है।

5 सितंबर का प्रस्तावित मार्च क्यों हुआ रद्द?

सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने अदालत को बताया कि संगठन ने 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च वापस लेने का फैसला किया है। यह निर्णय केंद्र सरकार के आश्वासन और सुप्रीम कोर्ट द्वारा एफआईआर रद्द करने के आदेश के बाद लिया गया। अदालत ने सौरव दास के इस बयान को रिकॉर्ड पर लिया। इससे संकेत मिला कि प्रदर्शनकारी पक्ष फिलहाल सरकार के साथ बातचीत के जरिए आगे बढ़ने को तैयार है।

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने दोनों पक्षों के बीच विश्वास और संवाद की जरूरत पर जोर दिया। अदालत का कहना था कि यदि बातचीत खुले मन और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ की जाए तो कठिन परिस्थितियों में भी समाधान निकाला जा सकता है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी कहा कि सरकार और प्रदर्शनकारी पक्ष के बीच हुई बातचीत सकारात्मक और रचनात्मक रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों पक्षों को एक-दूसरे का विरोधी या दुश्मन मानने के बजाय समाधान की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

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