नेपाल में आम चुनावों से पहले जनता समाजवादी पार्टी और लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी ने एकजुट होने का ऐलान किया है। इसे मधेशी राजनीति को मजबूत करने और संघीय लोकतंत्र को सुदृढ़ करने की अहम पहल माना जा रहा है।
Nepal Politics: नेपाल में आम चुनावों से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इसी कड़ी में दो प्रमुख मधेशी दलों ने एक अहम फैसला लिया है। जनता समाजवादी पार्टी (JSP) और लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी (LSP) ने चुनावों से पहले एकजुट होने की घोषणा की है। इस फैसले को मधेशी राजनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों दलों के नेताओं ने इसे देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए उठाया गया कदम बताया है।
जेएसपी और एलएसपी का एकीकरण ऐलान
रविवार को जनता समाजवादी पार्टी के नेता महंता ठाकुर और लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के नेता उपेंद्र यादव ने संयुक्त बयान जारी किया। इस बयान के जरिए दोनों दलों के एकीकरण की औपचारिक घोषणा की गई। नेताओं ने साफ किया कि यह फैसला किसी एक व्यक्ति या दल के हित में नहीं, बल्कि देश की राजनीतिक जरूरतों को समझते हुए लिया गया है।
संयुक्त बयान में कहा गया कि नेपाल की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों का गहन विश्लेषण करने के बाद यह निर्णय लिया गया है। नेताओं के अनुसार, संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य (Federal Democratic Republic) को मजबूत करने के लिए यह एक जरूरी कदम है।
फैसले के पीछे बताया गया मकसद
दोनों नेताओं ने अपने बयान में एकीकरण के उद्देश्य को स्पष्ट किया है। उनके अनुसार, इस कदम का मुख्य लक्ष्य एक न्यायपूर्ण समाज (Just Society) का निर्माण करना है। बयान में कहा गया कि आने वाले समय में संघवाद (Federalism), पहचान (Identity), अनुपात आधारित समावेशिता (Proportional Inclusion) और सामाजिक न्याय (Social Justice) जैसे मुद्दों को मजबूती से आगे बढ़ाया जाएगा।

नेताओं का कहना है कि इन मुद्दों को लंबे समय से नजरअंदाज किया जाता रहा है। ऐसे में दोनों दलों का साथ आना इन विषयों को राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में लाने की कोशिश है।
संघीय लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश
संयुक्त बयान में यह भी कहा गया कि नेपाल की संघीय लोकतांत्रिक गणतांत्रिक व्यवस्था को सुदृढ़ करना इस एकीकरण का अहम उद्देश्य है। नेताओं के मुताबिक, मौजूदा समय में देश को ऐसी राजनीति की जरूरत है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूती दे और सभी वर्गों को साथ लेकर चले।
दोनों दलों ने माना कि बिखरी हुई राजनीति के कारण कई अहम मुद्दे कमजोर पड़ जाते हैं। ऐसे में एकजुट होकर काम करने से न केवल मधेशी समुदाय की आवाज मजबूत होगी, बल्कि लोकतांत्रिक ढांचे को भी मजबूती मिलेगी।
संयुक्त बयान में आगे की प्रक्रिया का संकेत
महंता ठाकुर और उपेंद्र यादव द्वारा हस्ताक्षरित संयुक्त बयान में यह भी साफ किया गया है कि एकीकरण से जुड़ी सभी आवश्यक चर्चाएं और प्रक्रियात्मक मामलों पर बाद में विस्तार से बात की जाएगी। फिलहाल यह फैसला राजनीतिक सहमति के आधार पर लिया गया है। संगठनात्मक ढांचे, नेतृत्व और अन्य तकनीकी पहलुओं पर आगे विचार विमर्श होगा। यानी यह एक शुरुआती कदम है, जिसके बाद आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।
चुनावी माहौल में क्यों अहम है यह कदम
नेपाल में आम चुनावों से पहले इस तरह का एकीकरण राजनीतिक दृष्टि से खास माना जा रहा है। जेएसपी और एलएसपी दोनों ही मधेशी राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। ऐसे में उनका साथ आना चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
संयुक्त बयान में हालांकि चुनावी रणनीति का जिक्र नहीं किया गया है, लेकिन यह साफ है कि यह फैसला चुनावों के मद्देनजर लिया गया है। नेताओं ने इसे देशहित और समाजहित से जुड़ा फैसला बताया है।










