बिहार में नेपाल की बाढ़ का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। गंडक नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने के बाद नदी किनारे बसे इलाकों में दहशत का माहौल है। नेपाल में लगातार बारिश और बाढ़ के कारण नदियों में अचानक पानी बढ़ा है, जिसका सीधा असर बिहार की नदियों पर पड़ रहा है। गंडक नदी के तेज बहाव के बीच नेपाल की ओर से बहकर एक महिला का शव बिहार के नदी क्षेत्र में पहुंचने की सूचना सामने आई है। स्थानीय लोगों की सूचना पर एनडीआरएफ की टीम ने नदी से शव बरामद किया है।
गंडक के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए पश्चिम चंपारण समेत नदी किनारे के कई इलाकों में प्रशासन को अलर्ट किया गया है। नेपाल में आई भीषण बाढ़ और फ्लैश फ्लड के बाद बिहार की प्रमुख नदियों गंडक, गंगा, कोसी और बूढ़ी गंडक में भी पानी बढ़ने की स्थिति बनी हुई है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार कई नदियां अपने खतरे के निशान को पार कर चुकी हैं, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
गंडक नदी में नेपाल से शव बहकर आने की घटना ने हालात की गंभीरता को और उजागर कर दिया है। इससे पहले उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में भी गंडक नदी से तीन शव बरामद किए गए थे। इनमें दो महिलाएं और एक पुरुष शामिल थे। प्रशासन ने आशंका जताई थी कि ये शव नेपाल में आई बाढ़ के पानी के साथ बहकर भारत पहुंचे हैं।
गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर के बीच नदी में मछलियों की संख्या बढ़ने से स्थानीय मछुआरों को भी असामान्य स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। कई जगहों पर मछुआरों के जाल में सामान्य से बड़ी मात्रा में मछलियां फंस रही हैं। पश्चिम चंपारण के बगहा इलाके में भी नेपाल की आपदा के बाद गंडक में बहकर आई लकड़ियों और अन्य सामान के साथ बड़ी मात्रा में मछलियां मिलने की खबर सामने आई थी। एक स्थानीय रिपोर्ट में मछुआरों के जाल में करीब डेढ़ क्विंटल मछली फंसने का उल्लेख है।
गंडक नदी के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी के कारण नदी किनारे रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। खासकर निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों को लगातार सतर्क रहने की जरूरत है। प्रशासन की ओर से संवेदनशील गांवों और तटवर्ती क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है। नाव, राहत सामग्री और बचाव दलों की उपलब्धता को भी जांचा जा रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर तत्काल लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।
नेपाल में इस समय स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। 26 अगस्त को हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने से आई विनाशकारी बाढ़ ने नेपाल और चीन के सीमावर्ती क्षेत्रों में भारी तबाही मचाई है। बड़ी संख्या में लोगों की मौत और लापता होने की खबरें सामने आई हैं। इसके साथ ही मलबे के कारण बने जलाशयों में पानी बढ़ने से दोबारा बाढ़ आने का खतरा भी बना हुआ है।
नेपाल में बने अवरुद्ध जलाशयों से जुड़ा खतरा बिहार के लिए भी चिंता का कारण है, क्योंकि नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में होने वाली बारिश और वहां से आने वाला पानी गंडक नदी के बहाव को प्रभावित करता है। नेपाल के रासुवा जिले में एक बाढ़ से बना झीलनुमा जलाशय अपनी सीमा से बाहर बहने लगा था, जिसके बाद वहां राहत और बचाव कार्य भी कुछ समय के लिए रोकना पड़ा।
बिहार में गंडक के जलस्तर को लेकर पहले भी प्रशासन हाई अलर्ट पर रह चुका है। वाल्मीकिनगर बैराज से पानी के डिस्चार्ज में तेजी से उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया है। 27 अगस्त को बैराज से पानी का डिस्चार्ज रात में करीब 1.50 लाख क्यूसेक तक पहुंच गया था, जिसके बाद घटकर करीब 1.04 लाख क्यूसेक हुआ। हालांकि नेपाल के देवघाट इलाके में रात में हुई बारिश के बाद जलस्तर फिर बढ़ने लगा था।
ऐसी स्थिति में 30 लाख क्यूसेक पानी आने की आशंका ने नदी किनारे बसे इलाकों की चिंता और बढ़ा दी है। हालांकि इतने बड़े संभावित प्रवाह के संबंध में स्थानीय स्तर पर सामने आ रहे आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि अलग-अलग समय के जलप्रवाह और नेपाल के जलग्रहण क्षेत्र की स्थिति के आधार पर ही की जानी चाहिए। फिलहाल नेपाल में भारी बारिश और बाढ़ के कारण बिहार में नदियों के बढ़ते जलस्तर को लेकर प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है।
गंडक के बढ़ते पानी का असर पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण और आसपास के निचले इलाकों पर पड़ सकता है। नदी का पानी बढ़ने पर तटबंधों पर दबाव भी बढ़ सकता है। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों और इंजीनियरों को तटबंधों की निगरानी बढ़ाने तथा संवेदनशील स्थानों पर लगातार पेट्रोलिंग करने के निर्देश दिए जाते हैं।
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नदी किनारे बसे गांवों में लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। अचानक पानी बढ़ने की स्थिति में लोग नदी या उसके आसपास जाने से बचें। मछुआरों और नाव संचालकों के लिए भी तेज बहाव के दौरान नदी में जाना खतरनाक हो सकता है। प्रशासन की ओर से जारी चेतावनी को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।
गंडक के पानी के साथ नेपाल से लकड़ी, घरेलू सामान और अन्य मलबा भी बहकर भारत पहुंच रहा है। इससे नदी में नाव चलाने और मछली पकड़ने वालों के लिए खतरा बढ़ सकता है। तेज बहाव के बीच पानी में दिखाई नहीं देने वाली वस्तुएं नावों से टकरा सकती हैं। ऐसे में नदी में गतिविधियां करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
महिला का शव मिलने की घटना के बाद प्रशासन के सामने एक और चुनौती मृतका की पहचान करने की है। पुलिस और प्रशासन शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं। आशंका है कि महिला नेपाल में आई बाढ़ की चपेट में आई हो सकती है, लेकिन पहचान और मौत की वास्तविक परिस्थितियां जांच के बाद ही स्पष्ट होंगी। महराजगंज में मिले तीन शवों की भी तत्काल पहचान नहीं हो सकी थी।
गंडक नदी नेपाल में नारायणी नदी के नाम से जानी जाती है और नेपाल से भारत में प्रवेश करने के बाद यह बिहार तथा उत्तर प्रदेश के कई इलाकों से होकर गुजरती है। यही वजह है कि नेपाल के जलग्रहण क्षेत्र में होने वाली अत्यधिक बारिश का प्रभाव सीमावर्ती भारतीय इलाकों में तेजी से दिखाई देता है।
बिहार में इस समय केवल गंडक ही चिंता का कारण नहीं है। गंगा, कोसी और बूढ़ी गंडक समेत कई नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार कई नदियां खतरे के निशान को पार कर चुकी हैं और राज्य के कई हिस्सों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
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निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए आने वाले घंटे बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं। यदि नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश जारी रहती है तो नदियों के जलस्तर में फिर तेजी आ सकती है। वहीं यदि बारिश कम होती है और बैराज से पानी का डिस्चार्ज नियंत्रित रहता है तो स्थिति में धीरे-धीरे सुधार भी संभव है। इसी कारण प्रशासन लगातार जलस्तर और डिस्चार्ज के आंकड़ों की निगरानी कर रहा है।
गंडक के जलस्तर में अचानक उतार-चढ़ाव पहले भी देखा गया है। 27 अगस्त को पानी का डिस्चार्ज घटने से कुछ राहत मिली थी, लेकिन नेपाल में दोबारा बारिश होने के बाद जलस्तर फिर बढ़ने लगा था। इससे साफ है कि बिहार के सीमावर्ती इलाकों में स्थिति पूरी तरह नेपाल के मौसम और वहां के जलग्रहण क्षेत्रों पर निर्भर बनी हुई है।
तटबंधों की सुरक्षा को लेकर भी विभागीय टीमें सक्रिय हैं। यदि नदी का पानी लगातार बढ़ता है तो कमजोर स्थानों पर दबाव बढ़ सकता है। इसलिए तटबंधों की निगरानी, कटाव वाले स्थानों की पहचान और आवश्यक सामग्री की उपलब्धता महत्वपूर्ण हो जाती है। प्रशासन को किसी भी आपात स्थिति में राहत और बचाव अभियान शुरू करने के लिए तैयार रहना होगा।
ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी चिंता खेतों और फसलों को लेकर है। नदी का पानी यदि तटबंध या निचले इलाकों में फैलता है तो खेतों में जलजमाव हो सकता है। इससे धान और अन्य खरीफ फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। पशुपालकों को भी अपने मवेशियों को सुरक्षित और ऊंचे स्थान पर रखने की जरूरत है।
नदी के आसपास रहने वाले लोगों को बच्चों और बुजुर्गों को विशेष रूप से सुरक्षित रखने की जरूरत है। बाढ़ के दौरान बच्चे अक्सर पानी के बढ़ते स्तर को देखने के लिए नदी या जलभराव वाले स्थानों के पास चले जाते हैं, जो बेहद खतरनाक हो सकता है। लोगों को प्रशासन की ओर से बनाए गए सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों की जानकारी पहले से रखनी चाहिए।
फिलहाल नेपाल में जारी आपदा के कारण बिहार के सीमावर्ती इलाकों पर खतरा बना हुआ है। गंडक नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर है और नदी में नेपाल से शव बहकर आने की घटनाएं स्थिति की गंभीरता को दिखा रही हैं। दूसरी तरफ मछुआरों को बड़ी मात्रा में मछलियां मिलने की घटनाएं भी नदी के तेज बहाव और उसमें आए बदलाव को दर्शाती हैं।
प्रशासन की ओर से लगातार स्थिति पर नजर रखी जा रही है। जल संसाधन विभाग, जिला प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन से जुड़ी टीमें संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने की तैयारी में हैं। नेपाल से आने वाले पानी में अगर और बढ़ोतरी होती है तो निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की जरूरत पड़ सकती है।
कुल मिलाकर नेपाल की भीषण बाढ़ का असर बिहार में साफ दिखाई दे रहा है। गंडक नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच चुका है, नदी में नेपाल से बहकर महिला का शव मिलने से चिंता बढ़ी है और तटवर्ती इलाकों में प्रशासन की निगरानी तेज है। नेपाल में दोबारा बारिश और जलाशयों में बढ़ते पानी को देखते हुए बिहार में अगले कुछ घंटों और दिनों तक गंडक समेत अन्य नदियों की स्थिति पर लगातार नजर रखना बेहद जरूरी होगा









