नेपाल से भारत में आती हैं 9 प्रमुख नदियां, कोसी समेत इन नदियों से बिहार-यूपी पर बढ़ता है बाढ़ का खतरा

नेपाल से भारत में शारदा, घाघरा, गंडक, बागमती, कोसी समेत 9 प्रमुख नदियां आती हैं। मानसून में जलस्तर बढ़ने से बिहार और यूपी में बाढ़ का खतरा बढ़ता है।

नेपाल से 9 प्रमुख नदियां भारत में प्रवेश करती हैं, जिनमें शारदा, घाघरा, राप्ती, गंडक, बागमती और कोसी शामिल हैं। बारिश के दौरान इन नदियों का बढ़ा जलस्तर बिहार और उत्तर प्रदेश में बाढ़ का खतरा बढ़ाता है।

नेपाल से भारत आने वाली नदियां: नेपाल से निकलने वाली कई नदियां उत्तर भारत के लिए महत्वपूर्ण जल स्रोत हैं, लेकिन मानसून के दौरान इनका बढ़ता जलस्तर बाढ़ की बड़ी वजह बन सकता है। शारदा, घाघरा और राप्ती उत्तर प्रदेश में, जबकि बूढ़ी गंडक, बागमती, कमला, कोसी और महानंदा बिहार में प्रवेश करती हैं। गंडक दोनों राज्यों से होकर बहती है। कोसी को बिहार का शोक भी कहा जाता है।

नेपाल से भारत में प्रवेश करती हैं 9 प्रमुख नदियां

जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार, नेपाल से भारत में प्रवेश करने वाली प्रमुख नदियों में शारदा, घाघरा, राप्ती, गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती, कमला, कोसी और महानंदा शामिल हैं।

नेपाल से भारत में आती हैं 9 प्रमुख नदियां, कोसी समेत इन नदियों से बिहार-यूपी पर बढ़ता है बाढ़ का खतरा

इनमें शारदा, घाघरा और राप्ती उत्तर प्रदेश में बहती हैं। वहीं बूढ़ी गंडक, बागमती, कमला, कोसी और महानंदा बिहार से होकर गुजरती हैं। गंडक नदी का प्रवाह उत्तर प्रदेश और बिहार दोनों राज्यों में है।

इन नदियों का सामान्य समय में कृषि और जल संसाधनों के लिहाज से महत्वपूर्ण योगदान है। हालांकि, अत्यधिक बारिश के दौरान इनके जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी से निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति पैदा हो सकती है।

6000 से ज्यादा जलधाराओं का भारत की ओर बहाव

रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल से उत्तर भारत की दिशा में 6000 से अधिक नदियां और जलधाराएं बहती हैं। सूखे मौसम में इनका गंगा नदी के प्रवाह में करीब 70% योगदान बताया जाता है।

मानसून के दौरान यही जलधाराएं कई क्षेत्रों में चुनौती बन जाती हैं। नेपाल में भारी बारिश के बाद पानी तेजी से नीचे की ओर आने पर बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में नदियों का जलस्तर बढ़ जाता है। इससे खेतों, सड़कों और आबादी वाले क्षेत्रों में जलभराव और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।

कोसी को क्यों कहा जाता है 'बिहार का शोक'?

नेपाल से बिहार में प्रवेश करने वाली कोसी नदी का बाढ़ के लिहाज से विशेष महत्व है। कोसी और गंडक जैसी बड़ी नदियों में जलस्तर बढ़ने पर बिहार के कई इलाकों में बाढ़ का खतरा पैदा हो जाता है।

कोसी नदी ने अतीत में कई बार बिहार में बड़े पैमाने पर बाढ़ और तबाही मचाई है। इसी वजह से इसे 'बिहार का शोक' कहा जाता है। वर्ष 2008 में कोसी की भीषण बाढ़ ने नेपाल और भारत में करीब 30 लाख लोगों को प्रभावित किया था और बड़े पैमाने पर जन-धन का नुकसान हुआ था।

नेपाल में भारी बारिश और बाढ़ की घटनाओं का असर इसलिए भारत तक पहुंच सकता है क्योंकि दोनों देशों की नदी प्रणालियां एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। यही कारण है कि मानसून के दौरान नेपाल से आने वाली नदियों के जलस्तर पर उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में विशेष नजर रखी जाती है।

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