गोरखपुर स्थित पूर्वोत्तर रेलवे कर्मचारी संघ में नेतृत्व को लेकर विवाद बढ़ गया है। अध्यक्ष और महामंत्री ने अलग-अलग कार्यकारिणी गठित कर पंजीकरण के लिए आवेदन किया है। अब उप श्रमायुक्त कार्यालय दोनों दावों की जांच कर रहा है।
गोरखपुर: पूर्वोत्तर रेलवे कर्मचारी संघ (पीआरकेएस) में नेतृत्व को लेकर चल रहा विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। संगठन के अध्यक्ष और महामंत्री ने अलग-अलग अधिवेशन आयोजित कर नई कार्यकारिणी गठित की है। दोनों पक्षों ने अपने-अपने दस्तावेज उप श्रमायुक्त कार्यालय में जमा किए हैं, जिसके बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
अध्यक्ष और महामंत्री के बीच बढ़ा नेतृत्व संघर्ष
पूर्वोत्तर रेलवे कर्मचारी संघ में पिछले लगभग दो वर्षों से आंतरिक खींचतान जारी है। संगठन के भीतर नेतृत्व को लेकर असहमति अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जहां अध्यक्ष और महामंत्री अलग-अलग गुटों का नेतृत्व कर रहे हैं। दोनों पक्षों ने स्वतंत्र रूप से अधिवेशन आयोजित कर नई कार्यकारिणी का गठन किया और खुद को संगठन का वैध प्रतिनिधि बताया है।
विवाद के चलते संगठन के पदाधिकारी और सदस्य भी दो हिस्सों में बंट गए हैं। दोनों गुट लगातार अपने-अपने निर्णयों को सही ठहराने और दूसरे पक्ष के फैसलों को अवैध बताने में लगे हुए हैं।
2024 की कार्रवाई के बाद शुरू हुआ विवाद
जानकारी के अनुसार विवाद की शुरुआत जून 2024 में हुई थी। उस समय संगठन के अध्यक्ष माधव प्रसाद शर्मा ने अनुशासनहीनता और संघ विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाते हुए तत्कालीन महामंत्री विनोद कुमार राय को पद से हटाने का निर्णय लिया था। इसके साथ ही संयुक्त महामंत्री एके सिंह को नई जिम्मेदारी सौंपने की घोषणा की गई।
इस फैसले का विरोध करते हुए विनोद कुमार राय ने भी संगठन के भीतर जवाबी कार्रवाई की। उन्होंने कार्यकारिणी स्तर पर बदलाव करते हुए अध्यक्ष पद पर नई नियुक्ति का दावा किया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच टकराव लगातार बढ़ता चला गया और संगठन में नेतृत्व संकट गहरा गया।
अलग-अलग कार्यकारिणी बनाकर कराया पंजीकरण
विवाद के बाद दोनों गुटों ने अलग-अलग अधिवेशन आयोजित किए। इन बैठकों में नई कार्यकारिणी का चुनाव कराने का दावा किया गया। इसके बाद दोनों पक्षों ने नई कार्यकारिणी की सूची और संबंधित दस्तावेज उप श्रमायुक्त कार्यालय गोरखपुर में जमा कर दिए।
अब श्रम विभाग यह जांच कर रहा है कि किस अधिवेशन की प्रक्रिया संगठन के संविधान और नियमों के अनुरूप हुई है। जांच के दौरान सदस्यता रिकॉर्ड, चुनाव प्रक्रिया और अन्य दस्तावेजों की भी समीक्षा की जाएगी।
संगठन की गतिविधियों पर पड़ सकता है असर
रेलवे कर्मचारी संगठनों की भूमिका कर्मचारियों के हितों और समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में संगठन के भीतर जारी विवाद का असर उसकी कार्यप्रणाली पर पड़ सकता है। कर्मचारियों के कई मुद्दे फिलहाल संगठनात्मक संघर्ष की वजह से प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
रेलवे कर्मचारियों का एक वर्ग चाहता है कि विवाद का जल्द समाधान निकले ताकि संगठन फिर से एकजुट होकर कर्मचारियों के हितों के लिए प्रभावी ढंग से काम कर सके।
जांच रिपोर्ट पर टिकी सबकी नजर
उप श्रमायुक्त कार्यालय ने दोनों पक्षों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि सभी तथ्यों और नियमों का परीक्षण करने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि संगठन की वैध कार्यकारिणी कौन सी है और भविष्य में पीआरकेएस का नेतृत्व किसके हाथ में रहेगा।
फिलहाल पूर्वोत्तर रेलवे कर्मचारी संघ का यह विवाद रेलवे कर्मचारियों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है और सभी की निगाहें जांच के अंतिम निष्कर्ष पर टिकी हुई हैं।











