NIA कोर्ट का बड़ा आदेश, सलाहुद्दीन के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी

एनआईए की स्पेशल कोर्ट ने हिजबुल मुजाहिदीन सरगना सैयद सलाहुद्दीन के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। पाकिस्तान में बैठे आतंकी के खिलाफ गिरफ्तारी

एनआईए की स्पेशल कोर्ट ने हिजबुल मुजाहिदीन सरगना सैयद सलाहुद्दीन के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। कोर्ट ने उसे गिरफ्तार करने के आदेश दिए हैं। यह कदम आतंकवाद के खिलाफ बड़ी कानूनी कार्रवाई माना जा रहा है।

Jammu-Kashmir: जम्मू कश्मीर के बडगाम जिले में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) की स्पेशल कोर्ट ने आतंकवाद के खिलाफ एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने पाकिस्तान में रह रहे हिजबुल मुजाहिदीन के सरगना मोहम्मद यूसुफ शाह उर्फ सैयद सलाहुद्दीन के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (Non-Bailable Warrant) जारी किया है। इसके साथ ही जम्मू कश्मीर पुलिस को आदेश दिया गया है कि वह उसे गिरफ्तार करे। यह फैसला लंबे समय से चल रहे आतंकी मामलों में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।

पाकिस्तान में बैठकर गतिविधियां चलाने का आरोप

सैयद सलाहुद्दीन पिछले कई दशकों से पाकिस्तान में रह रहा है। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक वह वहीं से कश्मीर घाटी में आतंकी गतिविधियों को संचालित कर रहा है। कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा है कि आरोपी गिरफ्तारी से बच रहा है और भारत की संप्रभुता (Sovereignty) के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है। इसी आधार पर उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करना जरूरी हो गया था।

आतंकी मामले में जारी हुआ गैर-जमानती वारंट

यह गैर-जमानती वारंट एक ऐसे आतंकी मामले से जुड़ा है, जो वर्ष 2012 में दर्ज किया गया था। इस केस में सलाहुद्दीन पर आतंकवादी साजिश, हिंसा भड़काने और आतंकी संगठनों को समर्थन देने के गंभीर आरोप हैं। कोर्ट ने कहा कि जांच के दौरान जुटाए गए सबूत प्रथम दृष्टया यह साबित करते हैं कि आरोपी का सीधा संबंध आतंकवादी गतिविधियों से है।

किन कानूनों के तहत हुई सुनवाई

यह सुनवाई NIA अधिनियम के तहत नामित विशेष न्यायाधीश की अदालत में हुई। कोर्ट ने गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) की धारा 13, 18, 20 और 39 के साथ रणबीर दंड संहिता (RPC) की धारा 506 के तहत दर्ज मामले पर विचार किया। रणबीर दंड संहिता वह कानून था, जो 2019 तक जम्मू कश्मीर में लागू था और भारतीय दंड संहिता (IPC) के समान माना जाता था।

कोर्ट का स्पष्ट रुख

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जांच अधिकारी ने पर्याप्त और ठोस सबूत पेश किए हैं। इन सबूतों से यह साफ होता है कि सैयद सलाहुद्दीन आतंकवादी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन का नेतृत्व कर रहा है और आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपी लंबे समय से कानून की पकड़ से बाहर है और जानबूझकर गिरफ्तारी से बच रहा है। इसी कारण उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया है।

पाकिस्तान भागने की पूरी कहानी

सैयद सलाहुद्दीन का असली नाम मोहम्मद यूसुफ शाह है। उसने वर्ष 1987 में जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव भी लड़ा था। हालांकि, 1990 के आसपास कश्मीर घाटी में उग्रवाद बढ़ने के बाद वह पाकिस्तान भाग गया। इसके बाद से उसने वहीं रहकर आतंकवादी गतिविधियों को संगठित करना शुरू किया। 1993 से वह लगातार पाकिस्तान में ही रह रहा है और भारत की जांच एजेंसियों की पहुंच से बाहर है।

2020 में घोषित हुआ आतंकवादी

भारत सरकार ने वर्ष 2020 में सैयद सलाहुद्दीन को आधिकारिक तौर पर आतंकवादी घोषित किया था। यह कदम उसकी लंबे समय से जारी आतंकी भूमिका को देखते हुए उठाया गया था। वह न केवल हिजबुल मुजाहिदीन का प्रमुख है, बल्कि कई आतंकी संगठनों के गठजोड़ यूनाइटेड जिहाद काउंसिल (UJC) का भी सरगना माना जाता है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, वह इस नेटवर्क के जरिए सीमा पार से आतंकी गतिविधियों को दिशा देता रहा है।

संपत्तियों पर भी हुई कार्रवाई

एनआईए ने वर्ष 2023 में सैयद सलाहुद्दीन और उसके दो बेटों से जुड़ी संपत्तियों को कुर्क कर लिया था। यह कार्रवाई आतंकी वित्तपोषण (Terror Funding) के एक मामले में की गई थी। जांच में सामने आया था कि आतंकी गतिविधियों के लिए धन जुटाने और उसे आगे पहुंचाने में परिवार के सदस्यों की भूमिका रही है।

बेटों पर भी गिरी गाज

आतंकी वित्तपोषण मामले में गिरफ्तारी के बाद सैयद सलाहुद्दीन के दोनों बेटों को वर्ष 2021 में सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। यह फैसला इस आधार पर लिया गया कि वे एक घोषित आतंकवादी से जुड़े हुए थे और उनके खिलाफ गंभीर आरोप थे। इस कार्रवाई को सरकार की सख्त आतंकवाद विरोधी नीति के तौर पर देखा गया।

सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ा संदेश

कोर्ट का यह आदेश सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक मजबूत कानूनी आधार प्रदान करता है। गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की संभावनाएं बढ़ गई हैं। यह फैसला यह संदेश देता है कि आतंकवाद से जुड़े मामलों में चाहे आरोपी देश में हो या विदेश में, कानून अपना रास्ता तय करेगा।

कश्मीर में आतंकवाद पर सख्ती

हाल के वर्षों में जम्मू कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई तेज की गई है। आतंकी संगठनों के नेटवर्क, उनके फंडिंग चैनल और समर्थकों पर लगातार शिकंजा कसा जा रहा है। सैयद सलाहुद्दीन के खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

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