NOC बिना टेंडर जारी, रायपुर में 22 करोड़ की पानी टंकी परियोजना पर विवाद

छत्तीसगढ़ के रायपुर नगर निगम और महिला एवं बाल विकास विभाग के बीच जमीन विवाद से 22 करोड़ की पानी टंकी परियोजना अटकी, जिसके कारण वार्ड-31 में पानी संकट बढ़ा।

छत्तीसगढ़ के रायपुर नगर निगम और महिला एवं बाल विकास विभाग के बीच जमीन विवाद से वार्ड-31 में 22 करोड़ की पानी टंकी का काम अटक गया है। NOC विवाद के कारण लोगों को पानी संकट से राहत मिलने में देरी होगी।

रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक महत्वपूर्ण पेयजल परियोजना जमीन विवाद के कारण अटक गई है। रायपुर नगर निगम द्वारा प्रस्तावित 22 करोड़ रुपये की पानी टंकी का निर्माण कार्य फिलहाल ठप पड़ गया है। विवाद की जड़ उस जमीन को लेकर है, जिस पर टंकी बनाई जानी थी। महिला एवं बाल विकास विभाग ने उस भूमि पर अपना स्वामित्व जताते हुए निर्माण पर आपत्ति दर्ज कर दी है।

यह परियोजना नेताजी सुभाष चंद्र बोस वार्ड-31 के निवासियों के लिए बेहद अहम मानी जा रही थी, जहां लंबे समय से पानी की किल्लत बनी हुई है। लेकिन प्रशासनिक लापरवाही और समन्वय की कमी के चलते यह योजना शुरू होने से पहले ही विवादों में घिर गई।

भूमि पूजन से पहले ही बढ़ा विवाद

जानकारी के अनुसार, नगर निगम ने इस परियोजना के लिए टेंडर जारी कर दिया था और भूमि पूजन की तैयारियां भी शुरू कर दी गई थीं। मौके पर साफ-सफाई का कार्य भी पूरा हो चुका था। लेकिन इसी दौरान महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी स्थल पर पहुंचे और जमीन पर अपना दावा पेश किया।

विभाग का कहना है कि जिस भूमि पर पानी टंकी प्रस्तावित है, वह उनके अधिकार क्षेत्र में आती है और बिना उनकी अनुमति (NOC) के किसी भी प्रकार का निर्माण अवैध होगा। इस दावे के बाद परियोजना पर तत्काल प्रभाव से रोक लग गई।

NOC के बिना टेंडर पर उठे सवाल

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि नगर निगम ने बिना अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लिए टेंडर कैसे जारी कर दिया। प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुसार, किसी भी सरकारी भूमि पर निर्माण कार्य शुरू करने से पहले संबंधित विभाग की अनुमति लेना अनिवार्य होता है।

नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने इस मुद्दे पर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा,
“क्या इतनी बड़ी परियोजना के लिए टेंडर जारी करने से पहले भूमि की स्थिति की जांच नहीं की गई? क्या संबंधित विभाग से अनुमति लेना जरूरी नहीं था?”

उनके इस बयान के बाद मामला और राजनीतिक रंग लेता नजर आ रहा है।

महापौर का आश्वासन: जल्द होगा समाधान

वहीं, मीनल चौबे, जो रायपुर की महापौर हैं, ने इस विवाद को जल्द सुलझाने का भरोसा दिलाया है। उन्होंने कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ बातचीत जारी है और जल्द ही आवश्यक NOC प्राप्त कर ली जाएगी।

महापौर के अनुसार, यह परियोजना शहर के एक बड़े हिस्से को पेयजल संकट से राहत दिलाने के उद्देश्य से शुरू की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन इस मुद्दे को प्राथमिकता पर हल करने की दिशा में काम कर रहा है।

पानी संकट से जूझ रहे वार्डवासियों की बढ़ी परेशानी

वार्ड-31 के निवासी लंबे समय से पानी की समस्या का सामना कर रहे हैं। गर्मी के मौसम में यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है। नई पानी टंकी के निर्माण से इस इलाके में जल आपूर्ति बेहतर होने की उम्मीद थी, लेकिन विवाद के कारण अब यह राहत और दूर होती नजर आ रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासनिक खींचतान का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। कई परिवारों को रोजाना पानी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है या वैकल्पिक स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है।

प्रशासनिक समन्वय की कमी उजागर

यह मामला सरकारी विभागों के बीच समन्वय की कमी को भी उजागर करता है। एक ओर नगर निगम ने बिना आवश्यक अनुमति के टेंडर जारी कर दिया, वहीं दूसरी ओर महिला एवं बाल विकास विभाग ने अंतिम समय में आपत्ति जताई।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रारंभिक स्तर पर ही भूमि स्वामित्व और अनुमतियों की जांच कर ली जाती, तो इस तरह की स्थिति से बचा जा सकता था। इससे न केवल समय की बचत होती, बल्कि सार्वजनिक धन और संसाधनों का बेहतर उपयोग भी सुनिश्चित होता।

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