NOCIL के शेयरों में 20% की जोरदार छलांग, एंटी-डंपिंग ड्यूटी के फैसले से निवेशकों में उत्साह

एंटी-डंपिंग ड्यूटी के फैसले के बाद NOCIL के शेयरों में 20% की जोरदार तेजी देखने को मिली। निवेशकों में उत्साह बढ़ा और बाजार में कंपनी चर्चा का केंद्र बनी।

सोमवार के कारोबारी सत्र में NOCIL Limited के शेयरों में जोरदार तेजी देखने को मिली। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर कंपनी का शेयर लगभग 20% उछलकर ₹190.82 तक पहुंच गया, जिससे निवेशकों के बीच उत्साह का माहौल बन गया।

बिजनेस न्यूज़: भारत की प्रमुख रबर केमिकल निर्माता कंपनी NOCIL Limited के शेयरों में सोमवार को उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई। कंपनी का शेयर राष्ट्रीय शेयर बाजार (NSE) पर लगभग 20% उछलकर ₹190.82 तक पहुंच गया। इससे पहले शुक्रवार को शेयर ₹159.02 पर बंद हुआ था। सोमवार को यह ₹165.09 के स्तर पर खुला और पूरे कारोबारी सत्र के दौरान मजबूत खरीदारी देखने को मिली।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस तेज उछाल के पीछे भारत सरकार का हालिया एंटी-डंपिंग ड्यूटी (ADD) संबंधी निर्णय प्रमुख कारण रहा है, जिसने घरेलू रबर केमिकल निर्माताओं के लिए सकारात्मक माहौल तैयार किया है।

एंटी-डंपिंग ड्यूटी क्या है और इसका NOCIL को कैसे मिलेगा लाभ?

भारत के व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए Directorate General of Trade Remedies (DGTR) ने चीन, अमेरिका और यूरोपीय संघ से आयात किए जाने वाले ‘सल्फेनामाइड एक्सेलेरेटर’ पर अगले पांच वर्षों के लिए एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने की सिफारिश की है। सल्फेनामाइड एक्सेलेरेटर रबर उद्योग में उपयोग होने वाला एक महत्वपूर्ण रसायन है, जो टायर और अन्य रबर उत्पादों के निर्माण में अहम भूमिका निभाता है। NOCIL इस उत्पाद का निर्माण अपने प्रसिद्ध ‘Pilcure’ ब्रांड के तहत करती है।

विश्लेषकों के अनुसार, सस्ते विदेशी आयात पर नियंत्रण लगने से घरेलू उत्पादकों को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलेगा। इससे NOCIL को अपनी मूल्य निर्धारण क्षमता मजबूत करने, बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने और लाभप्रदता में सुधार करने का अवसर मिल सकता है।

भारतीय रबर केमिकल बाजार में मजबूत स्थिति

NOCIL के शेयरों में 20% की जोरदार छलांग, एंटी-डंपिंग ड्यूटी के फैसले से निवेशकों में उत्साह

NOCIL भारत की सबसे बड़ी रबर केमिकल कंपनियों में से एक है और घरेलू बाजार में इसकी हिस्सेदारी लगभग 40% बताई जाती है। कंपनी का बाजार पूंजीकरण लगभग ₹3,185 करोड़ है, जो इसे इस क्षेत्र के प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल करता है। कंपनी की मजबूत उपस्थिति का लाभ उसे उद्योग में मांग बढ़ने और आयात प्रतिस्पर्धा कम होने की स्थिति में मिल सकता है। यही वजह है कि निवेशकों ने सरकारी निर्णय को NOCIL के लिए दीर्घकालिक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा।

मार्च तिमाही के आंकड़ों के अनुसार, कंपनी में प्रमोटरों की हिस्सेदारी 33.76% रही। इसके अलावा घरेलू म्यूचुअल फंड्स के पास 7.1%, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के पास 4.5% और लगभग 1.6 लाख खुदरा निवेशकों के पास 26.2% हिस्सेदारी थी। यह विविध निवेशक आधार दर्शाता है कि कंपनी में संस्थागत और खुदरा दोनों प्रकार के निवेशकों की रुचि बनी हुई है।

हालिया प्रदर्शन ने आकर्षित किया निवेशकों का ध्यान

NOCIL के शेयर ने वर्ष 2025 में अब तक 25% से अधिक का रिटर्न दिया है। वहीं पिछले एक महीने में इसमें लगभग 13% की बढ़त दर्ज की गई है। हालिया सरकारी फैसले के बाद शेयर में आई तेज उछाल ने इसे एक बार फिर निवेशकों के रडार पर ला दिया है। हालांकि, लंबी अवधि के प्रदर्शन पर नजर डालें तो तस्वीर मिश्रित दिखाई देती है। पिछले तीन और पांच वर्षों में शेयर ने क्रमशः लगभग 14% और 11% का नकारात्मक रिटर्न दिया है। इससे स्पष्ट होता है कि कंपनी अभी भी अपने विकास चक्र के पुनरुद्धार चरण में है।

वित्त वर्ष 2024 के दौरान वैश्विक बाजारों में कमजोर मांग और निर्यात क्षेत्र में सुस्ती के कारण कंपनी के उत्पादन संयंत्र लगभग 65% क्षमता पर ही संचालित हो सके। इसका असर कंपनी की आय पर पड़ा और राजस्व में लगभग 11% की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, वित्त वर्ष 2025 की दूसरी तिमाही में कंपनी ने सुधार के संकेत दिए। बढ़ती बिक्री मात्रा और निर्यात बाजारों में बेहतर प्रदर्शन के कारण राजस्व में साल-दर-साल लगभग 3% की वृद्धि दर्ज की गई। यह संकेत देता है कि कंपनी धीरे-धीरे मांग में सुधार का लाभ उठाने लगी है।

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