नोएडा में शुरू हुई ई-बस सेवा को यात्रियों का अपेक्षित समर्थन नहीं मिल रहा है। पर्याप्त प्रचार, स्पष्ट टाइमिंग और रूट जानकारी के अभाव में कई बसें लगभग खाली चल रही हैं, जिससे यात्रियों और परिचालकों दोनों को परेशानी हो रही है।
नोएडा: जिले में हाल ही में शुरू हुई ई-बस सेवा शुरुआती दिनों में यात्रियों को आकर्षित करने में सफल नहीं हो पा रही है। लोगों को बसों के रूट, समय और संचालन की पर्याप्त जानकारी नहीं मिलने के कारण सवारियों की संख्या बेहद कम बनी हुई है। स्थिति यह है कि कई बसों में पूरे दिन में गिने-चुने यात्री ही सफर कर रहे हैं।
जानकारी के अभाव में खाली चल रहीं बसें
नोएडा में इलेक्ट्रिक बस सेवा शुरू होने के बाद परिवहन विभाग ने इसके रूट और समय सारिणी तय कर दी थी, लेकिन आम लोगों तक इसकी जानकारी प्रभावी तरीके से नहीं पहुंच पाई। इसका सीधा असर बसों में यात्रियों की संख्या पर दिखाई दे रहा है।
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बस चालकों और परिचालकों के अनुसार कई रूटों पर लंबे इंतजार के बाद भी यात्रियों की संख्या बेहद कम है। कुछ बसों में पूरे दिन में मुश्किल से 10 यात्री ही सफर कर रहे हैं। लोगों को अभी भी ई-बस सेवा की उपलब्धता और रूट की जानकारी नहीं है, इसलिए वे पुराने परिवहन विकल्पों का ही उपयोग कर रहे हैं।
चालक भी रूट को लेकर कर रहे हैं संघर्ष
ई-बस संचालन से जुड़े कुछ चालकों ने बताया कि वे हाल ही में दूसरे शहरों से यहां तैनात किए गए हैं और उन्हें स्थानीय मार्गों की पूरी जानकारी नहीं है। ऐसे में उन्हें गूगल मैप और स्थानीय लोगों की सहायता लेकर बस चलानी पड़ रही है।
परिचालकों का कहना है कि कई बार बस निर्धारित स्टॉप पर पहुंचती है, लेकिन वहां मौजूद लोग भी यह नहीं जानते कि बस किस रूट पर जा रही है। इससे यात्रियों का भरोसा बनने में समय लग रहा है।
ऑटो और अन्य साधनों को मिल रही प्राथमिकता
यात्रियों की कम संख्या का एक बड़ा कारण यह भी है कि लोग अभी भी ऑटो और साझा परिवहन साधनों को अधिक सुविधाजनक मान रहे हैं। सिटी सेंटर, सेक्टर-52, चार मूर्ति और अन्य प्रमुख स्थानों के लिए बड़ी संख्या में लोग ऑटो का इस्तेमाल कर रहे हैं।
स्थानीय यात्रियों का कहना है कि ई-बसों की टाइमिंग स्पष्ट नहीं होने से उन्हें इंतजार करना पड़ सकता है, जबकि ऑटो आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं। इसी वजह से लोग अभी नई सेवा अपनाने में संकोच कर रहे हैं।
टाइमिंग और डैशबोर्ड की समस्या होगी दूर
यात्रियों ने भी माना है कि ई-बस सेवा उपयोगी है, लेकिन इसकी समय सारिणी और फ्रीक्वेंसी की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। कई बस स्टॉप पर बसों के आने-जाने का समय प्रदर्शित नहीं होने से लोगों को असुविधा हो रही है।
इन समस्याओं को देखते हुए नोएडा प्राधिकरण ने यूपीएसआरटीसी को 10 दिनों के भीतर एक ऑनलाइन डैशबोर्ड तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इस डैशबोर्ड के माध्यम से यात्रियों को बसों की लाइव लोकेशन, रूट, स्टॉपेज और समय की जानकारी मिल सकेगी।
अधिकारियों का मानना है कि जैसे-जैसे सेवा का प्रचार-प्रसार बढ़ेगा और डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध होंगी, ई-बसों में यात्रियों की संख्या भी बढ़ने लगेगी। फिलहाल शुरुआती दौर में जागरूकता की कमी इस परियोजना की सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है।









