नोएडा में ज्वैलर्स से 65 लाख की ठगी, निवेश का झांसा देकर फंसाया; रकम मिलते ही आरोपी फरार

नोएडा में ज्वैलर्स को निवेश में अच्छा मुनाफा दिलाने का झांसा देकर 65 लाख रुपये ठगने का आरोप है। रकम लेने के बाद आरोपी फरार हो गया।
नोएडा में ज्वैलर्स से 65 लाख की ठगी, निवेश का झांसा देकर फंसाया; रकम मिलते ही आरोपी फरार
Photo Credit / Attribution: Google

नोएडा में ज्वैलर्स से करीब 65 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक व्यक्ति ने निवेश के नाम पर ज्वैलर्स को अपने जाल में फंसाया और रकम लेने के बाद फरार हो गया। पीड़ितों का आरोप है कि आरोपी ने निवेश की रकम पर अच्छा रिटर्न देने का भरोसा दिलाया था। शुरुआत में उसकी बातों और भरोसे में आकर ज्वैलर्स ने बड़ी रकम दे दी, लेकिन पैसे हासिल करने के बाद आरोपी ने संपर्क करना बंद कर दिया।

बताया जा रहा है कि आरोपी ने ज्वैलर्स को निवेश के लिए तैयार करने के दौरान कई तरह के भरोसे दिलाए थे। उसने रकम को सुरक्षित तरीके से निवेश करने और निर्धारित समय के बाद मुनाफे के साथ पैसा लौटाने की बात कही थी। इसी भरोसे के चलते पीड़ितों ने करीब 65 लाख रुपये आरोपी को दे दिए। रकम मिलने के बाद जब ज्वैलर्स ने अपने पैसे और कथित मुनाफे के बारे में जानकारी मांगनी शुरू की तो आरोपी टालमटोल करने लगा।

धीरे-धीरे आरोपी का व्यवहार बदलने लगा और वह पीड़ितों से दूरी बनाने लगा। जब ज्वैलर्स को संदेह हुआ तो उन्होंने उससे लगातार संपर्क करने की कोशिश की। आरोप है कि कुछ समय बाद आरोपी अपना ठिकाना छोड़कर फरार हो गया। इसके बाद पीड़ितों को कथित निवेश योजना के नाम पर ठगी का अहसास हुआ और उन्होंने पुलिस से शिकायत की।

इस घटना के सामने आने के बाद इलाके के कारोबारी भी सतर्क हो गए हैं। ज्वैलरी कारोबार में बड़ी रकम का लेनदेन सामान्य बात है, ऐसे में निवेश या व्यापार में पैसा लगाने से पहले संबंधित व्यक्ति और योजना की पूरी जानकारी हासिल करना जरूरी माना जाता है। इस मामले में भी पुलिस शिकायत के आधार पर आरोपी तक पहुंचने और रकम की बरामदगी के प्रयास कर रही है।

पीड़ित ज्वैलर्स के मुताबिक आरोपी ने उन्हें ऐसा विश्वास दिलाया था कि उनकी रकम एक निवेश में लगाई जाएगी और उससे उन्हें अच्छा लाभ मिलेगा। लगातार संपर्क और बातचीत के कारण पीड़ितों को उस पर भरोसा हो गया। इसके बाद अलग-अलग समय पर रकम दिए जाने की बात सामने आई है। जब निवेश की अवधि पूरी होने के बाद पैसे वापस नहीं मिले तो पीड़ितों ने आरोपी से जवाब मांगा।

आरोप है कि आरोपी ने पहले कुछ समय तक अलग-अलग बहाने बनाकर पैसे लौटाने में देरी की। पीड़ितों को उम्मीद थी कि जल्द ही उनका पैसा वापस मिल जाएगा, लेकिन बाद में आरोपी का फोन बंद या संपर्क से बाहर हो गया। उसके संभावित ठिकानों पर तलाश की गई, लेकिन उसका पता नहीं चला। इसके बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस से शिकायत की गई।

पुलिस अब शिकायत में बताए गए लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है। 65 लाख रुपये की रकम किस माध्यम से दी गई, किन तारीखों में लेनदेन हुआ और आरोपी ने पैसे लेने के बाद उसका इस्तेमाल कहां किया, इन सभी पहलुओं की पड़ताल की जा सकती है। पुलिस आरोपी के मोबाइल नंबर, बैंकिंग लेनदेन और उसके संपर्क में रहे लोगों की जानकारी भी जुटा सकती है।

ऐसे मामलों में जांच के दौरान बैंक खातों की जानकारी महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि रकम बैंक ट्रांसफर के जरिए दी गई है तो संबंधित खातों के रिकॉर्ड से लेनदेन की पुष्टि की जा सकती है। वहीं अगर किसी हिस्से की रकम नकद दी गई है तो उसके संबंध में पीड़ितों के बयान और उपलब्ध अन्य साक्ष्यों की जांच की जाएगी। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर सकती है कि आरोपी ने इसी तरीके से किसी अन्य कारोबारी या व्यक्ति को तो निशाना नहीं बनाया।

मामले में आरोपी के फरार होने के बाद पुलिस की चुनौती उसे तलाशने की भी है। यदि आरोपी ने अपना मोबाइल नंबर बंद कर लिया है या ठिकाना बदल लिया है तो पुलिस उसके पुराने संपर्कों और संभावित स्थानों के बारे में जानकारी जुटा सकती है। डिजिटल लेनदेन या मोबाइल गतिविधियों से भी जांच को दिशा मिल सकती है।

पीड़ित पक्ष का कहना है कि उन्हें निवेश के नाम पर विश्वास में लेकर इतनी बड़ी रकम ली गई। उनका आरोप है कि आरोपी का उद्देश्य रकम हासिल करना था और पैसे मिलते ही उसने संपर्क खत्म कर लिया। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल पुलिस शिकायत में लगाए गए आरोपों के आधार पर मामले की जांच कर रही है।

नोएडा और एनसीआर में निवेश के नाम पर ठगी के कई तरीके सामने आते रहे हैं। ठगी करने वाले लोग कई बार कारोबारियों को ज्यादा मुनाफे का लालच देकर बड़ी रकम निवेश कराने के लिए तैयार करते हैं। शुरुआत में विश्वास कायम करने के लिए वे लगातार संपर्क में रहते हैं और निवेश से जुड़े दस्तावेज या योजनाओं की जानकारी भी साझा कर सकते हैं। लेकिन रकम मिलने के बाद संपर्क खत्म करना ऐसे मामलों में शिकायत का प्रमुख आधार बनता है।

इस मामले में भी ज्वैलर्स के साथ कथित तौर पर इसी तरह की रणनीति अपनाए जाने का आरोप है। आरोपी ने पहले भरोसा कायम किया, निवेश का प्रस्ताव दिया और फिर रकम हासिल कर ली। इसके बाद उसके फरार होने से पीड़ितों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा। करीब 65 लाख रुपये की रकम होने के कारण मामले को गंभीर माना जा रहा है।

पुलिस की जांच में यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि आरोपी और पीड़ितों के बीच पहले से कोई कारोबारी संबंध था या उनकी मुलाकात केवल निवेश के प्रस्ताव के सिलसिले में हुई थी। यदि आरोपी ने किसी कंपनी, फर्म या निवेश योजना के नाम का इस्तेमाल किया था तो उसके दस्तावेजों की भी जांच की जा सकती है। इसके अलावा यह भी देखा जा सकता है कि रकम किसी अन्य व्यक्ति या संस्था के खाते में तो ट्रांसफर नहीं की गई।

ज्वैलर्स के लिए यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कारोबार में रोजाना बड़ी रकम का लेनदेन होता है और भरोसे के आधार पर होने वाला निजी निवेश कई बार जोखिम पैदा कर सकता है। किसी भी निवेश से पहले दस्तावेजों की जांच, कंपनी या व्यक्ति की पृष्ठभूमि की पुष्टि और लेनदेन का स्पष्ट रिकॉर्ड रखना जरूरी है। खासकर बड़ी रकम निवेश करने से पहले कानूनी और वित्तीय सलाह लेना जोखिम को कम कर सकता है।

फिलहाल इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि 65 लाख रुपये की रकम आखिर कहां गई और आरोपी कहां फरार हुआ। पुलिस लेनदेन के रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित ठगी की पूरी योजना क्या थी और रकम को किस तरीके से इस्तेमाल किया गया।

पुलिस द्वारा मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है। जांच के दौरान यदि अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनसे भी पूछताछ की जा सकती है। वहीं यदि आरोपी के खिलाफ पहले से इसी तरह की शिकायतें या मामले दर्ज होने की जानकारी मिलती है तो जांच का दायरा और बढ़ सकता है।

फिलहाल पीड़ित ज्वैलर्स को अपने करीब 65 लाख रुपये वापस मिलने का इंतजार है। निवेश के नाम पर रकम लेकर फरार होने के आरोप के बाद पुलिस आरोपी की तलाश और कथित ठगी की रकम से जुड़े लेनदेन की जांच में जुटी है। मामले में आगे सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर ही यह तय होगा कि पूरी घटना किस तरह अंजाम दी गई और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।

Leave a comment