नोएडा में सड़क हादसों पर अंकुश लगाने के लिए परिवहन विभाग और यातायात पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाया। छह दिनों की कार्रवाई में 76 बसों को सीज किया गया, जिनमें फिटनेस, परमिट और सुरक्षा मानकों से जुड़ी गंभीर अनियमितताएं पाई गईं।
नोएडा: सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नोएडा में परिवहन विभाग और यातायात पुलिस ने बड़े स्तर पर जांच अभियान चलाया है। इस दौरान छह दिनों में 76 बसों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें सीज किया गया। जांच में कई बसें बिना आवश्यक दस्तावेजों और सुरक्षा मानकों के संचालन करती मिलीं।
सड़क हादसों को रोकने के लिए सख्त अभियान
नोएडा में लगातार सामने आ रहे सड़क हादसों के बाद प्रशासन ने सार्वजनिक परिवहन वाहनों की जांच तेज कर दी है। परिवहन विभाग और यातायात पुलिस की संयुक्त टीम ने प्रमुख मार्गों और चेकिंग प्वाइंट्स पर विशेष अभियान चलाकर बसों की जांच की।
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अभियान के दौरान यमुना एक्सप्रेसवे, नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे, चिल्ला बॉर्डर और छलेरा समेत कई प्रमुख स्थानों पर वाहनों की सघन जांच की गई। इस कार्रवाई में कुल 76 बसों को विभिन्न अनियमितताओं के चलते सीज किया गया।
फिटनेस और परमिट में मिली गंभीर खामियां
जांच के दौरान कई बसों के पास वैध फिटनेस प्रमाणपत्र नहीं मिला। कुछ बसें बिना आवश्यक परमिट के संचालित हो रही थीं, जबकि कई वाहनों के दस्तावेज अधूरे पाए गए।
अधिकारियों के अनुसार कुछ बस संचालक निर्धारित नियमों का पालन किए बिना यात्रियों को ढो रहे थे, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ रही थी। बाहरी जिलों से आने वाली कई बसें भी कार्रवाई की जद में आईं।
यात्रियों की सुरक्षा से हो रहा था समझौता
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि कई बसों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही थी। कुछ वाहनों को नियमों के विपरीत मॉडिफाई कर स्लीपर बस का रूप दे दिया गया था, जबकि उनकी संरचना इसके लिए उपयुक्त नहीं थी।
इसके अलावा क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाने और फिटनेस मानकों की अनदेखी करने जैसे मामले भी सामने आए। ऐसी स्थिति में यात्रियों की जान जोखिम में पड़ रही थी।
हालिया हादसों के बाद बढ़ी सख्ती
हाल के महीनों में नोएडा और आसपास के क्षेत्रों में कई बस दुर्घटनाएं सामने आई हैं। महामाया फ्लाईओवर के पास हुई एक दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। वहीं ओवरलोडिंग और तकनीकी खामियों के कारण बस पलटने तथा आग लगने जैसी घटनाएं भी दर्ज की गईं।
इन घटनाओं की जांच में कई मामलों में अनियमित रूप से संचालित बसों की भूमिका सामने आने के बाद प्रशासन ने व्यापक स्तर पर जांच अभियान शुरू किया।
आगे भी जारी रहेगी कार्रवाई
परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान केवल अस्थायी नहीं है, बल्कि आगे भी लगातार जारी रहेगा। अधिकारियों का कहना है कि सड़क सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
एआरटीओ प्रवर्तन डॉ. उदित नारायण पांडेय के अनुसार यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसलिए बिना वैध दस्तावेज, फिटनेस प्रमाणपत्र या निर्धारित मानकों के संचालन करने वाले वाहनों पर लगातार निगरानी रखी जाएगी और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।











