RE-NEET में लखीसराय में सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़: 40 लाख में होती थी डील, 5 मेडिकल छात्र समेत 24 गिरफ्तार

लखीसराय में RE-NEET परीक्षा में सॉल्वर गैंग का खुलासा हुआ है। 40 लाख रुपये में डील होती थी। 5 मेडिकल छात्र समेत 24 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
RE-NEET में लखीसराय में सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़: 40 लाख में होती थी डील, 5 मेडिकल छात्र समेत 24 गिरफ्तार
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बिहार के लखीसराय में आयोजित RE-NEET परीक्षा में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। पुलिस ने एक ऐसे सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़ किया है, जो असली अभ्यर्थियों की जगह डमी कैंडिडेट बैठाकर परीक्षा दिलवा रहा था। इस मामले में अब तक 5 मेडिकल छात्रों समेत 24 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों में एक छात्र पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) का भी बताया जा रहा है।

पुलिस जांच में सामने आया है कि गैंग अभ्यर्थियों से 30 से 40 लाख रुपये तक की रकम लेकर उनकी जगह सॉल्वर को परीक्षा में बैठाता था। इस रैकेट का नेटवर्क कई मेडिकल कॉलेजों तक फैला हुआ था। गिरफ्तार आरोपियों में मेडिकल छात्रों के अलावा परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक सत्यापन करने वाली निजी कंपनी के कर्मचारी भी शामिल हैं।

मामले का खुलासा तब हुआ, जब पुलिस ने हसनपुर स्थित एक परीक्षा केंद्र पर संदिग्ध गतिविधि के आधार पर कार्रवाई की। यहां एक छात्र बायोमेट्रिक कंपनी के कर्मचारी के रूप में मौजूद मिला। पूछताछ में उसकी पहचान PMCH के छात्र मयंक कश्यप के रूप में हुई। उससे पूछताछ के बाद पुलिस को पूरे नेटवर्क की जानकारी मिली और अलग-अलग केंद्रों पर छापेमारी कर कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार लोगों में दो इंटर्न डॉक्टर, पांच MBBS छात्र और कई अन्य सहयोगी शामिल हैं। इनमें कुछ छात्र विभिन्न मेडिकल संस्थानों से जुड़े बताए जा रहे हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इन लोगों का संबंध पिछले वर्ष सामने आए NEET पेपर लीक या अन्य परीक्षा घोटालों से भी रहा है।

जांच में यह भी सामने आया है कि परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा और बायोमेट्रिक जांच की जिम्मेदारी संभाल रही कंपनी के 14 कर्मचारी भी इस रैकेट में शामिल हो सकते हैं। आरोप है कि उनकी मदद से डमी कैंडिडेट्स को परीक्षा केंद्रों में प्रवेश दिलाया गया।

पुलिस ने लखीसराय के तीन परीक्षा केंद्रों—हसनपुर हाई स्कूल, केआरके हाई स्कूल और केंद्रीय विद्यालय—में कार्रवाई की। यहां से कई फर्जी परीक्षार्थियों को पकड़ा गया, जो असली अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा दे रहे थे।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह एक संगठित गिरोह है और इसके तार बिहार के बाहर भी जुड़े हो सकते हैं। आरोपियों के मोबाइल फोन, दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। साथ ही यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि इस नेटवर्क के जरिए अब तक कितने अभ्यर्थियों को फायदा पहुंचाया गया।

फिलहाल सभी गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है। पुलिस का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। यह मामला एक बार फिर देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।

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