नोएडा में बंद मकानों की रेकी करने के बाद चोरी की वारदात को अंजाम देने वाले एक शातिर आरोपित को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। सेक्टर-20 थाना पुलिस ने बुधवार को सेक्टर-21 इलाके से 24 वर्षीय फहीम को पकड़ा। पुलिस के अनुसार फहीम दिल्ली और एनसीआर में लंबे समय से चोरी की घटनाओं में सक्रिय था और पूछताछ के दौरान उसने 50 से अधिक चोरी की वारदातों में शामिल होने की बात बताई है। पुलिस ने उसके कब्जे से चोरी में इस्तेमाल किए जाने वाले औजार और सात हजार रुपये की नकदी बरामद की है।
पुलिस जांच में आरोपित का आपराधिक इतिहास भी सामने आया है। फहीम मूल रूप से दिल्ली के सीमापुरी का रहने वाला बताया गया है और वर्तमान में गाजियाबाद के लोनी इलाके में रह रहा था। पुलिस के मुताबिक दिल्ली के अलग-अलग थानों में उसके खिलाफ 18 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसके अलावा नोएडा के सेक्टर-20 थाने में भी उसके खिलाफ मामला दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब उसके पुराने मामलों और नोएडा में की गई कथित चोरी की घटनाओं को आपस में जोड़कर जांच कर रही है।
पुलिस के अनुसार फहीम चोरी करने से पहले मकानों की रेकी करता था। वह यह देखता था कि किस घर में लोग मौजूद हैं और कौन सा मकान बंद है। इसके बाद मौका मिलने पर ताला तोड़कर घर के अंदर प्रवेश करता और नकदी, गहने तथा अन्य कीमती सामान लेकर फरार हो जाता था। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि अलग-अलग वारदातों में उसके साथ कौन-कौन लोग शामिल रहे और चोरी का सामान आखिर किन लोगों तक पहुंचाया गया।
जांच का एक अहम पहलू चोरी का सामान खरीदने वाले लोगों तक पहुंचना है। पुलिस को आशंका है कि लगातार चोरी की घटनाओं को अंजाम देने के बाद आरोपित चोरी के गहने, नकदी या अन्य सामान को किसी ऐसे व्यक्ति या नेटवर्क को बेचता था, जो उसके स्रोत के बारे में जानते हुए सामान खरीदता था। पुलिस अब ऐसे संभावित खरीदारों की पहचान करने में जुटी है। खरीदारों की भूमिका सामने आने के बाद चोरी के सामान की बरामदगी के साथ-साथ पूरे नेटवर्क की जानकारी भी मिल सकती है।
फहीम की गिरफ्तारी के बाद पुलिस उसके मोबाइल फोन और संपर्क में रहने वाले लोगों के बारे में भी जानकारी जुटा रही है। जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि चोरी के बाद वह सामान बेचने के लिए किन लोगों से संपर्क करता था। इसके अलावा उसके बैंक खातों और रुपये के लेनदेन की जांच भी की जा सकती है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि चोरी से मिली रकम का इस्तेमाल किस तरह किया जाता था।
पुलिस के मुताबिक आरोपित लंबे समय से अपराध में सक्रिय था। दिल्ली में उसके खिलाफ दर्ज 18 मामलों की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने उसके पुराने रिकॉर्ड को खंगालना शुरू किया है। इन मामलों में किस तरह की घटनाएं दर्ज हैं और उनमें उसकी भूमिका क्या रही, इसकी भी जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि दिल्ली के अलावा एनसीआर के दूसरे शहरों में उसके खिलाफ कोई मामला दर्ज है या नहीं।
नोएडा में चोरी की घटनाओं की जांच के दौरान पुलिस के लिए यह पता लगाना महत्वपूर्ण है कि आरोपित अकेले वारदात करता था या उसके साथ अन्य लोग भी रहते थे। यदि 50 से अधिक घटनाओं में उसकी भूमिका की पुष्टि होती है तो पुलिस के सामने इन सभी मामलों को अलग-अलग जांचने की चुनौती होगी। प्रत्येक घटना में चोरी किए गए सामान, घटनास्थल, सीसीटीवी फुटेज और शिकायतों से जुड़े रिकॉर्ड का मिलान किया जा सकता है।
पुलिस को बरामद सात हजार रुपये की नकदी और चोरी में इस्तेमाल होने वाले औजारों को भी जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन सामानों को उन घटनाओं से जोड़ने का प्रयास किया जा सकता है, जिनमें मकानों के ताले तोड़कर चोरी की गई थी। पुलिस का कहना है कि पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
रेकी करके बंद मकानों को निशाना बनाना चोरी के मामलों में जांच का महत्वपूर्ण बिंदु होता है। ऐसे मामलों में पुलिस आमतौर पर यह पता लगाने की कोशिश करती है कि आरोपित को मकान के खाली होने की जानकारी कैसे मिलती थी। फहीम के मामले में भी पुलिस उसके आने-जाने के स्थानों, संपर्कों और उन इलाकों की जानकारी जुटा रही है जहां वह कथित तौर पर चोरी की घटनाओं को अंजाम देता था।
गाजियाबाद के लोनी में रहने की वजह से दिल्ली और नोएडा के बीच आवाजाही करना भी उसके लिए संभव था। पुलिस अब उसके आवागमन से जुड़े स्थानों और संभावित ठिकानों की जांच कर सकती है। इसके साथ ही उन लोगों से भी पूछताछ की जा सकती है जिनसे आरोपित लगातार संपर्क में था। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि चोरी की घटनाओं के बाद वह सामान कहां ले जाता था।
पुलिस की जांच अब केवल आरोपित की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। अधिकारियों का ध्यान चोरी के सामान के खरीदारों तक पहुंचने पर भी है। यदि ऐसे लोगों की पहचान होती है जिन्होंने चोरी का सामान खरीदा है, तो पुलिस उनसे पूछताछ कर यह पता लगा सकती है कि फहीम ने कितनी बार और किस तरह सामान बेचा। इससे कथित चोरी के नेटवर्क की अगली कड़ियों का पता लगाने में मदद मिल सकती है।
दिल्ली में दर्ज 18 मामलों के अलावा नोएडा के सेक्टर-20 थाने में भी मुकदमा दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस उसके आपराधिक रिकॉर्ड का सत्यापन कर रही है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि पहले दर्ज मामलों में वह कब-कब जेल गया और उसके बाद किन इलाकों में सक्रिय रहा। पुराने मामलों के रिकॉर्ड से उसकी कथित आपराधिक गतिविधियों का पैटर्न समझने में पुलिस को मदद मिल सकती है।
नोएडा पुलिस की कार्रवाई के बाद अब उन लोगों पर भी नजर है जो चोरी के सामान को खपाने में मदद कर सकते हैं। पुलिस का मानना है कि लगातार बड़ी संख्या में चोरी की वारदातों के बाद सामान को अकेले रखना या इस्तेमाल करना संभव नहीं होता, इसलिए जांच में कथित खरीदारों और संपर्कों की भूमिका अहम हो सकती है। हालांकि किसी व्यक्ति की संलिप्तता पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगी।
फिलहाल फहीम से पूछताछ के आधार पर पुलिस चोरी की अन्य घटनाओं का सत्यापन कर रही है। उसके खिलाफ दिल्ली में दर्ज 18 मामलों और नोएडा में दर्ज मुकदमे की जानकारी को भी जांच में शामिल किया जा रहा है। पुलिस द्वारा बरामद औजारों और नकदी के अलावा चोरी के अन्य सामान की बरामदगी के प्रयास किए जा रहे हैं।
पुलिस की इस कार्रवाई से आने वाले दिनों में नोएडा और आसपास के क्षेत्रों में हुई कई पुरानी चोरी की घटनाओं के खुलासे की संभावना भी बनी है। यदि आरोपित के बताए स्थानों और संपर्कों की जांच में चोरी का सामान बरामद होता है तो पुलिस संबंधित मामलों में अलग-अलग कार्रवाई कर सकती है। फिलहाल जांच का केंद्र 50 से अधिक कथित चोरी की घटनाओं की कड़ियां जोड़ना और चोरी का सामान खरीदने वाले संभावित लोगों तक पहुंचना है









