गोरखपुर में लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े 4 बदमाश गिरफ्तार, दो ऑटोमेटिक पिस्टल बरामद असलहा तस्करी नेटवर्क की जांच तेज

गोरखपुर में लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े बताए जा रहे चार आरोपित गिरफ्तार हुए। पुलिस ने दो ऑटोमेटिक पिस्टल बरामद कर असलहा तस्करी नेटवर्क की जांच तेज की।
गोरखपुर में लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े 4 बदमाश गिरफ्तार, दो ऑटोमेटिक पिस्टल बरामद असलहा तस्करी नेटवर्क की जांच तेज
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गोरखपुर में लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़े बताए जा रहे अवैध असलहा तस्करी नेटवर्क के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई लगातार आगे बढ़ रही है। कैंट थाना पुलिस ने बुधवार सुबह चार और आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार पकड़े गए आरोपितों के कब्जे से .32 बोर की दो अवैध ऑटोमेटिक पिस्टल बरामद की गई हैं। गिरफ्तार आरोपितों में 10 हजार रुपये का इनामी बीरू साहनी भी शामिल है। पूछताछ पूरी करने के बाद पुलिस ने सभी आरोपितों को न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।

पुलिस ने गिरफ्तार आरोपितों की पहचान चौरीचौरा क्षेत्र के डुमरी खास निवासी मुलायम निषाद उर्फ नितेश, रामगढ़ताल क्षेत्र के लहसड़ी खैरा टोला निवासी शैलेंद्र निषाद, इसी इलाके के बीरू साहनी और डुमरी खास निवासी चंदन जायसवाल उर्फ लकी के रूप में की है। पुलिस अब इन आरोपितों से पूछताछ के आधार पर यह पता लगाने में जुटी है कि बरामद हथियार कहां से आए थे, इन्हें किसे उपलब्ध कराया जाना था और इस पूरे नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं।

यह कार्रवाई उस मामले की आगे बढ़ी हुई कड़ी है, जिसमें एसटीएफ ने सितंबर में गोरखपुर में असलहा तस्करी से जुड़े पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया था। पुलिस और एसटीएफ की जांच के दौरान पूछताछ में कई अन्य लोगों के नाम सामने आए थे। इसी आधार पर कैंट थाना पुलिस और एसटीएफ की टीमें लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही थीं। अब चार और आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है।

पुलिस के अनुसार 21 सितंबर की रात विंध्यवासिनी पार्क के पास से पहले पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इनमें श्रेयांश यादव उर्फ बबलू, अजीत यादव, अभिषेक गौड़ उर्फ भेली, अभिषेक प्रजापति उर्फ अभी और राहुल गुप्ता शामिल थे। पुलिस का कहना है कि इनसे पूछताछ के दौरान गिरोह से जुड़े अन्य लोगों के नाम सामने आए थे। इसके बाद अलग-अलग स्थानों पर दबिश देकर संदिग्धों की गतिविधियों और उनके संपर्कों की जानकारी जुटाई गई।

इस मामले में इससे पहले करन सोनकर नाम के एक आरोपित की भी गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस ने उसके कब्जे से .32 बोर की एक अवैध ऑटोमेटिक पिस्टल बरामद करने का दावा किया था। पूछताछ में करन ने पुलिस को बताया था कि उसने यह पिस्टल श्रेयांश यादव से खरीदी थी। इस कार्रवाई के बाद पुलिस ने असलहा खरीदने और बेचने वालों के बीच संपर्कों की कड़ियां जोड़नी शुरू की थीं।

पुलिस की अब तक की जांच में इस मामले को अंतरराज्यीय असलहा तस्करी नेटवर्क से जोड़कर देखा जा रहा है। जांच एजेंसियों के अनुसार हरियाणा के सोनीपत और मध्य प्रदेश के बड़वानी से हथियार पूर्वांचल तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है। इसके बाद गोरखपुर को हथियारों की आपूर्ति और वितरण के एक महत्वपूर्ण रास्ते के रूप में इस्तेमाल किए जाने की बात जांच में सामने आई है। हालांकि नेटवर्क में शामिल प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका अभी जांच का विषय है और पुलिस बरामद हथियारों के स्रोत तथा उनके अंतिम खरीदारों की जानकारी जुटा रही है।

जांच में यह भी सामने आया है कि कथित तस्करी नेटवर्क में इंटरनेट मीडिया के माध्यम से ग्राहकों से संपर्क करने की बात सामने आई थी। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि आरोपितों के बीच किस माध्यम से संपर्क होता था और हथियारों की खरीद-फरोख्त के लिए किस तरह बातचीत की जाती थी। जांच एजेंसियां आरोपितों के मोबाइल फोन, संपर्कों और वित्तीय लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड को भी खंगाल रही हैं, ताकि पूरे नेटवर्क की वास्तविक तस्वीर सामने आ सके।

पुलिस के अनुसार इस नेटवर्क में एक असलहा बेचने पर करीब 10 हजार रुपये तक का मुनाफा होने की जानकारी पूछताछ में सामने आई है। सौदा कराने वाले बिचौलियों को भी रकम दिए जाने की बात कही गई है। हालांकि पुलिस अब इस जानकारी को अन्य साक्ष्यों से मिलाकर देख रही है। जांच का एक प्रमुख उद्देश्य यह पता लगाना है कि असलहा खरीदने वाले लोग कौन थे और हथियार मिलने के बाद उनका इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए किया जाना था।

गोरखपुर में इस कार्रवाई के बाद पुलिस की नजर अब उन लोगों पर भी है जिनके नाम पूछताछ के दौरान सामने आए हैं। रिपोर्टों के अनुसार इस मामले में बड़ी संख्या में लोगों को नामजद किया गया है और कई संदिग्ध अभी पुलिस की पहुंच से बाहर हैं। एसटीएफ, क्राइम ब्रांच और कैंट थाना पुलिस की टीमें गोरखपुर के साथ आसपास के जिलों में भी संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। पुलिस का कहना है कि फरार आरोपितों की गिरफ्तारी के साथ-साथ हथियारों की सप्लाई करने वाले लोगों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।

इससे पहले जांच में यह बात भी सामने आई थी कि असलहा तस्करी के लिए पारंपरिक मुंगेर रूट पर निगरानी बढ़ने के बाद तस्करों ने कथित तौर पर रास्ता बदला। जांच एजेंसियों के अनुसार हरियाणा के सोनीपत और मध्य प्रदेश के बड़वानी से हथियार लाकर उन्हें गोरखपुर के रास्ते पूर्वांचल के अलग-अलग जिलों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही थी। इस नेटवर्क के सामने आने के बाद एसटीएफ ने अलग-अलग राज्यों और जिलों में अपनी जांच का दायरा बढ़ाया है।

गिरफ्तार चारों आरोपितों से पुलिस ने उनके पुराने संपर्कों, हथियारों की खरीद-फरोख्त और संभावित खरीदारों के बारे में जानकारी हासिल करने की कोशिश की। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इन आरोपितों का संपर्क पहले गिरफ्तार किए गए लोगों से किस स्तर पर था। इसके अलावा उनके बैंक खातों और रुपये के लेनदेन की जांच भी की जा रही है, ताकि हथियारों की खरीद में इस्तेमाल होने वाले पैसों के स्रोत और भुगतान की कड़ियों का पता चल सके।

मामले में पुलिस की कार्रवाई केवल हथियार बरामद करने तक सीमित नहीं है। जांच एजेंसियों का फोकस अब पूरे नेटवर्क की संरचना समझने पर है। हथियार उपलब्ध कराने वाला व्यक्ति कौन है, उन्हें गोरखपुर तक कौन पहुंचाता था, स्थानीय स्तर पर इन्हें किसे बेचा जाता था और इस काम में कौन-कौन लोग मदद करते थे, इन सभी बिंदुओं पर जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार नेटवर्क से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका की जांच साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।

सितंबर में शुरू हुई इस कार्रवाई के बाद अब तक कई आरोपितों की गिरफ्तारी और कुछ लोगों के न्यायालय में आत्मसमर्पण की जानकारी सामने आ चुकी है। इससे जांच एजेंसियों को नेटवर्क की अलग-अलग कड़ियों तक पहुंचने में मदद मिली है। पुलिस के मुताबिक अभी भी कई नामजद आरोपितों की तलाश जारी है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना से इनकार नहीं किया गया है, हालांकि किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी या भूमिका को अंतिम रूप से अदालत के निर्णय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

गोरखपुर में अवैध हथियारों की इस कार्रवाई के बीच पुलिस की ओर से यह भी जांच की जा रही है कि बरामद पिस्टलों का इस्तेमाल किसी आपराधिक वारदात में किया गया था या नहीं। इसके लिए हथियारों के स्रोत, उनके पिछले कब्जेदारों और उनसे जुड़े मामलों की जानकारी को आपस में मिलाया जा रहा है। यदि किसी हथियार का किसी पुराने अपराध से संबंध मिलता है तो उस दिशा में भी अलग से कार्रवाई की जा सकती है।

फिलहाल कैंट थाना पुलिस ने गिरफ्तार चारों आरोपितों को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया है। दो ऑटोमेटिक पिस्टल की बरामदगी के बाद पुलिस की जांच अब हथियारों के स्रोत और पूरे तस्करी नेटवर्क की अगली कड़ी तक पहुंचने पर केंद्रित है। इस मामले में आगे होने वाली गिरफ्तारियों और जांच से यह स्पष्ट होगा कि गोरखपुर में सक्रिय बताए जा रहे इस अंतरराज्यीय असलहा नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं और हथियारों की आपूर्ति किस स्तर तक फैली हुई थी।

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