Northern Ireland में वेतन विवाद को लेकर रेजिडेंट डॉक्टरों ने 24 घंटे की हड़ताल शुरू कर दी है। डॉक्टर 3.5% वेतन वृद्धि को नाकाफी बता रहे हैं। हड़ताल के दौरान आपातकालीन सेवाएं जारी रहेंगी, जबकि कई गैर-जरूरी ऑपरेशन और अपॉइंटमेंट प्रभावित हो सकते हैं।
लंदन: उत्तरी आयरलैंड में स्वास्थ्य सेवाओं पर एक बार फिर वेतन विवाद का असर देखने को मिला है। रेजिडेंट डॉक्टरों ने वेतन वृद्धि की मांग को लेकर 24 घंटे की औद्योगिक हड़ताल शुरू कर दी है। सोमवार सुबह 7 बजे (BST) शुरू हुई यह हड़ताल मंगलवार सुबह 6:59 बजे तक जारी रहेगी। इस दौरान कई अस्पतालों में नियमित स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने की आशंका जताई गई है, हालांकि आपातकालीन और गंभीर मरीजों के इलाज को प्राथमिकता देने की व्यवस्था की गई है।
यह हड़ताल ऐसे समय में हुई है जब पिछले सप्ताह ही कंसल्टेंट और स्पेशलिस्ट डॉक्टरों ने भी वेतन संबंधी मांगों को लेकर अभूतपूर्व हड़ताल की थी। पहली बार उत्तरी आयरलैंड में डॉक्टरों के विभिन्न वर्ग एक के बाद एक औद्योगिक कार्रवाई कर रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है।
डॉक्टरों का आरोप- वर्षों से वेतन में वास्तविक बढ़ोतरी नहीं हुई
रेजिडेंट डॉक्टरों का कहना है कि पिछले डेढ़ दशक से उनकी आय महंगाई की तुलना में लगातार घटती गई है। उनका दावा है कि वर्ष 2008 के बाद से उनकी वास्तविक आय में 20 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है। ब्रिटिश मेडिकल एसोसिएशन (BMA) की उत्तरी आयरलैंड रेजिडेंट डॉक्टर्स कमेटी के अध्यक्ष डॉ. स्टीवन मोंटगोमरी ने कहा कि डॉक्टर लंबे समय से उचित वेतन की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से घोषित 3.5 प्रतिशत वेतन वृद्धि उनकी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों के सामने बढ़ती महंगाई, कार्यभार और जीवन-यापन की लागत जैसी चुनौतियां हैं, जबकि वेतन वृद्धि इन परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है।
3.5 प्रतिशत वेतन वृद्धि को डॉक्टरों ने किया अस्वीकार
विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब स्वतंत्र वेतन समीक्षा निकाय ने डॉक्टरों के लिए 3.5 प्रतिशत वेतन वृद्धि की सिफारिश की। ब्रिटिश मेडिकल एसोसिएशन ने इस प्रस्ताव को अपर्याप्त बताते हुए अपने सदस्यों के बीच मतदान कराया।
मतदान में 92 प्रतिशत रेजिडेंट डॉक्टरों, 79 प्रतिशत कंसल्टेंट डॉक्टरों और लगभग 90 प्रतिशत स्पेशलिस्ट, एसोसिएट स्पेशलिस्ट तथा स्पेशियलिटी (SAS) डॉक्टरों ने हड़ताल के पक्ष में मतदान किया। डॉक्टरों का कहना है कि यह वेतन वृद्धि वर्षों से चली आ रही वेतन गिरावट की भरपाई नहीं कर सकती और इसलिए उन्होंने औद्योगिक कार्रवाई का रास्ता चुना।
अस्पतालों के बाहर प्रदर्शन, डॉक्टरों ने जताई नाराजगी
हड़ताल के दौरान बेलफास्ट के रॉयल विक्टोरिया अस्पताल, लंदनडेरी के अल्टनागेल्विन अस्पताल और क्रेगावन एरिया अस्पताल सहित कई प्रमुख चिकित्सा संस्थानों के बाहर डॉक्टरों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। डॉ. स्टीवन मोंटगोमरी ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि स्वास्थ्यकर्मी मौजूदा स्थिति से बेहद नाराज हैं। उनके अनुसार, लगातार कम वेतन और कठिन कार्य परिस्थितियों के कारण डॉक्टर दूसरे देशों में रोजगार तलाशने के लिए मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में किए गए एक सर्वेक्षण में उत्तरी आयरलैंड के अंतिम वर्ष के 54 प्रतिशत से अधिक मेडिकल छात्रों ने बताया कि वे भविष्य में यहां काम करने की योजना नहीं बना रहे हैं।
डॉक्टरों का दावा- बेहतर वेतन के कारण विदेश जा रहे स्वास्थ्यकर्मी
ब्रिटिश मेडिकल एसोसिएशन का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और अन्य देशों में बेहतर वेतन और कार्य परिस्थितियों के कारण बड़ी संख्या में डॉक्टर उत्तरी आयरलैंड छोड़ रहे हैं। डॉक्टरों का मानना है कि यदि यह प्रवृत्ति जारी रही तो आने वाले वर्षों में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा (NHS) को गंभीर चिकित्सक संकट का सामना करना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशिक्षित डॉक्टरों का पलायन केवल वर्तमान सेवाओं को प्रभावित नहीं करता, बल्कि भविष्य में मरीजों की देखभाल और स्वास्थ्य प्रणाली की क्षमता पर भी गहरा असर डाल सकता है।
मरीजों पर पड़ेगा असर, लेकिन आपातकालीन सेवाएं रहेंगी जारी
कंसल्टेंट कमेटी के अध्यक्ष डॉ. डेविड फैरन ने स्वीकार किया कि हड़ताल के कारण कई नियोजित सर्जरी, बाह्य रोगी (आउटपेशेंट) सेवाएं और अन्य गैर-आपातकालीन चिकित्सा प्रक्रियाएं स्थगित करनी पड़ सकती हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि अस्पतालों में आपातकालीन और गंभीर मरीजों की देखभाल पूरी प्राथमिकता के साथ जारी रहेगी। डॉक्टरों ने कहा कि मरीजों की सुरक्षा उनके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसी कारण आवश्यक चिकित्सा सेवाओं को जारी रखा जाएगा।
सरकार ने बजट सीमाओं का दिया हवाला
उत्तरी आयरलैंड के स्वास्थ्य मंत्री माइक नेसबिट ने कहा कि वह डॉक्टरों के वेतन को लेकर उनकी चिंताओं को समझते हैं और इस वर्ष की वेतन सिफारिश लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान बजटीय स्थिति के कारण सरकार 3.5 प्रतिशत से अधिक वेतन वृद्धि देने की स्थिति में नहीं है। स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार यदि डॉक्टरों को इससे अधिक वेतन वृद्धि दी जाती है तो इसका प्रभाव अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों, जैसे नर्सों, शिक्षकों और पुलिस कर्मियों के वेतन ढांचे पर भी पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार सार्वजनिक वित्तीय संतुलन बनाए रखने के लिए स्वतंत्र वेतन समीक्षा निकाय की सिफारिशों से आगे नहीं जा सकती।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर बढ़ता दबाव
डॉक्टरों का कहना है कि अस्पताल पहले से ही कर्मचारियों की कमी और बढ़ती मरीज संख्या से जूझ रहे हैं। ऐसे में कम वेतन और खराब कार्य परिस्थितियां स्वास्थ्य व्यवस्था को और अधिक कमजोर बना रही हैं। रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. हेलेन केर ने कहा कि लगातार कम वेतन के कारण डॉक्टरों का मनोबल प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा पहले से ही दबाव में है और यदि योग्य डॉक्टर लगातार नौकरी छोड़ते रहे तो प्रतीक्षा सूची और लंबी होती जाएगी। उनका कहना है कि डॉक्टर कई बार सरकार के साथ बातचीत के लिए तैयार हुए, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया।
समाधान की तलाश जारी
ब्रिटिश मेडिकल एसोसिएशन ने सरकार से तत्काल सार्थक वार्ता शुरू करने और वेतन विवाद का स्थायी समाधान निकालने की अपील की है। संगठन का कहना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकला तो भविष्य में और भी व्यापक औद्योगिक कार्रवाई की जा सकती है।
दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि वह स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारु बनाए रखने और उपलब्ध वित्तीय संसाधनों के भीतर समाधान खोजने का प्रयास कर रही है।










