नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का 22,569 करोड़ रुपये का आईपीओ सोमवार को बंद हो गया। संस्थागत निवेशकों की मजबूत मांग के चलते यह इश्यू कुल 5.71 गुना यानी करीब 6 गुना सब्सक्राइब हुआ।
NSE IPO: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बहुप्रतीक्षित आईपीओ को निवेशकों की ओर से मजबूत प्रतिक्रिया मिली है। करीब 22,569 करोड़ रुपये का यह इश्यू कुल 5.71 गुना सब्सक्राइब हुआ। संस्थागत निवेशकों की भारी भागीदारी इसकी सबसे बड़ी वजह रही। हालांकि, आईपीओ को मजबूत सब्सक्रिप्शन मिलने के बावजूद इसके ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है।
NSE का यह आईपीओ भारतीय शेयर बाजार के इतिहास के सबसे बड़े सार्वजनिक निर्गमों में शामिल है। इससे पहले हुंडई मोटर इंडिया का आईपीओ देश का सबसे बड़ा आईपीओ रहा था। NSE इश्यू के लिए करीब 90,300 करोड़ रुपये की बोलियां प्राप्त हुईं। शेयरों की संभावित लिस्टिंग 24 सितंबर 2026 को होने की उम्मीद है।
50 करोड़ से ज्यादा शेयरों के लिए मिली बोलियां
NSE आईपीओ में बिक्री के लिए रखे गए 8.86 करोड़ से अधिक शेयरों के मुकाबले करीब 50.58 करोड़ शेयरों के लिए बोली लगाई गई। इस तरह कुल सब्सक्रिप्शन 5.71 गुना रहा। निवेशकों की अलग-अलग श्रेणियों में भी मांग में बड़ा अंतर देखने को मिला। पात्र संस्थागत खरीदारों यानी QIB हिस्से को 12.68 गुना सब्सक्रिप्शन मिला।
गैर-संस्थागत निवेशकों की श्रेणी 6.55 गुना सब्सक्राइब हुई, जबकि खुदरा निवेशकों के लिए निर्धारित हिस्सा 1.39 गुना भरा। आईपीओ से पहले NSE ने एंकर निवेशकों से भी करीब 6,746 करोड़ रुपये जुटाए थे। एंकर निवेशकों में बड़े संस्थागत नाम शामिल रहे।
क्या है NSE IPO का प्राइस बैंड?

NSE आईपीओ के लिए प्रति इक्विटी शेयर 1,700 से 1,785 रुपये का प्राइस बैंड तय किया गया था। ऊपरी मूल्य सीमा के आधार पर एक्सचेंज का अनुमानित मूल्यांकन करीब 4.42 लाख करोड़ रुपये बैठता है। यह इश्यू पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) है। इसका मतलब है कि आईपीओ के जरिए जारी किए जा रहे शेयर कंपनी के नए शेयर नहीं हैं, बल्कि मौजूदा शेयरधारकों द्वारा बेचे जा रहे हैं। इसलिए शेयरों की बिक्री से प्राप्त राशि NSE को सीधे नहीं मिलेगी, बल्कि संबंधित मौजूदा शेयरधारकों को जाएगी।
लगातार क्यों गिर रहा है NSE IPO का GMP?
NSE आईपीओ की लिस्टिंग से पहले सबसे ज्यादा चर्चा उसके ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी GMP को लेकर हो रही है। उपलब्ध ग्रे मार्केट संकेतों के मुताबिक 21 सितंबर को NSE IPO का GMP करीब 48 रुपये रह गया था। इसमें पिछले कुछ हफ्तों में उल्लेखनीय गिरावट आई है। 5 सितंबर को इसका GMP करीब 310 रुपये बताया गया था। यानी इस अवधि में ग्रे मार्केट प्रीमियम में काफी कमी आई है।
यदि 1,785 रुपये के अपर प्राइस बैंड में 48 रुपये का GMP जोड़ा जाए, तो अनुमानित कीमत करीब 1,833 रुपये बनती है। हालांकि, यह केवल ग्रे मार्केट के मौजूदा संकेत पर आधारित अनुमान है और वास्तविक लिस्टिंग कीमत इससे अलग हो सकती है।
GMP से लिस्टिंग का पक्का अनुमान नहीं
ग्रे मार्केट प्रीमियम को निवेशकों के बीच आईपीओ की संभावित लिस्टिंग का एक अनौपचारिक संकेत माना जाता है। लेकिन GMP आधिकारिक बाजार मूल्य नहीं है और इसमें बाजार की धारणा, मांग, आपूर्ति तथा लिस्टिंग से पहले बदलते परिस्थितियों के कारण उतार-चढ़ाव हो सकता है। इसलिए मौजूदा GMP को NSE शेयर की अंतिम लिस्टिंग कीमत का निश्चित अनुमान नहीं माना जाना चाहिए। लिस्टिंग के दिन वास्तविक कीमत बाजार में शेयरों की मांग और आपूर्ति के आधार पर तय होगी।











