परमाणु ऊर्जा सेक्टर में बड़ा बदलाव: निजी कंपनियों की एंट्री आसान बनाने की तैयारी में भारत

Nuclear Energy News: भारत परमाणु ऊर्जा सेक्टर में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। निजी कंपनियों की एंट्री आसान होने से न्यूक्लियर एनर्जी में निवेश और उत्पादन

भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी कंपनियों की एंट्री को आसान बनाने की तैयारी है। डिपार्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी (DAE) ने सरकारी कंपनी न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) की एक नई कंसल्टिंग सब्सिडियरी बनाने का प्रस्ताव तैयार किया है।

नई दिल्ली: भारत सरकार देश के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम उठाने की तैयारी कर रही है। डिपार्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी (DAE) ने सरकारी कंपनी न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) की एक नई कंसल्टिंग सब्सिडियरी स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्रस्तावित कंपनी का उद्देश्य निजी क्षेत्र को परमाणु बिजली परियोजनाओं से जुड़ी तकनीकी, इंजीनियरिंग और नियामकीय जरूरतों में सहायता देना होगा।

इस पहल को भारत के न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर में निजी निवेश बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रस्तावित कंसल्टिंग यूनिट खास तौर पर प्रेशराइज्ड हेवी वॉटर रिएक्टर (PHWR) तकनीक पर आधारित परियोजनाओं के लिए डिजाइन, इंजीनियरिंग, संचालन, प्रबंधन और रेगुलेटरी सपोर्ट उपलब्ध करा सकती है।

निजी कंपनियों को मिलेगी तकनीकी मदद

अधिकारियों के मुताबिक, प्रस्तावित सब्सिडियरी पूरी तरह NPCIL के स्वामित्व वाली हो सकती है। इसका मकसद उन निजी कंपनियों को विशेषज्ञ सलाह उपलब्ध कराना है, जो भारत के तेजी से खुल रहे परमाणु ऊर्जा बाजार में प्रवेश करना चाहती हैं। NPCIL फिलहाल भारत में PHWR तकनीक वाले परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के संचालन और विकास में प्रमुख भूमिका निभाती है। ऐसे में निजी कंपनियों के लिए इस क्षेत्र में प्रवेश करते समय तकनीकी विशेषज्ञता हासिल करना एक बड़ी चुनौती हो सकती है। नई कंसल्टिंग यूनिट इसी अंतर को भरने का काम कर सकती है।

कंपनियों को रिएक्टर डिजाइन और इंजीनियरिंग के अलावा साइट चयन, संचालन एवं रखरखाव की रणनीति, रिएक्टर तकनीक और नियामकीय प्रक्रियाओं से जुड़े मामलों में भी सहायता मिल सकती है।

2047 तक 100 GW परमाणु क्षमता का लक्ष्य

भारत ने 2047 तक अपनी परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 गीगावाट (GW) तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इसका उद्देश्य देश की तेजी से बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु लक्ष्यों को मजबूती देना है। इस विस्तार योजना में NPCIL की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। कंपनी ने अपनी ओर से लगभग 54 GW परमाणु बिजली क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है। इतनी बड़ी क्षमता तैयार करने के लिए सरकार को सार्वजनिक क्षेत्र के साथ-साथ निजी कंपनियों की भागीदारी भी बढ़ानी होगी।

SHANTI Act से खुला निजी क्षेत्र के लिए रास्ता

परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी कंपनियों की संभावित एंट्री को पिछले साल लागू किए गए Sustainable Harnessing and Advancement of Nuclear Energy for Transforming India (SHANTI) Act 2025 से भी बल मिला है। इस कानून के बाद निजी क्षेत्र के लिए परमाणु बिजली उत्पादन में भागीदारी का रास्ता पहले की तुलना में अधिक खुला है।

DAE ने SHANTI Act के तहत नियमों और प्रक्रियाओं का ड्राफ्ट भी जारी किया है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत योग्य निजी कंपनियां परमाणु ऊर्जा संयंत्र बनाने, उसका स्वामित्व रखने, संचालन करने और बाद में उसे डीकमीशन करने के लिए लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकेंगी।

NPCIL की नई यूनिट कैसे काम करेगी?

प्रस्ताव के शुरुआती ढांचे में कंसल्टिंग सब्सिडियरी के बोर्ड में NPCIL के तीन नॉमिनी डायरेक्टर शामिल हो सकते हैं। कंपनी के रोजमर्रा के कामकाज के लिए चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) और चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) की नियुक्ति का प्रावधान भी प्रस्तावित है। NPCIL जरूरत के मुताबिक इस नई कंपनी में शुरुआती इक्विटी निवेश कर सकती है। 

इस पूंजी का इस्तेमाल इंफ्रास्ट्रक्चर और जरूरी परिसंपत्तियां विकसित करने में किया जा सकता है। भविष्य की जरूरतों के अनुसार निवेश बढ़ाने का विकल्प भी रखा जा सकता है।

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