2676 करोड़ के नेक्सा एवरग्रीन ठगी मामले में 4 आरोपी बरी, कोर्ट ने जांच पर उठाए सवाल

नेक्सा एवरग्रीन के 6.50 लाख रुपये ठगी मामले में सीकर कोर्ट ने चार आरोपियों को बरी किया। अदालत ने पुलिस जांच और चार्जशीट में ठोस सबूतों की कमी पर सवाल उठाए।

राजस्थान के 2676 करोड़ रुपये के चर्चित नेक्सा एवरग्रीन निवेश मामले में सीकर ADJ-1 कोर्ट ने 6.50 लाख रुपये की ठगी से जुड़े केस में चार आरोपियों को बरी किया। अदालत ने कहा कि पुलिस पर्याप्त और भरोसेमंद सबूत पेश नहीं कर सकी।

सीकर: राजस्थान के बहुचर्चित नेक्सा एवरग्रीन निवेश घोटाले से जुड़े 6.50 लाख रुपये की ठगी के एक मामले में सीकर की ADJ-1 अदालत ने चार आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि पुलिस ने गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया, लेकिन आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त और भरोसेमंद सबूत पेश नहीं किए। हालांकि, सुभाष बिजारणियां, रणवीर बिजारणियां, ओपेन्द्र और नरेश काजला दूसरे मामलों में आरोपी होने के कारण अभी जेल में रहेंगे।

चार आरोपियों को क्यों किया गया बरी?

अदालत के सामने सुनवाई के दौरान पुलिस की जांच और चार्जशीट को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल सामने आए। कोर्ट ने पाया कि शुरुआती स्तर पर उच्च अधिकारियों के निर्देश और पहले दर्ज मामलों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराएं लगाई गई थीं। इनमें BUDS Act, इनामी चिट फंड और धन परिचालन योजना से संबंधित प्रावधान भी शामिल थे।

हालांकि, जांच आगे बढ़ने के बाद आरोपियों के खिलाफ ऐसे ठोस साक्ष्य सामने नहीं आए, जिनसे लगाए गए आरोपों को विश्वसनीय तरीके से साबित किया जा सके। अदालत ने कहा कि केवल गंभीर धाराएं जोड़ देने से किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। आरोपों की पुष्टि के लिए पर्याप्त साक्ष्य होना जरूरी है।

कोर्ट ने चार्जशीट तैयार करने वाले अधिकारी की भूमिका पर भी सवाल उठाया। फैसले में कहा गया कि जांच से सामने आए तथ्यों का चार्जशीट में पर्याप्त और उचित इस्तेमाल नहीं किया गया। सुनवाई के दौरान एक पुलिसकर्मी ने यह भी कहा कि उसने चार्जशीट तैयार नहीं की थी। अदालत ने इन परिस्थितियों को मामले में महत्वपूर्ण माना।

6.50 लाख रुपये निवेश कराने का आरोप

मामले की शुरुआत फदनपुरा निवासी रामकृष्ण की शिकायत से हुई थी। उन्होंने 22 फरवरी 2024 को सीकर के उद्योग नगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, नेक्सा एवरग्रीन से जुड़े सुभाष बिजारणियां, रणवीर बिजारणियां और उपेंद्र ने निवेश पर आकर्षक रिटर्न का भरोसा दिलाया था।

शिकायतकर्ता के मुताबिक, उन्हें बताया गया था कि कंपनी में 50 हजार रुपये लगाने पर 14 महीने बाद 80 हजार रुपये वापस मिलेंगे। इस भरोसे में उन्होंने करीब 6.50 लाख रुपये निवेश कर दिए। बाद में कंपनी का कामकाज बंद हो गया और निवेश की रकम वापस नहीं मिली।

रामकृष्ण ने कंपनी से जुड़े नरेश काजला से संपर्क किया तो कथित तौर पर उन्हें कहा गया कि कंपनी पर प्रवर्तन निदेशालय यानी ED की कार्रवाई हुई है और फिलहाल मुकदमा दर्ज नहीं कराया जाए, वरना पैसा वापस मिलने में परेशानी होगी। बाद में उन्हें कथित तौर पर पता चला कि यह भी निवेशकों को शांत रखने की रणनीति का हिस्सा था।

रियल एस्टेट के नाम पर शुरू हुई थी कंपनी

उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, नेक्सा एवरग्रीन का पंजीकरण 17 अप्रैल 2021 को अहमदाबाद में किया गया था। कंपनी को रियल एस्टेट गतिविधियों के लिए पंजीकृत बताया गया था। कंपनी से सुभाष बिजारणियां और रणवीर बिजारणियां का नाम प्रमुख रूप से जुड़ा था।

कंपनी से जुड़े लोगों ने गुजरात के धोलेरा स्मार्ट सिटी क्षेत्र में जमीन और भविष्य के बड़े प्रोजेक्ट्स का सपना दिखाकर निवेश आकर्षित किया। निवेशकों को बताया जाता था कि उनके पैसे से बहुमंजिला इमारतें, मॉल और आवासीय कॉलोनियां विकसित की जाएंगी। बड़े निवेशकों को जमीन से जुड़े दस्तावेज दिखाने और प्रस्तावित परियोजनाओं की जानकारी देने के लिए साइट विजिट भी कराई जाती थी।

इन दावों और भविष्य में बड़े मुनाफे की उम्मीद ने बड़ी संख्या में लोगों को निवेश के लिए आकर्षित किया। बाद में यही निवेश योजना राजस्थान में बड़े विवाद और पुलिस कार्रवाई का कारण बनी।

पुलिसकर्मी और सरकारी कर्मचारी भी बने नेटवर्क का हिस्सा

नेक्सा एवरग्रीन के नेटवर्क में आम निवेशकों के साथ पुलिस और दूसरे सरकारी विभागों से जुड़े लोग भी शामिल बताए गए। कंपनी के प्रमुख लोगों के परिवार से जुड़ी महिलाओं पर भी निवेशकों को जोड़ने के आरोप लगे।

रणवीर बिजारणियां की पत्नी लक्ष्मी सीकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय में कांस्टेबल थीं और उन्होंने VRS लिया था। आरोप है कि उन्होंने अपने पुलिसकर्मी परिचितों के बीच कंपनी की निवेश योजनाओं का प्रचार किया। इसी तरह कंपनी से जुड़े एक अन्य व्यक्ति की पत्नी गिरिजा के स्वास्थ्य विभाग में ANM होने के दौरान कर्मचारियों के बीच निवेश योजना पहुंचाने की बात सामने आई।

इन लोगों की सरकारी नौकरी और विभागीय पहचान से निवेशकों में कंपनी के प्रति भरोसा बढ़ने का दावा किया गया था। कंपनी से जुड़े लोगों ने पूर्व सैन्यकर्मियों को भी निशाना बनाया। रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली बड़ी रकम को निवेश कराने के लिए उन्हें आकर्षक रिटर्न और जमीन से जुड़े प्रस्ताव दिखाए जाते थे।

60 सप्ताह के प्लान और हर सप्ताह रिटर्न का लालच

निवेशकों को आकर्षित करने के लिए अलग-अलग योजनाएं पेश की जाती थीं। इनमें बैंक से अधिक रिटर्न, हर सप्ताह खाते में भुगतान, नए ग्राहक जोड़ने पर कमीशन और धोलेरा में प्लॉट जैसी पेशकश शामिल थी।

बताया गया कि 50 हजार रुपये के निवेश पर हर सप्ताह करीब 1,352 रुपये और 1 लाख रुपये पर करीब 2,704 रुपये रिटर्न देने का दावा किया जाता था। कंपनी ने निवेशकों को भरोसा दिलाने के लिए बुकलेट भी तैयार कर रखे थे। इनमें प्रस्तावित प्रोजेक्ट, जमीन, प्लॉट, मॉल और विकसित शहरों की तस्वीरें दिखाई जाती थीं।

मोबाइल ऐप से बनाया भरोसे का माहौल

कंपनी ने निवेश प्रक्रिया को व्यवस्थित और आधुनिक दिखाने के लिए नेक्सा एवरग्रीन नाम से मोबाइल ऐप भी तैयार किया था। निवेश करने वाले ग्राहकों के लिए आईडी और पासवर्ड बनाए जाते थे। ऐप पर लेनदेन और निवेश से जुड़ी जानकारी दिखाई जाती थी।

इस डिजिटल व्यवस्था ने कई निवेशकों के बीच यह धारणा बनाई कि कंपनी एक व्यवस्थित कारोबारी मॉडल के तहत काम कर रही है और उनका पैसा सुरक्षित है। नियमित भुगतान मिलने से यह भरोसा और मजबूत होता गया।

मंगलवार को खाते में पहुंचता था रिटर्न

कंपनी के निवेश मॉडल में साप्ताहिक भुगतान को सबसे बड़ा आकर्षण बनाया गया था। निवेशकों को बताया गया था कि हर मंगलवार उनके खाते में रिटर्न की राशि पहुंच जाएगी। शुरुआती दौर में जब लोगों को नियमित भुगतान मिला तो कंपनी के प्रति उनका भरोसा बढ़ता गया।

इसके बाद कई निवेशकों ने अपनी बचत के साथ जमीन और दूसरी संपत्तियां बेचकर भी पैसा लगाने का फैसला किया। यही वजह रही कि कंपनी के बंद होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा।

नए निवेशक जोड़ने पर मिलता था कमीशन

कंपनी का मॉडल मल्टीलेवल मार्केटिंग जैसी संरचना पर भी आधारित बताया गया। निवेशकों को नए लोगों को जोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाता था। तीन नए लोगों को जोड़ने पर करीब 4,500 रुपये तक कमीशन देने का दावा किया जाता था।

इसके अलावा नए निवेशक द्वारा आगे किसी अन्य व्यक्ति को जोड़ने पर भी कमीशन की व्यवस्था बताई गई थी। इस तरह एक निवेशक दूसरे निवेशकों को जोड़ता गया और नेटवर्क लगातार बढ़ता गया। रिश्तेदारों, दोस्तों और परिचितों तक निवेश योजना पहुंचने से कंपनी का नेटवर्क तेजी से फैल गया।

जनवरी 2024 में भुगतान रुका, खुलने लगा पूरा मामला

17 जनवरी 2024 को जब कई निवेशकों के खातों में अपेक्षित भुगतान नहीं पहुंचा तो सवाल उठने लगे। कंपनी की ओर से भुगतान जल्द शुरू होने का भरोसा दिया गया, लेकिन 24 जनवरी को भी पैसा नहीं आया। इसके बाद निवेशकों की चिंता बढ़ गई।

कुछ निवेशक गुजरात के धोलेरा क्षेत्र में कंपनी से जुड़े कार्यालयों तक पहुंचे, लेकिन उन्हें भी आश्वासन ही मिला। इसके बाद कंपनी के प्रमुख लोगों के फरार होने की खबर सामने आई। राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र में निवेशकों के बीच हड़कंप मच गया और लोग बड़ी संख्या में पुलिस थानों में शिकायतें लेकर पहुंचने लगे।

राजस्थान के कई जिलों में 200 से ज्यादा FIR

नेक्सा एवरग्रीन मामले में जयपुर, सीकर, झुंझुनूं, जोधपुर, चूरू और राजस्थान के अन्य हिस्सों में बड़ी संख्या में मुकदमे दर्ज हुए। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अकेले राजस्थान में 200 से अधिक FIR सामने आईं।

मामले की व्यापकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बड़ी संख्या में पीड़ित पुलिस के पास शिकायत लेकर पहुंचते रहे। कई स्थानों पर शिकायतों की संख्या इतनी बढ़ गई कि पुलिस को अलग-अलग शिकायतों के बजाय समूह के आधार पर भी कार्रवाई करनी पड़ी।

2676 करोड़ की कथित ठगी का मामला

नेक्सा एवरग्रीन प्रकरण को राजस्थान के सबसे बड़े निवेश विवादों में गिना गया है। कुल कथित ठगी की रकम करीब 2,676 करोड़ रुपये बताई गई है। हालांकि, इस पूरे प्रकरण से जुड़े सभी मामलों में अदालतों का फैसला अभी नहीं आया है।

सीकर ADJ-1 अदालत का मौजूदा फैसला केवल उस मामले से संबंधित है, जिसमें 6.50 लाख रुपये के निवेश और ठगी के आरोप थे। चार आरोपियों के बरी होने का अर्थ यह नहीं है कि पूरे नेक्सा एवरग्रीन प्रकरण में सभी आरोप खत्म हो गए हैं। अन्य मुकदमों में अलग-अलग अदालतों में सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया जारी है।

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