ओडिशा के क्योंझर में एक युवक अपनी मृत बहन का कंकाल लेकर बैंक पहुंच गया। बैंक कर्मचारियों द्वारा खाता धारक को लाने की शर्त के बाद वह परेशान होकर तीन किलोमीटर पैदल चलकर बैंक पहुंचा, जिससे अफरा-तफरी मच गई हुई।
क्योंझर: ओडिशा के क्योंझर जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने स्थानीय प्रशासन से लेकर आम लोगों तक को स्तब्ध कर दिया। एक आदिवासी व्यक्ति अपनी मृत बहन का कंकाल कंधे पर लेकर बैंक पहुंच गया, जिससे बैंक परिसर में अफरा-तफरी मच गई।
यह घटना सोमवार को मल्लिपसी स्थित ओडिशा ग्रामीण बैंक शाखा में हुई, जहां शख्स लगभग 3 किलोमीटर पैदल चलकर कंकाल के साथ पहुंचा।
बैंक प्रक्रिया से परेशान होकर उठाया कठोर कदम
पीड़ित व्यक्ति की पहचान जीतू मुंडा के रूप में हुई है। वह अपनी दिवंगत बहन के बैंक खाते से 20,000 रुपये निकालना चाहता था। लेकिन बैंक में बार-बार जाने के बावजूद उसे पैसे नहीं दिए गए।
बैंक कर्मचारियों ने उसे स्पष्ट रूप से कहा था कि खाते से पैसे निकालने के लिए खाता धारक या कानूनी वारिस को प्रस्तुत करना जरूरी है। इसी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए जीतू मुंडा को बार-बार बैंक के चक्कर लगाने पड़े।
बहन की मौत के बाद भी नहीं मिली सहायता
जानकारी के अनुसार, जीतू मुंडा पहले ही बैंक को अपनी बहन की मृत्यु की जानकारी दे चुका था। इसके बावजूद, बैंक की औपचारिकताओं और दस्तावेजी प्रक्रिया के कारण उसे किसी तरह की मदद नहीं मिल सकी।
इससे निराश होकर उसने एक बेहद असामान्य कदम उठाया और अपनी बहन का कंकाल कब्र से निकालकर बैंक तक ले आया।

3 किलोमीटर कंधे पर कंकाल लेकर चला भाई
स्थानीय लोगों के अनुसार, जीतू मुंडा अपनी बहन का कंकाल कंधे पर रखकर लगभग 3 किलोमीटर पैदल चला और बैंक शाखा तक पहुंचा। बैंक परिसर में कंकाल देखते ही कर्मचारियों और ग्राहकों में हड़कंप मच गया।
स्थिति बिगड़ती देख बैंक कर्मचारियों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी।
पुलिस ने मौके पर संभाला हालात
सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस के अनुसार, जीतू मुंडा पढ़ा-लिखा नहीं है और उसे बैंकिंग या कानूनी प्रक्रियाओं की कोई जानकारी नहीं है।
स्टेशन प्रभारी निरीक्षक (IIC) ने बताया कि जीतू को यह समझ नहीं थी कि कानूनी वारिस, नॉमिनी और बैंक प्रक्रिया क्या होती है। इसी वजह से वह लगातार परेशान होता रहा।
प्रशासन का हस्तक्षेप और समाधान का आश्वासन
पुलिस और प्रशासन ने हस्तक्षेप करते हुए जीतू मुंडा को समझाया कि बैंक खाते से पैसे निकालने के लिए कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। अधिकारियों ने उसे आश्वासन दिया कि आवश्यक दस्तावेजों और प्रक्रिया के बाद उसे सहायता प्रदान की जाएगी।
इसके बाद स्थिति सामान्य हुई और पुलिस की मौजूदगी में शव के अवशेषों को पुनः कब्रिस्तान में दफना दिया गया।
पारिवारिक स्थिति और आर्थिक मजबूरी
जानकारी के अनुसार, यह मामला डियानाली गांव का है। जिस महिला का कंकाल बैंक लाया गया, वह जीतू मुंडा की बड़ी बहन कलारा मुंडा थी, जिनकी मृत्यु 26 जनवरी 2026 को हो चुकी थी।
कलारा मुंडा के बैंक खाते में नामांकित (nominee) उनके पति और बेटे की भी पहले ही मृत्यु हो चुकी थी। ऐसे में खाते का संभावित कानूनी उत्तराधिकारी केवल जीतू मुंडा ही था।
परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर बताई जा रही है और यह राशि उनके लिए जीवनयापन का महत्वपूर्ण साधन थी।
सिस्टम पर उठे सवाल
इस घटना ने ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में बैंकिंग प्रणाली की पहुंच और समझ पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि—
ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय साक्षरता की भारी कमी है
बैंकिंग प्रक्रियाएं कई बार आम लोगों के लिए जटिल हो जाती हैं
संवेदनशील मामलों में त्वरित सहायता की आवश्यकता होती है










