PAC रिपोर्ट में खुलासा! दिल्ली आबकारी नीति में अनियमितताओं से 2000 करोड़ रुपये का नुकसान

PAC रिपोर्ट में खुलासा: दिल्ली आबकारी नीति की अनियमितताओं से 2000 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान, Mनीष सिसोदिया के फैसलों पर सवाल उठे

PAC रिपोर्ट में दिल्ली की आबकारी नीति में हुई अनियमितताओं का खुलासा हुआ। नीति निर्माण और टेंडर प्रक्रिया में खामियों के कारण 2000 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय नुकसान हुआ। Mनीष सिसोदिया के कार्यकाल के फैसलों पर भी सवाल उठे।

New Delhi: लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee-PAC) की ताजा रिपोर्ट में दिल्ली की आबकारी नीति को लेकर कई गंभीर खुलासे किए गए हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि केजरीवाल सरकार के दौरान लागू की गई आबकारी नीतियों के कारण दिल्ली सरकार को 2000 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय नुकसान हुआ है। यह नुकसान नीति निर्माण और क्रियान्वयन में हुई गंभीर अनियमितताओं के कारण हुआ।

रिपोर्ट में कहा गया है कि तत्कालीन उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के कार्यकाल में कई ऐसे फैसले लिए गए, जो सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बिना थे। इसके अलावा, विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों की अनदेखी की गई और कई मामलों में लाइसेंस शुल्क जमा न करने वाले कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई में ढील बरती गई।

संदिग्ध फैसलों में हुई चूक

PAC की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि कुछ मामलों में लाइसेंस फीस में छूट या कमी दी गई। एयरपोर्ट जोन में Earnest Money Deposit (EMD) वापस कर दिए जाने से राजस्व को प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। इन फैसलों के चलते सरकार के खजाने को भारी नुकसान हुआ। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि टेंडर प्रक्रिया और नीति के क्रियान्वयन में नियमों का पालन नहीं किया गया।

विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के विपरीत निर्णय लेने और बिना कैबिनेट या उपराज्यपाल की मंजूरी के कई फैसले लिए गए। इन फैसलों ने नीति की प्रभावशीलता और वित्तीय स्थिरता पर गंभीर असर डाला।

राजस्व पर भारी असर

PAC की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आबकारी नीति के इन फैसलों के कारण दिल्ली सरकार को 2000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। इसके साथ ही, Comptroller and Auditor General (CAG) की ऑडिट रिपोर्ट ने भी इस हानि की पुष्टि की है।

रिपोर्ट में यह संकेत भी दिए गए कि नीति निर्माण में पारदर्शिता की कमी और प्रक्रिया के अनियमित पालन ने राजस्व घाटे को और बढ़ाया। नीति की खामियों और अनियमितताओं के कारण सरकार के वित्तीय संसाधनों का सही उपयोग नहीं हो सका।

कंपनियों के बीच संबंधों पर उठे सवाल

जांच में Indospirit और KhaoGali Restaurants Pvt. Ltd. के बीच शेयरहोल्डिंग और डायरेक्टर स्तर पर संबंध पाए गए। रिपोर्ट में कहा गया कि KhaoGali ने अपने शराब स्टॉक का 45.26% Indospirit से खरीदा। इससे थोक और खुदरा विक्रेताओं के बीच वर्टिकल इंटीग्रेशन के संकेत मिलते हैं। इस प्रकार के संबंधों ने बाजार में पारदर्शिता को प्रभावित किया और नीति के उद्देश्यों के विपरीत परिणाम दिए।

टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ियां

2021 की आबकारी नीति के तहत टेंडर प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए। PAC के अनुसार, 22 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 9 बोलीदाता अयोग्य पाए गए। इसके बावजूद बिना समुचित जांच के 17 खुदरा जोन आवंटित कर दिए गए। कई महत्वपूर्ण निर्णय बिना कैबिनेट या उपराज्यपाल की मंजूरी के लिए गए।

रिपोर्ट में कहा गया कि नीति निर्माण में आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया, जिससे सरकारी तंत्र और वित्तीय जवाबदेही पर सवाल उठते हैं।

नीति निर्माण में खामियां

PAC ने रिपोर्ट में बताया कि आबकारी नीति में बिना उचित कारण बदलाव किए गए। नियमों और प्रक्रियाओं की अनदेखी की गई और नीति को लागू करने की प्रक्रिया में कई चूक हुईं। इसके कारण नीति को 31 अगस्त 2022 तक वापस लेना पड़ा।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि नीति निर्माण में पारदर्शिता का अभाव था और कई महत्वपूर्ण निर्णयों में सरकारी तंत्र की भूमिका कमजोर रही। इसने नीति के उद्देश्य और प्रभावशीलता दोनों को प्रभावित किया।

पुरानी नीति में भी अनियमितताएं

PAC ने 2017-2021 के बीच लागू पुरानी आबकारी नीति की भी जांच की। इसमें कई अनियमितताओं का जिक्र है। लाइसेंस जारी करने में नियमों का उल्लंघन, IMFL की कीमतों में पारदर्शिता की कमी, गुणवत्ता नियंत्रण में ढिलाई और निगरानी एजेंसियों जैसे Excise Intelligence Bureau (EIB) और प्रवर्तन शाखा की विफलता प्रमुख हैं। इसके अलावा, ESCIMS प्रणाली का प्रभावी क्रियान्वयन भी नहीं हो सका। यह सभी खामियां नीति की दक्षता और सरकार के वित्तीय हितों को प्रभावित करती हैं।

आगे की कार्रवाई

यह मामला अदालत में लंबित है और CBI तथा ED द्वारा इसकी जांच जारी है। PAC ने अपनी सिफारिशों पर अंतिम निर्णय सदन के हवाले कर दिया है। रिपोर्ट CAG की ऑडिट, विभागीय जवाब और समिति के निष्कर्षों पर आधारित है। रिपोर्ट में 2017-18 से 2020-21 के बीच दिल्ली में शराब के विनियमन, लाइसेंसिंग, मूल्य निर्धारण और गुणवत्ता मानकों की विस्तृत समीक्षा की गई। इसमें नीति की खामियों, अनियमितताओं और वित्तीय हानि की पूरी तस्वीर सामने आई है।

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