पद्म श्री से सम्मानित शिक्षाविद और पूर्व राज्यपाल डी. वाई. पाटिल का निधन, 90 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

पद्म श्री से सम्मानित शिक्षाविद, समाजसेवी और पूर्व राज्यपाल D. Y. Patil का 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया। शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में उनके

प्रख्यात शिक्षाविद, समाजसेवी, पूर्व राज्यपाल और पद्मश्री सम्मानित डॉ. ज्ञानदेव यशवंतराव (डी. वाई.) पाटिल का निधन हो गया है। शिक्षा के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के कारण उन्हें देशभर में सम्मान की दृष्टि से देखा जाता था। 

नई दिल्ली: प्रख्यात शिक्षाविद, समाजसेवी, राजनेता और पूर्व राज्यपाल डॉ. ज्ञानदेव यशवंतराव (डी. वाई.) पाटिल का निधन हो गया है। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले डॉ. पाटिल ने 90 वर्ष की उम्र में महाराष्ट्र के कोल्हापुर स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उन्हें देश में शिक्षा के विस्तार और सामाजिक विकास में योगदान के लिए पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। डॉ. डी. वाई. पाटिल के निधन से शिक्षा, राजनीति और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर है। उनके योगदान को देशभर में लंबे समय तक याद किया जाएगा।

शिक्षा के क्षेत्र में बनाया बड़ा नेटवर्क

डॉ. डी. वाई. पाटिल को भारत में शिक्षा के विस्तार के लिए जाना जाता है। उन्होंने ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने का बड़ा अभियान चलाया। वे डी. वाई. पाटिल ग्रुप के संस्थापक थे। उनके नेतृत्व में देशभर में 182 से अधिक शैक्षणिक संस्थानों, सात विश्वविद्यालयों और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का बड़ा नेटवर्क तैयार हुआ।

उनके संस्थानों में मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, कृषि महाविद्यालय, विश्वविद्यालय और अन्य उच्च शिक्षा केंद्र शामिल हैं। उन्होंने शिक्षा को केवल शहरों तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि गांवों और छोटे शहरों तक पहुंचाने के लिए लगातार काम किया। डॉ. पाटिल ने भारत के अलावा जापान में भी विश्वविद्यालय की स्थापना कर भारतीय शिक्षा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया।

तीन राज्यों के राज्यपाल रहे डी. वाई. पाटिल

डॉ. डी. वाई. पाटिल ने संवैधानिक पदों पर भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। उन्होंने बिहार, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में अपनी सेवाएं दीं। राज्यपाल के रूप में उन्होंने प्रशासनिक जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया और अपने कार्यकाल के दौरान शिक्षा, सामाजिक विकास और जनहित से जुड़े मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया। इससे पहले वह महाराष्ट्र की राजनीति में भी सक्रिय रहे। कांग्रेस से जुड़े डॉ. पाटिल ने लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन में योगदान दिया।

साधारण किसान परिवार से राष्ट्रीय पहचान तक का सफर

22 अक्टूबर 1935 को जन्मे डॉ. डी. वाई. पाटिल का जीवन संघर्ष और उपलब्धियों की प्रेरणादायक कहानी रहा है। एक साधारण किसान परिवार से आने वाले डॉ. पाटिल ने अपनी मेहनत और दूरदृष्टि के बल पर शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा मुकाम हासिल किया। उन्होंने राजनीति में रहते हुए भी शिक्षा और स्वास्थ्य को अपनी प्राथमिकता बनाया। उनका मानना था कि समाज के विकास के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं सबसे जरूरी हैं।

डॉ. पाटिल ने सक्रिय राजनीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह वर्ष 1957 से 1962 तक कोल्हापुर के महापौर रहे। इसके बाद 1967 से 1972 तक महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य रहे। विधानसभा में उन्होंने आम लोगों की समस्याओं, बुनियादी सुविधाओं और जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। हालांकि, बाद के वर्षों में उन्होंने राजनीति की बजाय शिक्षा और सामाजिक सेवा को अपना मुख्य क्षेत्र बनाया। वर्ष 2018 में उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) की सदस्यता ली थी, लेकिन वह सक्रिय राजनीति से दूर रहे।

बुधवार को होगा अंतिम संस्कार

डॉ. डी. वाई. पाटिल के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए बुधवार सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक कोल्हापुर के कसबा बावड़ा स्थित 'यशवंत निवास' में रखा जाएगा। इसके बाद शाम 4 बजे उनकी अंतिम यात्रा निकाली जाएगी। उनका अंतिम संस्कार कोल्हापुर के लाइन बाजार स्थित डॉ. डी. वाई. पाटिल मेडिकल कॉलेज परिसर में किया जाएगा।

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