पाकिस्तान में मिडिल ईस्ट युद्ध और होर्मुज नाकेबंदी के कारण LPG की कीमतें तीसरी बार बढ़ाई गई हैं। घरेलू सिलेंडर अब 3,588 रुपये में मिलेगा, जिससे आम जनता और छोटे व्यवसायों पर गंभीर आर्थिक दबाव पड़ेगा।
Pakistan: मिडिल ईस्ट में युद्ध के चलते पाकिस्तान में ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है। अब पाकिस्तान सरकार ने घरेलू तरल गैस (LPG) की कीमतों में तीसरी बार इजाफा कर दिया है। ऑयल एंड गैस रेगुलेटरी अथॉरिटी (OGRA) की नोटिफिकेशन के अनुसार 11.8 किलोग्राम का घरेलू सिलेंडर अब 3,588.59 रुपये में उपलब्ध होगा। इससे पहले इसकी कीमत 2,664.88 रुपये थी, यानी इस बार 923.71 रुपये की बढ़ोतरी हुई है।
एलपीजी की इस बढ़ी हुई कीमत से आम नागरिकों की जेब पर भारी असर पड़ेगा। खासकर निम्न और मध्यम वर्ग के परिवारों को इसका सीधा आर्थिक दबाव झेलना होगा।
ईरान युद्ध और होर्मुज नाकेबंदी का असर
पाकिस्तान अपनी क्रूड ऑयल की 80 से 85 प्रतिशत जरूरत सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कुवैत जैसे खाड़ी देशों से पूरी करता है। ये तेल टैंकर होर्मुज स्ट्रेट से होकर कराची पहुंचते हैं। लेकिन ईरान युद्ध के बाद होर्मुज पर नाकेबंदी के कारण पाकिस्तान के लिए तेल आपूर्ति में बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।
नाकेबंदी के कारण तेल और गैस की सप्लाई बाधित हुई है, जिससे देश में ऊर्जा संकट और बढ़ गया है। यही वजह है कि पाकिस्तान ने लगातार LPG की कीमतों में वृद्धि करने का निर्णय लिया।
आर्थिक संकट और जनता पर प्रभाव
पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक मोर्चे पर जूझ रहा है। मुद्रा स्फीति, विदेशी मुद्रा का संकट और तेल की बढ़ती कीमतों ने वहां की आम जनता की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अब LPG की कीमतों में इजाफा आम लोगों के लिए अतिरिक्त बोझ बन गया है।

सरकार का फैसला
ईरान युद्ध शुरू होने के बाद पाकिस्तान सरकार ने कई कदम उठाए हैं। सरकारी कर्मचारियों का आधा स्टाफ वर्क फ्रॉम होम करने लगा है और दफ्तर अब हफ्ते में केवल चार दिन काम कर रहे हैं। स्कूलों को बंद कर ऑनलाइन मोड पर पढ़ाई जारी रखने का आदेश दिया गया। इन कदमों का मकसद ऊर्जा बचाना और तेल की सीमित आपूर्ति को अधिक समय तक चलाना है।
सरकार ने जनता को ऊर्जा की बचत के प्रति जागरूक करने के लिए कई अभियान भी शुरू किए हैं। इनमें बिजली और गैस के सीमित उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
पाकिस्तान का मध्यस्थता रोल
ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता करने की कोशिश कर रहा है। पाक अधिकारियों के अनुसार आने वाले कुछ ही दिनों में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडल के बीच इस्लामाबाद में बैठक हो सकती है।
यह बैठक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के खुलने, तेल की आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा के लिए अहम साबित हो सकती है। इस समय पाकिस्तान का यह मध्यस्थता रोल उसकी रणनीतिक और भू-राजनीतिक स्थिति को प्रभावित कर रहा है।
ऊर्जा संकट का दीर्घकालिक प्रभाव
विश्लेषकों का मानना है कि यदि मध्यस्थता से स्थिति जल्द नहीं सुधरी और होर्मुज स्ट्रेट पर नाकेबंदी जारी रही, तो पाकिस्तान में ऊर्जा संकट गहराता रहेगा। तेल और गैस की बढ़ती कीमतों के कारण घरेलू उद्योग प्रभावित होंगे और आर्थिक स्थिरता पर संकट मंडराएगा। साथ ही, आम जनता की रोजमर्रा की जिंदगी में कठिनाइयां बढ़ेंगी। खाना बनाने, वाहन ईंधन और उद्योगों की संचालन लागत में बढ़ोतरी होगी।









