महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज, उपचुनाव से पहले सुनेत्रा पवार की बड़े नेताओं से मुलाकात संभव

महाराष्ट्र उपचुनाव से पहले सियासत गरमाई। सुनेत्रा पवार के दिल्ली दौरे और बारामती-राहुरी सीटों पर रणनीति को लेकर सभी दल सक्रिय। जानिए पूरा समीकरण।

महाराष्ट्र उपचुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। सुनेत्रा पवार के दिल्ली दौरे और बारामती सीट पर निर्विरोध चुनाव की चर्चा के बीच सभी दल अपनी रणनीति मजबूत करने में जुटे हैं।

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र में दो विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव को लेकर राजनीति तेजी से गरमा गई है। बारामती और राहुरी सीटों पर 23 अप्रैल को संभावित मतदान से पहले सभी प्रमुख दल अपनी रणनीति मजबूत करने में जुट गए हैं। इस बीच Sunetra Pawar के दिल्ली दौरे की खबर ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। बताया जा रहा है कि वह दिल्ली में कई बड़े नेताओं से मुलाकात कर सकती हैं, जिससे इन उपचुनावों की दिशा और रणनीति पर असर पड़ सकता है।

बारामती सीट बनी प्रतिष्ठा की लड़ाई

बारामती सीट इस बार के उपचुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा में है। यह सीट लंबे समय से पवार परिवार और उनकी राजनीतिक विरासत से जुड़ी रही है। इस कारण यह चुनाव केवल एक सीट का नहीं बल्कि प्रतिष्ठा और भावनाओं से जुड़ा मुकाबला बन गया है।

एनसीपी के अजित पवार गुट की ओर से सुनेत्रा पवार को इस सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। यह फैसला पार्टी के लिए बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि बारामती को पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता है।

निर्विरोध चुनाव की मांग से बढ़ा तनाव

बारामती सीट को लेकर सबसे बड़ा मुद्दा निर्विरोध चुनाव कराने की मांग है। एनसीपी (अजित पवार गुट) की ओर से यह अपील की गई है कि दिवंगत नेता को सम्मान देने के लिए इस सीट पर चुनाव बिना मुकाबले के कराया जाए।

महाराष्ट्र की पुरानी राजनीतिक परंपराओं का हवाला देते हुए इस मांग को आगे बढ़ाया जा रहा है। खास बात यह है कि एनसीपी के शरद पवार गुट ने भी इस मांग का समर्थन किया है।

उनका कहना है कि वे इस सीट पर अपना उम्मीदवार नहीं उतारेंगे। इससे यह संकेत मिलता है कि बारामती में मुकाबला एकतरफा हो सकता है, हालांकि अंतिम स्थिति अभी साफ नहीं है।

राहुरी सीट पर भी बढ़ी राजनीतिक सक्रियता

बारामती के साथ-साथ राहुरी सीट पर भी सियासी हलचल तेज हो गई है। इस सीट पर बीजेपी ने दिवंगत नेता शिवाजीराव कार्डिले के बेटे अक्षय कार्डिले को उम्मीदवार बनाया है। यहां भी चुनाव भावनात्मक पहलू से जुड़ा हुआ है, क्योंकि उम्मीदवार का चयन पारिवारिक विरासत के आधार पर किया गया है। दूसरी ओर, विपक्षी दल भी इस सीट को लेकर अपनी रणनीति तय करने में जुटे हैं।

सूत्रों के मुताबिक, एनसीपी (शरद पवार गुट) की ओर से प्राजक्ता तनपुरे का नाम संभावित उम्मीदवार के रूप में सामने आ रहा है, हालांकि अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

कांग्रेस की रणनीति पर टिकी नजर

इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस की भूमिका भी अहम मानी जा रही है। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने संकेत दिया है कि अगर एनसीपी (शरद पवार गुट) इन सीटों पर चुनाव नहीं लड़ती है, तो कांग्रेस मैदान में उतर सकती है।

दिल्ली दौरे से बढ़ी सियासी चर्चा

सुनेत्रा पवार का दिल्ली दौरा इस समय सबसे ज्यादा चर्चा में है। खबर है कि वह Narendra Modi और Mallikarjun Kharge जैसे बड़े नेताओं से मुलाकात कर सकती हैं। इसके अलावा Amit Shah से भी उनकी मुलाकात की संभावना जताई जा रही है। इन संभावित बैठकों को लेकर राजनीतिक हलकों में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।

माना जा रहा है कि बारामती सीट को निर्विरोध कराने के मुद्दे पर इन बैठकों में चर्चा हो सकती है। अगर ऐसा होता है, तो यह एक बड़ा राजनीतिक फैसला साबित हो सकता है।

नामांकन से पहले तेज होगी गतिविधि

जानकारी के मुताबिक, सुनेत्रा पवार 6 अप्रैल को अपना नामांकन दाखिल कर सकती हैं। इससे पहले राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है। नामांकन की अंतिम तारीख भी 6 अप्रैल ही तय की गई है, ऐसे में सभी दल आखिरी समय तक अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में लगे हैं।

चुनाव कार्यक्रम पर एक नजर

इन उपचुनावों का पूरा कार्यक्रम पहले ही घोषित किया जा चुका है। नामांकन प्रक्रिया 30 मार्च से शुरू हो चुकी है और 6 अप्रैल तक चलेगी। इसके बाद 7 अप्रैल को नामांकन पत्रों की जांच होगी। उम्मीदवार 9 अप्रैल तक अपना नाम वापस ले सकते हैं। यदि मुकाबला होता है, तो 23 अप्रैल को मतदान कराया जाएगा और 4 मई को मतगणना होगी।

गठबंधन समीकरणों की बड़ी परीक्षा

इन दोनों सीटों पर होने वाले उपचुनाव केवल स्थानीय स्तर के चुनाव नहीं हैं, बल्कि यह महाराष्ट्र की राजनीति में गठबंधन समीकरणों की बड़ी परीक्षा भी माने जा रहे हैं। एनडीए और विपक्षी गठबंधनों के बीच यह मुकाबला आने वाले समय की राजनीति की दिशा तय कर सकता है। खासकर बारामती जैसी सीट पर परिणाम का असर दूर तक देखने को मिल सकता है।

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