Parali Pollution से बढ़ रहा High BP का खतरा, AIIMS-IIT Delhi स्टडी में बड़ा खुलासा

All India Institute of Medical Sciences और Indian Institute of Technology Delhi की स्टडी में पराली के धुएं और PM2.5 प्रदूषण को हाई BP के बढ़ते खतरेसे जोड़ा गया।

AIIMS और IIT Delhi की स्टडी में सामने आया है कि पराली के धुएं और PM2.5 प्रदूषण से हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ रहा है। ज्यादा प्रदूषित इलाकों में रहने वालों में हाइपरटेंशन का जोखिम अधिक पाया गया।

New Delhi: All India Institute of Medical Sciences और Indian Institute of Technology Delhi की संयुक्त स्टडी में पराली के धुएं और बढ़ते एयर पॉल्यूशन को हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ा पाया गया है। शोध के मुताबिक जिन इलाकों में बायोमास बर्निंग और PM2.5 प्रदूषण ज्यादा था, वहां रहने वाले लोगों में हाइपरटेंशन का खतरा सामान्य से अधिक दर्ज किया गया।

पराली के धुएं और हाई ब्लड प्रेशर के बीच मिला सीधा संबंध

All India Institute of Medical Sciences और Indian Institute of Technology Delhi की स्टडी में सामने आया है कि पराली जलाने से पैदा होने वाला धुआं केवल फेफड़ों ही नहीं बल्कि दिल और ब्लड प्रेशर पर भी गंभीर असर डाल रहा है।

शोध के अनुसार जिन क्षेत्रों में पराली जलाने की घटनाएं ज्यादा थीं, वहां रहने वाले लोगों में हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन का खतरा लगभग 15 प्रतिशत तक बढ़ा पाया गया। अध्ययन में यह भी सामने आया कि PM2.5 प्रदूषण में हर 10 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर की वृद्धि के साथ हाइपरटेंशन का जोखिम करीब 5 प्रतिशत तक बढ़ जाता है।

चार राज्यों के आंकड़ों का किया गया विश्लेषण

स्टडी में दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश और बिहार के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसके लिए 2015-16 के नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-4) के डेटा का इस्तेमाल किया गया।

एम्स के कार्डियोलॉजिस्ट Dr Ambuj Kumar के मुताबिक जिन लोगों ने पिछले 30 दिनों में 100 से ज्यादा फायर इवेंट वाले क्षेत्रों में धुएं का सामना किया, उनमें हाई ब्लड प्रेशर की संभावना सामान्य लोगों की तुलना में अधिक पाई गई।

अध्ययन में यह भी बताया गया कि हवा की दिशा में आने वाले डाउनविंड क्षेत्रों में रहने वाले लोगों पर प्रदूषण का असर ज्यादा गंभीर होता है। खासकर बुजुर्गों में सिस्टोलिक और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

बायोमास बर्निंग रोकने से आर्थिक फायदा भी संभव

शोधकर्ताओं का मानना है कि अगर बड़े स्तर पर बायोमास बर्निंग को नियंत्रित किया जाए तो इससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं कम हो सकती हैं। इसके साथ ही उत्तर भारत में अगले पांच वर्षों के दौरान अरबों डॉलर की आर्थिक बचत भी संभव है।

डॉक्टरों ने लोगों को प्रदूषण के दिनों में सावधानी बरतने, मास्क का इस्तेमाल करने और लंबे समय तक खुले प्रदूषित वातावरण में रहने से बचने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ता एयर पॉल्यूशन अब केवल पर्यावरण का नहीं बल्कि गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का रूप ले चुका है।

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