Parliament Monsoon Session 2026: आखिरी 4 दिन क्यों हैं बेहद अहम? महिला आरक्षण, परिसीमन और FCRA बिल पर बढ़ा सस्पेंस

Parliament Monsoon Session 2026: मानसून सत्र के आखिरी 4 दिन सरकार के लिए बेहद अहम हैं। महिला आरक्षण, परिसीमन और FCRA बिल को लेकर सियासी हलचल बढ़ी है।

संसद के मॉनसून सत्र के आखिरी चार दिन बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। कांग्रेस ने अपने सभी सांसदों के लिए व्हिप जारी कर सदन में उनकी मौजूदगी सुनिश्चित करने को कहा है, वहीं बीजेपी ने भी अपने सांसदों और NDA के सहयोगी दलों को सदन में उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं।

नई दिल्ली: संसद के मॉनसून सत्र के अंतिम चार दिन राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। सरकार और विपक्ष दोनों ने अपने सांसदों की सदन में मौजूदगी सुनिश्चित करने की तैयारी तेज कर दी है। कांग्रेस ने अपने सांसदों के लिए व्हिप जारी किया है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और NDA के सहयोगी दलों से भी सदन में उपस्थित रहने को कहा गया है।

इन तैयारियों के बीच महिला आरक्षण, परिसीमन (Delimitation) और FCRA संशोधन बिल को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि सरकार ने अभी तक इन विधेयकों को अंतिम दिनों में पेश करने की कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन राजनीतिक बैठकों और विभिन्न दलों के साथ बातचीत ने संभावित बड़े विधायी कदमों को लेकर चर्चा बढ़ा दी है।

आखिरी दिनों में बड़े बिल आने की संभावना

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू पहले ही संकेत दे चुके हैं कि महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयक सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल हैं। उन्होंने कहा है कि ये विधेयक लाए जाएंगे, लेकिन इन्हें कब सदन में पेश किया जाएगा और कब पारित कराया जाएगा, इसकी जानकारी उचित समय पर दी जाएगी।

इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सांसदों के साथ बैठक और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से मुलाकात ने राजनीतिक गतिविधियों को और बढ़ा दिया है। विपक्ष को आशंका है कि सरकार सत्र के आखिरी दिनों में अचानक किसी महत्वपूर्ण विधेयक को सदन में ला सकती है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी विपक्षी दलों से अपने सांसदों की उपस्थिति सुनिश्चित करने की अपील की है।

पहले FCRA संशोधन बिल पर नजर

संभावित विधायी एजेंडे में FCRA संशोधन बिल को लेकर भी खास चर्चा है। Foreign Contribution Regulation Act यानी FCRA से जुड़े बदलावों का असर विदेशी फंड प्राप्त करने वाली संस्थाओं पर पड़ सकता है। परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संवैधानिक बदलावों के मुकाबले FCRA विधेयक को पारित करने के लिए साधारण बहुमत पर्याप्त हो सकता है। इसी वजह से राजनीतिक हलकों में यह अनुमान लगाया जा रहा है कि सरकार पहले FCRA से संबंधित विधेयक पर आगे बढ़ सकती है।

हालांकि प्रस्तावित बदलावों को लेकर विरोध भी सामने आया है। चर्च और कुछ ईसाई संगठनों से जुड़े प्रतिनिधियों ने सरकार के सामने अपनी चिंताएं रखी हैं। DMK सांसद पी. विल्सन के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल ने भी कथित विवादित प्रावधानों को हटाने या विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने की मांग की है।

DMK के रुख पर सरकार की नजर

परिसीमन विधेयक को लेकर सरकार के लिए क्षेत्रीय दलों का समर्थन महत्वपूर्ण हो सकता है। इसी क्रम में DMK के रुख पर विशेष नजर है। रिपोर्टों के अनुसार, परिसीमन को लेकर सरकार और DMK के बीच बातचीत चल रही है। DMK की प्रमुख चिंताओं में लोकसभा सीटों के पुनर्विन्यास का राज्यों पर संभावित प्रभाव शामिल है। पार्टी की ओर से सीटों के पुनर्वितरण को लेकर कई मांगें सामने रखी गई हैं। इनमें जनसंख्या के आधार पर सीटों में बदलाव के प्रभाव को सीमित करना और राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व में संतुलन बनाए रखना शामिल है।

DMK का तर्क है कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन किया है, उन्हें परिसीमन के बाद राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मामले में नुकसान नहीं होना चाहिए।

YSR कांग्रेस से भी संपर्क

परिसीमन के मुद्दे पर YSR कांग्रेस के नेताओं की गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात को भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि बैठक का आधिकारिक एजेंडा अन्य मुद्दों से जुड़ा बताया गया, लेकिन परिसीमन को लेकर भी चर्चा होने की अटकलें हैं। पार्टी के सांसद जी. बाबू राव ने कहा कि परिसीमन एक संवैधानिक प्रक्रिया है और सरकार से उम्मीद है कि वह पर्याप्त समर्थन सुनिश्चित करने के बाद ही संबंधित विधेयक संसद में पेश करेगी।

महिला आरक्षण और परिसीमन क्यों महत्वपूर्ण?

महिला आरक्षण और परिसीमन दोनों ही भारतीय राजनीति में व्यापक प्रभाव डालने वाले मुद्दे हैं। परिसीमन के जरिए लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं तथा प्रतिनिधित्व का पुनर्निर्धारण किया जाता है। वहीं महिला आरक्षण से संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए प्रतिनिधित्व बढ़ाने का प्रस्ताव जुड़ा है। इन मुद्दों पर राजनीतिक सहमति बनाना सरकार के लिए महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि इनके संभावित प्रभाव केवल मौजूदा संसद तक सीमित नहीं रहेंगे।

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