Mayawati on EVM: मायावती ने बैलेट पेपर की मांग दोहराई, अखिलेश यादव और राहुल गांधी के मुद्दे का किया समर्थन

Mayawati on EVM: बसपा प्रमुख मायावती ने ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग दोहराई। उन्होंने अखिलेश यादव और राहुल गांधी की ओर से उठाए जा रहे इस

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के ईवीएम के खिलाफ तथा बैलेट पेपर के समर्थन में दिए गए विचारों का समर्थन किया है।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी EVM को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और मतदाता के वोट की विश्वसनीयता पर जोर देते हुए बैलेट पेपर से मतदान की मांग दोहराई है। 

लखनऊ में 28 सितंबर को प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि चुनाव की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जिसमें मतदाता को यह भरोसा रहे कि उसका वोट उसी उम्मीदवार को मिला है, जिसे उसने चुना है। उनके मुताबिक, चुनावी प्रक्रिया को लेकर किसी तरह का संदेह लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों के विश्वास को प्रभावित कर सकता है।

मायावती का यह बयान समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से EVM को लेकर उठाए जा रहे सवालों के बीच आया है। अखिलेश यादव लंबे समय से बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं। मई 2026 में उन्होंने लखनऊ में कहा था कि उनकी पार्टी EVM हटाने और बैलेट पेपर की व्यवस्था वापस लाने की मांग जारी रखेगी।

मायावती ने क्या कहा?

मायावती ने कहा कि चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से कराया जाना जरूरी है और मतदाता के वोट को लेकर किसी तरह का संदेह नहीं होना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि BSP पहले से ही EVM के इस्तेमाल का विरोध करती रही है और उसकी मांग है कि चुनाव में बैलेट पेपर की व्यवस्था पर वापस विचार किया जाए।

उन्होंने अपने बयान में कांग्रेस और बीजेपी दोनों के पुराने रुख का भी उल्लेख किया। मायावती के अनुसार, देश में EVM के व्यापक इस्तेमाल से पहले लंबे समय तक बैलेट पेपर के जरिए मतदान होता था। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस केंद्र में सत्ता में थी, तब बीजेपी की ओर से भी EVM को लेकर सवाल उठाए गए थे। अब बीजेपी के सत्ता में होने के बावजूद EVM व्यवस्था जारी है। ये टिप्पणियां मायावती का राजनीतिक आकलन हैं।

अखिलेश यादव भी कर चुके हैं बैलेट पेपर की मांग

EVM और चुनाव प्रक्रिया को लेकर अखिलेश यादव का रुख हाल के महीनों में कई बार सामने आया है। मई 2026 में उन्होंने बैलेट पेपर के जरिए मतदान कराने की मांग करते हुए कहा था कि उनकी पार्टी EVM हटाने के मुद्दे पर आगे भी काम करती रहेगी। उन्होंने उत्तर प्रदेश की चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर भी आरोप लगाए थे। उनके ये आरोप राजनीतिक दावे हैं और संबंधित चुनाव प्राधिकरण की ओर से उनके सभी आरोपों की पुष्टि नहीं की गई है।

सितंबर 2026 में भी अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता से जुड़े मुद्दे सार्वजनिक रूप से उठाए हैं।

EVM और VVPAT को लेकर चुनाव आयोग का क्या कहना है?

भारत में चुनाव आयोग EVM के साथ VVPAT यानी Voter Verifiable Paper Audit Trail का इस्तेमाल करता है। आयोग के आधिकारिक विवरण के मुताबिक, वोट डालने के बाद VVPAT में उम्मीदवार का क्रमांक, नाम और चुनाव चिह्न वाली एक पर्ची करीब सात सेकंड तक मतदाता को दिखाई देती है। इसके बाद पर्ची सीलबंद बॉक्स में चली जाती है।

चुनाव आयोग के मुताबिक EVM और VVPAT स्टैंडअलोन सिस्टम हैं और बाहरी नेटवर्क से जुड़े नहीं होते। आयोग यह भी बताता है कि चुनाव से पहले मशीनों की जांच, मॉक पोल और अन्य निर्धारित प्रक्रियाएं राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में की जाती हैं। आयोग की मौजूदा व्यवस्था में कुछ चयनित मतदान केंद्रों पर VVPAT पर्चियों का अनिवार्य सत्यापन भी किया जाता है। 

आयोग के FAQ के अनुसार, लोकसभा चुनाव में प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र या विधानसभा खंड से पांच यादृच्छिक मतदान केंद्रों की VVPAT पर्चियों का सत्यापन अनिवार्य है।

उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक सक्रियता

मायावती का EVM पर ताजा बयान ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दल अपनी रणनीति तेज कर रहे हैं। BSP ने हाल में देशभर में अपने संगठन को नए तरीके से व्यवस्थित करने की प्रक्रिया भी शुरू की है। मायावती ने पार्टी संगठन को मजबूत करने और आगामी चुनावों की तैयारी पर जोर दिया है।

हालांकि, मायावती ने 2026 की शुरुआत में BSP को सभी चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ाने की बात कही थी और किसी दल के साथ गठबंधन नहीं करने का रुख बताया था।

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