उत्तर प्रदेश में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन सोमवार को भी जारी रहा। कांग्रेस के प्रदेशव्यापी प्रदर्शन के तहत वाराणसी में पार्टी कार्यकर्ताओं ने जुलूस निकालकर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने पोस्टर पर जूते-चप्पल मारे और महिलाओं ने हाथों में चूड़ियां लेकर अपना विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस की ओर से यह प्रदर्शन चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़े मुद्दों को लेकर किया जा रहा है।
वाराणसी में हुए प्रदर्शन की तस्वीरों और वीडियो में कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भीड़ सड़क पर नजर आई। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपनी मांगें उठाईं। महिलाओं का एक समूह हाथों में चूड़ियां लेकर प्रदर्शन में पहुंचा। प्रदर्शन के दौरान ज्ञानेश कुमार के पोस्टर का इस्तेमाल करते हुए कार्यकर्ताओं ने अपना विरोध जताया। पोस्टर पर जूते-चप्पल मारने की घटना भी प्रदर्शन का हिस्सा रही। कांग्रेस का कहना है कि वह मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को लेकर लगातार अपनी आवाज उठा रही है।
यह प्रदर्शन ऐसे समय हुआ है जब कांग्रेस ने 28 सितंबर को देशभर में जिला स्तर पर विरोध प्रदर्शन का कार्यक्रम घोषित किया था। उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने भी सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करने की घोषणा की थी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने इससे पहले कहा था कि पार्टी आलाकमान के निर्देश पर सोमवार को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन किया जाएगा। कांग्रेस की ओर से प्रदर्शन के दौरान ज्ञापन सौंपने और अपनी मांगें प्रशासन के सामने रखने की बात कही गई थी।
कांग्रेस के इस अभियान का केंद्र मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े मुद्दे हैं। पार्टी ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, उनके खिलाफ कार्रवाई और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े फैसलों की समीक्षा की मांग उठाई है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर लोगों के सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए। हालांकि, कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोप राजनीतिक दावे हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता।
विवाद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का उत्तर प्रदेश दौरा भी स्थगित हो चुका है। उनका 25 सितंबर को मेरठ और 28 सितंबर को वाराणसी जाने का कार्यक्रम प्रस्तावित था। वाराणसी में उन्हें जेन-जी युवाओं के साथ संवाद करना था। इस कार्यक्रम में युवाओं को निर्वाचन प्रक्रिया, डिजिटल माध्यमों और मतदाता सेवाओं से संबंधित जानकारी देने की योजना थी। बाद में दोनों कार्यक्रम स्थगित कर दिए गए। चुनाव आयोग ने कार्यक्रम स्थगित किए जाने का कारण सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किया था।
ज्ञानेश कुमार के यूपी दौरे का कार्यक्रम ऐसे समय टला, जब चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेद और SIR को लेकर राजनीतिक विवाद चल रहा था। कुछ रिपोर्टों में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से पिछले महीनों में आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर लिखित आपत्तियां दर्ज किए जाने का उल्लेख किया गया। विपक्षी दलों ने इन रिपोर्टों को आधार बनाकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर निर्वाचन आयोग की ओर से कहा गया है कि बहुसदस्यीय आयोग में विचारों में अंतर होना निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है और अंतिम निर्णय सामूहिक प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं।
कांग्रेस ने इसी मुद्दे को लेकर पहले भी अलग-अलग शहरों में प्रदर्शन किए हैं। 25 सितंबर को भी पार्टी ने राज्य और जिला स्तर पर चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध मार्च का आयोजन किया था। लखनऊ में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय के नेतृत्व में कार्यकर्ता प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय की ओर बढ़े थे। पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोकने की कोशिश की थी, जिसके बाद कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच नोकझोंक हुई थी। अजय राय समेत कई कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लेकर इको गार्डन भेजा था।
कांग्रेस के मुताबिक, मौजूदा विरोध का एक प्रमुख मुद्दा मतदाता सूची में कथित बदलाव और SIR की प्रक्रिया है। पार्टी का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है और मतदाताओं को यह जानकारी मिलनी चाहिए कि सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया किस तरह चल रही है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और उनके कार्यकाल में लिए गए फैसलों की समीक्षा की मांग भी उठाई है। 25 सितंबर को कांग्रेस ने राज्य चुनाव आयोग कार्यालयों तक विरोध मार्च का आह्वान किया था और 28 सितंबर को जिला स्तर पर प्रदर्शन की घोषणा की थी।
वाराणसी में हुए प्रदर्शन के दौरान महिलाओं का चूड़ियां लेकर पहुंचना भी चर्चा में रहा। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इसे अपने विरोध प्रदर्शन का प्रतीकात्मक तरीका बताया। वहीं पोस्टर पर जूते-चप्पल मारकर कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ नाराजगी जताई। ऐसे प्रदर्शनों के दौरान राजनीतिक दल आम तौर पर प्रतीकात्मक तरीकों का इस्तेमाल करके अपनी मांगों और विरोध को सार्वजनिक रूप से सामने रखते हैं।
देशभर में चल रहे इस विरोध अभियान के बीच चुनाव आयोग की ओर से SIR और आयोग के भीतर निर्णय प्रक्रिया को लेकर अलग रुख सामने आया है। आयोग से जुड़े अधिकारियों ने कहा है कि तीनों चुनाव आयुक्तों की सामूहिक प्रक्रिया के तहत फैसले लिए जाते हैं। दूसरी तरफ कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इन मुद्दों को लेकर सवाल उठा रहे हैं। इस वजह से चुनाव आयोग और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हुई है।
वाराणसी में कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान स्थानीय स्तर पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जुटे। जुलूस और नारेबाजी के बीच पार्टी ने प्रशासन के सामने अपनी मांगें रखने की कोशिश की। प्रदेश कांग्रेस के घोषित कार्यक्रम के अनुसार जिला स्तर के प्रदर्शनों का उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को उठाना है। कांग्रेस नेताओं ने कहा है कि उनका अभियान आगे भी जारी रहेगा।
इस पूरे घटनाक्रम का संबंध आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची और निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर चल रही राजनीतिक बहस से भी जुड़ा है। कांग्रेस लगातार SIR और मतदाता सूची में बदलाव के मुद्दे को उठा रही है, जबकि चुनाव आयोग अपनी निर्णय प्रक्रिया और निर्वाचन संबंधी कार्यों को लेकर अपना पक्ष रख रहा है। ऐसे में वाराणसी का प्रदर्शन इस व्यापक राजनीतिक विवाद की एक कड़ी के रूप में सामने आया है।
फिलहाल कांग्रेस की ओर से प्रदेश के अलग-अलग जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन जारी रखने की बात कही गई है। वाराणसी में पोस्टर, जूते-चप्पल और चूड़ियों के जरिए किया गया विरोध प्रदर्शन इसी अभियान का हिस्सा रहा। दूसरी ओर मुख्य चुनाव आयुक्त का वाराणसी में प्रस्तावित जेन-जी संवाद कार्यक्रम पहले ही स्थगित हो चुका है। अब चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों के बीच SIR, मतदाता सूची और निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों पर आगे की स्थिति पर नजर बनी हुई है।











