संजय राउत ने महाराष्ट्र CM देवेंद्र फडणवीस की राहुल गांधी पर टिप्पणी का जवाब देते हुए CEC ज्ञानेश कुमार के बचाव पर सवाल उठाए। राउत ने SIR, चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और मतदाता सूची से जुड़े विपक्ष के आरोपों को लेकर सरकार पर निशाना साधा।
मुंबई: शिवसेना (UBT) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की राहुल गांधी पर की गई टिप्पणी को लेकर उन पर तीखा पलटवार किया है। फडणवीस ने रविवार को राहुल गांधी के चुनाव आयोग और वोटर लिस्ट से जुड़े आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि “राहुल गांधी का दिमाग चोरी हो गया है।” सोमवार को राउत ने सवाल उठाया कि वास्तव में मानसिक संतुलन किसने खोया है और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार का बचाव करने के बजाय विपक्ष द्वारा उठाए गए मूल सवालों पर जवाब क्यों नहीं दे रहे हैं।
राहुल गांधी के आरोपों पर फडणवीस की टिप्पणी
फडणवीस ने रविवार को महाराष्ट्र में चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर राहुल गांधी के आरोपों को खारिज किया था। उन्होंने कहा था कि कोई वोट चोरी नहीं हुआ और राहुल गांधी का “दिमाग चोरी” हो गया है। फडणवीस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राहुल गांधी का दिमाग वापस लाने के लिए एक समिति बनाने की बात भी कही।
फडणवीस ने विपक्ष पर संवैधानिक संस्थाओं के प्रति जनता का भरोसा कमजोर करने और अराजकता पैदा करने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया था। उन्होंने SIR से जुड़े आरोपों को निराधार बताया।
इसी बयान के जवाब में राउत ने चुनाव आयोग की भूमिका और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सवाल उठाए।
‘CEC का बचाव क्यों कर रहे हैं?’
राउत ने पूछा कि फडणवीस ज्ञानेश कुमार का बचाव क्यों कर रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए सवाल किया कि क्या चुनाव आयोग ने फडणवीस को अपना वकील नियुक्त किया है।
राउत ने कहा कि राजनीतिक बहस को इस बात तक सीमित करने के बजाय कि किसने अपना “दिमाग” खोया है, चुनावी प्रक्रिया से जुड़े वास्तविक सवालों पर चर्चा होनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देने के बजाय सत्तारूढ़ दल के नेता CEC के बचाव में सामने आ रहे हैं। राउत ने इसे चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को लेकर उठ रहे सवालों से जोड़ते हुए आरोप लगाया कि निर्वाचन संस्था पर राजनीतिक प्रभाव बढ़ रहा है।
हालांकि, चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ पक्ष ने विपक्ष के इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। हालिया विवाद के बीच चुनाव आयोग ने अपने तीनों सदस्यों के बीच मतभेद की खबरों के संदर्भ में संयुक्त बयान भी जारी किया था।
चुनाव आयोग में मतभेद की खबरों का जिक्र
राउत ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव आयोग को लेकर सवाल केवल राहुल गांधी नहीं उठा रहे हैं। उन्होंने आयोग के भीतर कथित मतभेद और प्रक्रिया से जुड़े विवादों की रिपोर्टों का उल्लेख किया।
हाल में चुनाव आयोग के भीतर CEC ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच कथित मतभेदों को लेकर रिपोर्टें सामने आई थीं। इसके बाद राजनीतिक विवाद तेज हुआ। आयोग ने अपने संयुक्त बयान में इन रिपोर्टों के बीच संस्थागत एकजुटता का संदेश दिया।
राहुल गांधी ने भी चुनाव आयोग के भीतर कथित असहमति का मुद्दा उठाते हुए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी। उन्होंने SIR और चुनावी प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।
तीन सदस्यीय आयोग की तुलना महाराष्ट्र सरकार से
राउत ने चुनाव आयोग के तीन सदस्यों के बीच कथित मतभेद की तुलना महाराष्ट्र के सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं से करते हुए राजनीतिक टिप्पणी की।
उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयुक्त सार्वजनिक रूप से एक साथ नजर आते हैं, लेकिन उनके बीच गंभीर मतभेद हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बीच सार्वजनिक रूप से साथ दिखने को लेकर भी तुलना की।
राउत की यह टिप्पणी उनके राजनीतिक आरोपों का हिस्सा है। चुनाव आयोग ने अपने संयुक्त बयान के जरिए संस्था के भीतर एकजुटता का संदेश दिया है।
CEC की सुरक्षा को लेकर भी आरोप
राउत ने आगे आरोप लगाया कि राज्य और केंद्र की सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ होने वाले विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए किया जा रहा है।
उन्होंने दावा किया कि सरकार के लिए ज्ञानेश कुमार का संरक्षण राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो गया है। राउत ने CEC पर चुनावी प्रक्रिया में हेरफेर के लिए इस्तेमाल किए जाने का आरोप लगाया और उनके पद से हटने की मांग दोहराई।
इससे पहले भी राउत ने ज्ञानेश कुमार को लेकर कड़े बयान दिए हैं। सितंबर में उन्होंने CEC के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कहा था कि ज्ञानेश कुमार को पद छोड़ना होगा।
हालांकि, ये राउत और विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोप हैं। इन्हें स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता जब तक संबंधित जांच या आधिकारिक प्रक्रिया से इनकी पुष्टि न हो।
महाराष्ट्र में 28 सितंबर को कांग्रेस का प्रदर्शन
CEC और SIR को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच महाराष्ट्र कांग्रेस ने 28 सितंबर को राज्यभर में प्रदर्शन करने की घोषणा की थी। पार्टी ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की और SIR के दौरान मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने तथा 2024 महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची में नए नाम जोड़े जाने के आरोप लगाए।
कांग्रेस का कहना है कि राहुल गांधी द्वारा उठाए गए “वोट चोरी” के सवालों को इन घटनाक्रमों से समर्थन मिला है। दूसरी ओर, भाजपा और सरकार विपक्ष के आरोपों को खारिज करते रहे हैं।
इस तरह महाराष्ट्र में SIR और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर राजनीतिक टकराव लगातार बढ़ रहा है।
चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर विपक्ष के सवाल
राउत ने चुनाव आयोग की संवैधानिक स्वतंत्रता को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि निर्वाचन संस्था राजनीतिक दबाव में काम कर रही है।
विपक्ष की ओर से चुनाव आयोग के कामकाज, SIR और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं, भाजपा नेताओं और सरकार की ओर से इन आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित और तथ्यहीन बताया गया है।
ऐसे में विवाद का एक प्रमुख हिस्सा यह है कि मतदाता सूची में बदलाव और SIR की प्रक्रिया को किस तरह लागू किया गया तथा उस पर आपत्तियों और शिकायतों का निपटारा किस प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है।
सूखे के मुद्दे पर भी फडणवीस को घेरा
राउत ने चुनाव आयोग के मुद्दे के अलावा महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति को लेकर भी मुख्यमंत्री फडणवीस पर निशाना साधा।
उन्होंने गंभीर आर्थिक और सामाजिक दबाव के बीच आम नागरिकों से व्यक्तिगत खर्च कम करने की सलाह दिए जाने पर सवाल उठाया। राउत ने कहा कि सरकार को आम लोगों पर खर्च घटाने की सलाह देने के बजाय अपने राजनीतिक सहयोगियों और प्रशासन में भ्रष्टाचार के आरोपों पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने दावा किया कि यदि सरकार अपने प्रशासन में कथित भ्रष्टाचार को नियंत्रित करने की दिशा में कदम उठाती, तो वह मुख्यमंत्री के कामकाज की सराहना करते।
ये टिप्पणियां राउत की राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा हैं और उनके द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस बयान में नहीं की गई है।
चुनावी विवाद में बढ़ती राजनीतिक बयानबाजी
CEC ज्ञानेश कुमार, SIR और मतदाता सूची को लेकर महाराष्ट्र समेत राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बहस तेज है। राहुल गांधी और विपक्षी दल चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठा रहे हैं, जबकि भाजपा और सरकार इन आरोपों को खारिज कर रही है।
इसी राजनीतिक टकराव के बीच फडणवीस की राहुल गांधी पर टिप्पणी और उसके बाद राउत का जवाब सामने आया है। राउत ने बहस को व्यक्तिगत टिप्पणियों से हटाकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और चुनावी प्रक्रिया पर केंद्रित करने की मांग की है।
फिलहाल SIR, मतदाता सूची और चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली से जुड़े आरोपों पर राजनीतिक दावे और आधिकारिक पक्ष अलग-अलग हैं। ऐसे मामलों में अंतिम निष्कर्ष संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड, जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही तय होंगे।












