सुप्रीम कोर्ट ने 2,000 रुपये से अधिक के UPI पेमेंट पर कारोबारियों से MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) वसूले जाने के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।
नई दिल्ली: भारत में डिजिटल पेमेंट को लेकर एक अहम मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। 2,000 रुपये से अधिक के कुछ UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत Merchant Discount Rate यानी MDR लागू करने के केंद्र के फैसले को चुनौती दी गई है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल नई व्यवस्था पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है। साथ ही अदालत ने केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और UPI स्टीयरिंग कमेटी को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह में जवाब मांगा है।
इस घटनाक्रम का महत्व इसलिए भी है क्योंकि UPI भारत में डिजिटल भुगतान का सबसे व्यापक माध्यम बन चुका है। NPCI के आंकड़ों के मुताबिक अगस्त 2026 में UPI पर करीब 24.51 अरब लेनदेन हुए, जिनकी कुल वैल्यू लगभग 29.82 लाख करोड़ रुपये रही।
क्या है UPI MDR का पूरा मामला?
केंद्र की नई व्यवस्था के तहत 2,000 रुपये से अधिक के कुछ Person-to-Merchant (P2M) UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू किया जाना है। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होने की बात कही गई है। वहीं 2,000 रुपये तक के संबंधित UPI भुगतान पर MDR नहीं लगाने की व्यवस्था है। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह प्रस्ताव सीधे हर UPI ग्राहक से अलग से चार्ज वसूलने की व्यवस्था नहीं बताता। MDR मुख्य रूप से मर्चेंट से जुड़े भुगतान ढांचे में लगने वाला शुल्क है, जिसका संबंध बैंक, भुगतान सेवा प्रदाता और अन्य संबंधित पक्षों की सेवाओं से होता है।
सुप्रीम कोर्ट में किस बात को चुनौती दी गई?

इस नई व्यवस्था के खिलाफ अधिवक्ता अंजन दत्ता की ओर से याचिका दायर की गई है। याचिका में केंद्र की सितंबर में जारी अधिसूचना और इसके बाद सामने आए MDR फ्रेमवर्क की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता की दलील है कि इस तरह का शुल्क लागू करने के लिए पर्याप्त कानूनी आधार मौजूद नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस व्यवस्था पर अंतरिम रोक नहीं लगाई है। अदालत ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है, जिसके बाद मामले में आगे की सुनवाई और कानूनी स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है।
MDR क्या होता है?
Merchant Discount Rate यानी MDR वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के लिए मर्चेंट से जुड़े भुगतान इकोसिस्टम में लिया जाता है। इसमें भुगतान को प्रोसेस करने वाले विभिन्न पक्षों की भूमिका होती है। सामान्य तौर पर इसमें बैंक, पेमेंट नेटवर्क और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर जैसे पक्ष शामिल हो सकते हैं।
यही वजह है कि UPI MDR को केवल ग्राहक से वसूली जाने वाली सामान्य 'पेमेंट फीस' समझना सही नहीं होगा। मौजूदा विवाद में एक प्रमुख कानूनी सवाल यह भी है कि प्रस्तावित MDR की प्रकृति क्या है और इसे लागू करने का वैधानिक आधार क्या है।
ग्राहकों पर क्या पड़ेगा असर?
नई व्यवस्था के अनुसार 2,000 रुपये से अधिक के पात्र मर्चेंट UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होना है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक इसका उद्देश्य सीधे ग्राहक से अलग शुल्क लेना नहीं है। सामान्य व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P UPI भुगतान इस व्यवस्था के दायरे में नहीं है। इसका वास्तविक प्रभाव कारोबारियों के भुगतान खर्च और डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम की लागत संरचना पर पड़ सकता है। छोटे और बड़े कारोबारियों के लिए इसका असर उनके लेनदेन के आकार और भुगतान के तरीके पर निर्भर करेगा।











