झारखंड की बेकन फैक्ट्री को मिलेगा नया जीवन आधुनिक तकनीक से फिर शुरू करने की तैयारी

रांची की वर्षों से बंद बेकन फैक्ट्री को आधुनिक तकनीक के साथ दोबारा शुरू करने की तैयारी है। मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने भविष्य की योजना बताई है।
झारखंड की बेकन फैक्ट्री को मिलेगा नया जीवन आधुनिक तकनीक से फिर शुरू करने की तैयारी
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झारखंड की राजधानी रांची के कांके स्थित वर्षों पुरानी सरकारी बेकन फैक्ट्री को फिर से शुरू करने की उम्मीद अब मजबूत होती दिखाई दे रही है। लंबे समय से बंद पड़ी इस फैक्ट्री को आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रसंस्करण व्यवस्था के साथ दोबारा उपयोग में लाने की योजना पर काम किया जा रहा है। कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने फैक्ट्री को नए स्वरूप में विकसित करने को लेकर भविष्य की योजना बताई है। सरकार की कोशिश है कि पुराने ढांचे को केवल दोबारा शुरू करने के बजाय इसे आधुनिक मीट प्रोसेसिंग और पशुपालन से जुड़े किसानों के लिए उपयोगी व्यवस्था के रूप में विकसित किया जाए।

कांके की यह बेकन फैक्ट्री लंबे समय से बंद है। राज्य के पशुपालन विभाग की जानकारी के अनुसार पहले से स्थापित सरकारी बेकन फैक्ट्री फिलहाल उपयोग के लायक नहीं है और इसके पुनरुद्धार तथा संचालन के लिए विभागीय स्तर पर प्रक्रिया चलती रही है। विभाग ने इसके लिए संक्षिप्त डीपीआर भी तैयार किया था। सरकारी दस्तावेजों में फैक्ट्री को दोबारा शुरू कर राजस्व सृजन के उद्देश्य से इस्तेमाल करने की योजना का उल्लेख किया गया है।

फैक्ट्री को पुनर्जीवित करने की योजना में आधुनिक तकनीक की भूमिका अहम मानी जा रही है। इसी सिलसिले में मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने हैदराबाद स्थित ICAR-National Meat Research Institute का दौरा किया था। वहां उन्होंने मीट प्रोसेसिंग प्लांट, मॉडल स्लॉटरहाउस, रेंडरिंग-कम-पेट फूड प्लांट और सेमी-ऑटोमेटिक पोल्ट्री प्रोसेसिंग यूनिट जैसी सुविधाओं को देखा। इस दौरान मीट प्रोसेसिंग, पशुपालन और तकनीक से जुड़े विषयों पर अधिकारियों के साथ चर्चा हुई।

मंत्री ने इस संस्थान की तकनीकी विशेषज्ञता और अनुभव को झारखंड में इस्तेमाल करने की संभावना पर जोर दिया है। सरकार की योजना में नेशनल मीट रिसर्च इंस्टीट्यूट को तकनीकी या ज्ञान सहयोगी के तौर पर जोड़ने की बात सामने आई है। इसका उद्देश्य यह है कि वर्षों से बंद फैक्ट्री को पुराने तरीके से चलाने के बजाय वर्तमान समय की जरूरतों और तकनीकी मानकों के अनुरूप विकसित किया जा सके।

बेकन फैक्ट्री के दोबारा शुरू होने का सीधा संबंध झारखंड के पशुपालकों और खासकर सूअर पालन करने वाले किसानों से भी जोड़ा जा रहा है। मंत्री ने पहले भी कहा है कि फैक्ट्री के शुरू होने से राज्य के पिग फार्मर्स को बाजार उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। अगर स्थानीय स्तर पर पशुपालकों को उनके उत्पाद के लिए व्यवस्थित बाजार और प्रोसेसिंग की सुविधा मिलती है, तो इससे पशुपालन आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।

इस फैक्ट्री का पुराना इतिहास भी काफी महत्वपूर्ण रहा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार कांके स्थित बेकन फैक्ट्री वर्ष 1996 से बंद है। कभी यहां सूअर के मांस से तैयार कई तरह के रेडी-टू-ईट उत्पाद बनाए जाते थे और उन्हें ‘Ranbeck’ ब्रांड के नाम से बाजार में उतारा जाता था। रिपोर्टों में इसे अपने दौर की प्रमुख फैक्ट्रियों में गिना गया है। लंबे समय तक बंद रहने के कारण परिसर और मशीनरी की स्थिति प्रभावित हुई है, इसलिए इसे दोबारा शुरू करने से पहले आधारभूत ढांचे और तकनीकी जरूरतों का आकलन जरूरी होगा।

सरकार के सामने चुनौती केवल फैक्ट्री की इमारत को फिर से उपयोग में लाने की नहीं है, बल्कि पूरे प्रोसेसिंग सिस्टम को आधुनिक रूप देने की है। मीट प्रोसेसिंग में स्वच्छता, कोल्ड चेन, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग, भंडारण और बाजार तक पहुंच जैसी व्यवस्थाएं महत्वपूर्ण होती हैं। हैदराबाद के नेशनल मीट रिसर्च इंस्टीट्यूट में उपलब्ध आधुनिक तकनीक और प्रक्रियाओं को देखने के बाद झारखंड में भी इसी तरह की व्यवस्था विकसित करने पर चर्चा हुई है।

मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने झारखंड के पशुपालन क्षेत्र को केवल पशु वितरण तक सीमित रखने के बजाय उत्पादन से लेकर बाजार तक की पूरी श्रृंखला विकसित करने की जरूरत पर जोर दिया है। इसी सोच के तहत फैक्ट्री को एक ऐसे केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावना देखी जा रही है, जहां पशुपालकों से जुड़े उत्पादों की प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन और बाजार से जुड़ाव को मजबूत किया जा सके। सरकार की ओर से पशुपालन और मीट प्रोसेसिंग क्षेत्र में तकनीकी सहयोग बढ़ाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

इस योजना का एक दूसरा महत्वपूर्ण पहलू राज्य के किसानों की आय और बाजार व्यवस्था से जुड़ा है। पशुपालन में किसान तब ज्यादा लाभ प्राप्त कर पाते हैं जब उन्हें उत्पादन के साथ-साथ बेहतर बाजार और प्रोसेसिंग की सुविधा भी मिले। यदि कांके की फैक्ट्री को आधुनिक सुविधाओं के साथ शुरू किया जाता है तो स्थानीय पशुपालकों के लिए संगठित खरीद और प्रसंस्करण का रास्ता खुल सकता है। हालांकि इसका वास्तविक आर्थिक प्रभाव फैक्ट्री की क्षमता, संचालन मॉडल, बाजार व्यवस्था और उत्पादन शुरू होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

सरकारी दस्तावेजों में इस फैक्ट्री के पुनरुद्धार के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप यानी PPP मॉडल की दिशा में भी प्रक्रिया का उल्लेख मिलता है। झारखंड सरकार की ओर से कांके स्थित सरकारी बेकन फैक्ट्री को मीट प्रोसेसिंग हब के रूप में विकसित करने के लिए Expression of Interest से जुड़ा दस्तावेज भी जारी किया गया है। इसमें संभावित भागीदारों से उत्पादन क्षमता, मीट प्रोसेसिंग सुविधाओं और भविष्य के उत्पादन लक्ष्य से जुड़ी जानकारी मांगी गई थी।

PPP मॉडल के तहत फैक्ट्री को दोबारा शुरू करने की स्थिति में निजी तकनीकी और प्रबंधन क्षमता को सरकारी ढांचे के साथ जोड़ा जा सकता है। इससे आधुनिक मशीनरी, प्रोसेसिंग तकनीक, बाजार प्रबंधन और उत्पादों की बिक्री व्यवस्था विकसित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि अंतिम संचालन मॉडल और फैक्ट्री की वास्तविक क्षमता से जुड़ी जानकारी संबंधित सरकारी निर्णयों और परियोजना की आगे की प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।

मंत्री की हैदराबाद यात्रा के दौरान पशुपालन क्षेत्र से जुड़े दूसरे विषयों पर भी चर्चा हुई। ICAR-NMRI के अधिकारियों ने झारखंड में मीट प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और मानव संसाधन विकास को मजबूत करने में सहयोग का भरोसा दिया था। इससे संकेत मिलता है कि राज्य सरकार बेकन फैक्ट्री को फिर से शुरू करने के साथ-साथ पशुपालन क्षेत्र में तकनीकी प्रशिक्षण और आधुनिक प्रसंस्करण क्षमता विकसित करने पर भी ध्यान दे रही है।

झारखंड सरकार के पशुपालन विभाग की योजनाओं में पहले से ही राज्य के पशु और पोल्ट्री फार्मों को मजबूत करने की बात कही गई है। विभाग का उद्देश्य बेहतर पशु नस्ल, प्रजनन, पशुपालन, पोल्ट्री, अंडा और अन्य पशु आधारित उत्पादन को बढ़ावा देना है। ऐसे में बेकन फैक्ट्री का पुनरुद्धार पशुपालन क्षेत्र की उत्पादन श्रृंखला को बाजार और प्रोसेसिंग से जोड़ने वाली कड़ी के रूप में देखा जा सकता है।

कांके की बेकन फैक्ट्री को लेकर पहले भी सरकार के स्तर पर पहल होती रही है। फरवरी 2025 में मंत्री ने फैक्ट्री का निरीक्षण किया था और उसके बाद इसे पुनर्जीवित करने की दिशा में प्रयास तेज होने की बात सामने आई थी। निरीक्षण के दौरान फैक्ट्री की स्थिति देखी गई थी और अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद हैदराबाद के राष्ट्रीय मीट अनुसंधान संस्थान के साथ तकनीकी सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा ने इस योजना को एक नया आधार दिया।

अब आगे की प्रक्रिया में फैक्ट्री की मौजूदा स्थिति, मशीनरी, भवन, बिजली-पानी, स्वच्छता व्यवस्था और प्रोसेसिंग क्षमता का आकलन महत्वपूर्ण होगा। इसके साथ यह भी तय करना होगा कि आधुनिक संयंत्र के लिए कितना निवेश चाहिए और इसे किस मॉडल पर संचालित किया जाएगा। यदि परियोजना को मंजूरी और जरूरी संसाधन मिलते हैं तो लंबे समय से बंद पड़ी इस सरकारी इकाई को नए स्वरूप में विकसित किया जा सकता है।

बेकन फैक्ट्री के पुनरुद्धार की योजना केवल एक पुरानी सरकारी इकाई को फिर से खोलने की कोशिश नहीं है। इसके जरिए झारखंड में पशुपालन, विशेषकर सूअर पालन से जुड़े किसानों को बाजार, प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन से जोड़ने की कोशिश भी की जा रही है। आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञ संस्थानों के सहयोग और बेहतर प्रबंधन के साथ फैक्ट्री को दोबारा शुरू करने की दिशा में सरकार की गतिविधियां आगे बढ़ रही हैं। अब आने वाले समय में यह देखना होगा कि प्रस्तावित तकनीकी सहयोग, निवेश और संचालन मॉडल किस रूप में अंतिम रूप लेते हैं और कांके की वर्षों से बंद बेकन फैक्ट्री कब नए स्वरूप में काम करना शुरू करती है।

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