Parliament Monsoon Session 2026: हंगामे की भेंट चढ़ा संसद का मानसून सत्र, लोकसभा-राज्यसभा में 88 बार कार्यवाही स्थगित

Parliament Monsoon Session 2026: संसद का मानसून सत्र हंगामे की भेंट चढ़ गया। लोकसभा और राज्यसभा में कार्यवाही 88 बार स्थगित हुई। जानें सत्र से जुड़ी बड़ी बातें।

सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ते टकराव का असर संसद के मानसून सत्र की कार्यवाही पर साफ दिखाई दे रहा है। सत्र की अब तक हुई 15 बैठकों में दोनों सदनों की कार्यवाही कुल 88 बार स्थगित हो चुकी है।

नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच जारी राजनीतिक टकराव का असर सदन के कामकाज पर साफ दिखाई दे रहा है। अब तक हुई 15 बैठकों में लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही को मिलाकर 88 बार स्थगित किया जा चुका है। राज्यसभा में 46 बार और लोकसभा में 42 बार कार्यवाही रोकनी पड़ी।

संसद के दोनों सदनों में सामान्य तौर पर प्रतिदिन करीब सात से आठ घंटे कामकाज होने की उम्मीद रहती है, लेकिन मौजूदा सत्र में वास्तविक कामकाज का समय काफी कम रहा। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, दोनों सदनों में औसतन करीब एक घंटे ही काम हो सका। इससे विधायी कार्यों के साथ-साथ सांसदों को जनहित से जुड़े मुद्दे उठाने और सरकार से जवाब मांगने के अवसर भी सीमित हुए हैं।

लोकसभा में प्रश्नकाल और शून्यकाल पर भी असर

मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में प्रश्नकाल और शून्यकाल नियमित रूप से नहीं हो सके। प्रश्नकाल संसदीय कामकाज का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें सांसद सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों से नीतियों, योजनाओं और प्रशासन से जुड़े सवाल पूछते हैं। वहीं, शून्यकाल के दौरान सांसद बिना पूर्व निर्धारित प्रश्न के तत्काल सार्वजनिक महत्व के मुद्दे सदन के सामने रख सकते हैं। इन दोनों प्रक्रियाओं के बाधित होने से सांसदों की सरकार से सीधे जवाब मांगने की क्षमता प्रभावित हुई।

हालांकि, हंगामे के बीच दोनों सदनों में कुल 10 विधेयक पारित किए गए। इससे पता चलता है कि व्यवधान के बावजूद सरकार विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने में कुछ हद तक सफल रही। लेकिन विपक्ष की ओर से उठाए गए कई स्थगन प्रस्तावों पर विस्तृत चर्चा नहीं हो सकी।

NEET पेपर लीक बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा

इस मानसून सत्र में NEET पेपर लीक विवाद सरकार और विपक्ष के बीच टकराव का प्रमुख मुद्दा रहा। दोनों सदनों में इस विषय पर करीब 20 घंटे चर्चा हुई। हालांकि, चर्चा के दौरान राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी देखने को मिले। सरकार का कहना है कि विपक्ष कई बार चर्चा की मांग करता है, लेकिन जब चर्चा का अवसर मिलता है तो सदन की कार्यवाही बाधित करता है। 

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठकों में विधायी एजेंडे पर सहमति बनने के बाद भी सदन में हंगामा किया जाता है। वहीं, विपक्ष सरकार पर महत्वपूर्ण मुद्दों पर पर्याप्त जवाब नहीं देने का आरोप लगा रहा है।

सरकार और विपक्ष के बीच क्यों नहीं बन रही सहमति?

संसद में गतिरोध के पीछे अलग-अलग राजनीतिक मुद्दे हैं। सत्ता पक्ष का कहना है कि विपक्ष जानबूझकर सदन की कार्यवाही बाधित कर रहा है और विधायी कामकाज को प्रभावित कर रहा है। दूसरी तरफ विपक्ष का तर्क है कि सरकार को ऐसे मुद्दों पर सदन में जवाब देना चाहिए जिन्हें लेकर देशभर में चिंता है। समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने NEET पेपर लीक मामले और उससे जुड़े विरोध-प्रदर्शनों के दौरान कथित कार्रवाई पर सरकार से जवाब की मांग की है।

इस तरह दोनों पक्ष अपनी-अपनी स्थिति पर कायम हैं। सत्ता पक्ष विपक्ष से सदन चलने देने की अपील कर रहा है, जबकि विपक्ष सरकार से महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा और जवाब की मांग कर रहा है।

88 बार स्थगन का संसद के कामकाज पर असर

15 बैठकों के दौरान 88 बार कार्यवाही स्थगित होने का सीधा असर संसदीय उत्पादकता पर पड़ा है। लोकसभा में प्रश्नकाल और शून्यकाल प्रभावित हुए, जबकि विपक्ष की ओर से उठाए गए कई मुद्दों पर चर्चा नहीं हो सकी। दूसरी ओर, सरकार ने हंगामे के बीच कुछ महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराया। हालांकि, केवल विधेयकों का पारित होना ही संसदीय कार्यवाही की पूरी तस्वीर नहीं बताता। कानूनों पर विस्तृत बहस, सांसदों के सुझाव और विपक्ष की आपत्तियों पर चर्चा भी संसदीय प्रक्रिया का अहम हिस्सा हैं।

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