संसद परिसर में शुक्रवार को विपक्षी सांसदों ने सरकार और धार्मिक स्थलों से जुड़े कथित चढ़ावे की चोरी के मुद्दे को लेकर अनोखे अंदाज में प्रदर्शन किया। बिहार के सांसद पप्पू यादव दान पेटी लेकर प्रदर्शन में बैठे, जबकि कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी वहां पहुंचे और दान पेटी में चंदा डालकर प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया।
प्रदर्शन के दौरान सांसदों ने चढ़ावे और धार्मिक आस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। प्रदर्शन का तरीका सामान्य धरना-प्रदर्शन से अलग था। दान पेटी को प्रतीकात्मक तौर पर सामने रखकर सांसदों ने अपना विरोध दर्ज कराया।
पप्पू यादव दान पेटी लेकर संसद परिसर में बैठे नजर आए। उनके आसपास विपक्ष के अन्य सांसद भी मौजूद थे। प्रदर्शन के दौरान सांसदों ने नारेबाजी करते हुए कथित चढ़ावा चोरी के मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की।
इसी दौरान राहुल गांधी भी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे। उन्होंने दान पेटी में पैसे डालकर प्रदर्शन का समर्थन किया। राहुल गांधी के दान पेटी में चंदा डालने के बाद वहां मौजूद सांसदों और कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की।
विपक्षी सांसदों का कहना है कि धार्मिक स्थलों और श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े धन के इस्तेमाल में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए। प्रदर्शन के जरिए उन्होंने संबंधित मामलों में जवाबदेही और जांच की मांग उठाई।
प्रदर्शन के दौरान दान पेटी को लेकर सांसदों ने प्रतीकात्मक संदेश देने की कोशिश की। उनका कहना था कि अगर श्रद्धालु धार्मिक स्थलों पर अपनी श्रद्धा से धन देते हैं तो उसके इस्तेमाल और सुरक्षा को लेकर व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए।
पप्पू यादव इससे पहले भी संसद परिसर में अलग-अलग मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर चुके हैं। इस बार उन्होंने दान पेटी को प्रदर्शन का माध्यम बनाया। उनके इस तरीके ने संसद परिसर में मौजूद लोगों और मीडिया का ध्यान आकर्षित किया।
राहुल गांधी के प्रदर्शन में शामिल होने से इसे और राजनीतिक महत्व मिला। राहुल गांधी ने दान पेटी में राशि डालकर प्रदर्शनकारियों के साथ एकजुटता दिखाई। इसके बाद विपक्षी सांसदों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
प्रदर्शन में शामिल नेताओं ने आरोप लगाया कि श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले चढ़ावे को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने मांग की कि ऐसे मामलों में यदि किसी तरह की गड़बड़ी हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
संसद के बाहर और परिसर में विपक्षी दल अक्सर अलग-अलग मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन करते रहे हैं। इस बार दान पेटी के जरिए प्रदर्शन करने का तरीका इसलिए चर्चा में रहा क्योंकि इसमें धार्मिक चढ़ावे और राजनीतिक विरोध को एक साथ प्रतीकात्मक रूप दिया गया।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े धन को लेकर किसी भी तरह की अनियमितता स्वीकार नहीं की जा सकती। उनका कहना था कि श्रद्धालुओं के विश्वास और दान की राशि की सुरक्षा की जिम्मेदारी संबंधित संस्थाओं की है।
वहीं इस तरह के प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज होने की संभावना है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच धार्मिक संस्थानों, चढ़ावे और कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर पहले भी आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं।
प्रदर्शन के दौरान सांसदों ने सरकार से इस तरह के मामलों में स्पष्ट जवाब देने की मांग की। उनका कहना था कि यदि किसी संस्था या व्यवस्था में गड़बड़ी की शिकायत सामने आती है तो उसकी जांच कर तथ्य सार्वजनिक किए जाने चाहिए।
फिलहाल संसद परिसर में हुआ यह प्रदर्शन अपने अनोखे तरीके के कारण चर्चा में है। पप्पू यादव का दान पेटी लेकर बैठना और राहुल गांधी का उसमें चंदा डालना प्रदर्शन का सबसे चर्चित दृश्य रहा। विपक्षी सांसदों ने इसे प्रतीकात्मक विरोध बताते हुए चढ़ावे से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग दोहराई।











