राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर संसद के दोनों सदनों में भारी हंगामा हुआ। विपक्ष ने जांच और जवाबदेही की मांग की, जबकि सरकार ने आरोपों को राजनीतिक बताया। लगातार व्यवधान के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी।
नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के 12वें दिन राम मंदिर चढ़ावा से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर लोकसभा और राज्यसभा में जोरदार हंगामा देखने को मिला। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सरकार से जवाब और स्वतंत्र जांच की मांग की, जबकि केंद्र सरकार ने आरोपों को राजनीतिक बताया और विपक्ष पर धार्मिक मुद्दों का राजनीतिक लाभ उठाने का आरोप लगाया। लगातार हंगामे के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी। संसद परिसर के बाहर भी कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा), राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने प्रदर्शन किया। इस मुद्दे ने दिनभर संसद की कार्यवाही और राजनीतिक बहस का केंद्र बने रहकर राष्ट्रीय राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया।
लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही बार-बार बाधित
संसद की कार्यवाही सुबह शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने राम मंदिर चढ़ावा मामले पर चर्चा की मांग करते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। लोकसभा में शोर-शराबे के कारण कार्यवाही केवल कुछ मिनट ही चल सकी, जिसके बाद सदन को दोपहर तक के लिए स्थगित कर दिया गया। राज्यसभा में भी स्थिति अलग नहीं रही। विपक्ष लगातार इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगता रहा, जबकि सत्ता पक्ष ने आरोपों का विरोध किया। लगातार व्यवधान के चलते राज्यसभा की कार्यवाही भी पहले दोपहर 12 बजे तक और बाद में दोपहर 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार से मांगा जवाब
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े कथित आरोपों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस ट्रस्ट का गठन केंद्र सरकार की घोषणा के बाद हुआ था और इसे व्यापक प्रशासनिक समर्थन प्राप्त है। उन्होंने कहा कि यदि ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय मामलों पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं, तो संबंधित केंद्रीय जांच एजेंसियों की भूमिका स्पष्ट होनी चाहिए। खड़गे ने सरकार से सदन में इस विषय पर विस्तृत स्पष्टीकरण देने और आरोपों की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक दान और धार्मिक संस्थाओं से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बनाए रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
किरेन रिजिजू का विपक्ष पर पलटवार
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि कुछ विपक्षी दल लंबे समय तक राम मंदिर निर्माण का विरोध करते रहे हैं और अब वही दल इस मुद्दे को राजनीतिक विवाद का रूप देने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष धार्मिक भावनाओं का राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहा है। रिजिजू ने कहा कि सरकार किसी भी संवेदनशील विषय पर तथ्यों के आधार पर काम करती है और विपक्ष को बिना प्रमाण के आरोप लगाने से बचना चाहिए। उनके बयान के बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
संसद परिसर में विपक्ष का प्रदर्शन
संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले और बाद में विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में भी विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राजद और अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने कथित चढ़ावा विवाद को लेकर सरकार के खिलाफ नारे लगाए और जवाबदेही की मांग की। समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव सहित कई नेताओं ने प्रतीकात्मक प्रदर्शन करते हुए सरकार से निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई।
विपक्ष का कहना था कि धार्मिक संस्थाओं से जुड़े मामलों में भी पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
![]()
अन्य मुद्दों पर भी संसद के बाहर प्रदर्शन
राम मंदिर विवाद के अलावा संसद परिसर में अन्य राजनीतिक मुद्दों को लेकर भी प्रदर्शन हुए। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के सांसदों ने कावेरी जल विवाद को लेकर प्रदर्शन किया और इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की। विभिन्न विपक्षी दलों ने अलग-अलग विषयों पर अपनी आवाज उठाई, जिससे संसद परिसर में राजनीतिक गतिविधियां पूरे दिन जारी रहीं।
एनडीए संसदीय दल की रणनीतिक बैठक
संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह तथा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने संसदीय रणनीति बैठक में हिस्सा लिया। बैठक में सरकार की विभिन्न नीतियों, हालिया मुक्त व्यापार समझौतों (FTA), आर्थिक रणनीति और मत्स्य क्षेत्र से जुड़ी योजनाओं पर भी चर्चा की गई। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी सांसदों को आगामी संसदीय कार्यवाही के संबंध में जानकारी दी। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि विपक्ष के आक्रामक रुख को देखते हुए सरकार ने संसद के भीतर अपनी रणनीति पहले से तैयार कर ली थी।
संसद में गतिरोध से प्रभावित हुआ विधायी कामकाज
लगातार हंगामे के कारण संसद का सामान्य विधायी कार्य प्रभावित हुआ। लोकसभा और राज्यसभा दोनों में सूचीबद्ध कई महत्वपूर्ण कार्य समय पर नहीं हो सके। संसदीय विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार व्यवधान से विधायी प्रक्रिया प्रभावित होती है और महत्वपूर्ण विधेयकों तथा जनहित के मुद्दों पर चर्चा के लिए उपलब्ध समय कम हो जाता है। हालांकि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपने-अपने रुख को सही ठहराया और एक-दूसरे पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया।
राजनीतिक बहस और आगे की संभावनाएं
राम मंदिर चढ़ावा विवाद ने संसद के मानसून सत्र में नया राजनीतिक मुद्दा खड़ा कर दिया है। विपक्ष इस मामले में विस्तृत चर्चा और जवाबदेही की मांग कर रहा है, जबकि सरकार आरोपों को राजनीतिक प्रेरित बता रही है। आने वाले दिनों में यदि यह मुद्दा संसद में फिर उठता है, तो दोनों पक्षों के बीच और तीखी बहस देखने को मिल सकती है। फिलहाल इस विषय पर कोई आधिकारिक जांच निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं हुआ है और राजनीतिक बयानबाजी जारी है।










