दिसंबर महीने में ट्रेनों के समय पालन (पंक्चुअलिटी) में 28.68 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है। रेलवे प्रशासन के अनुसार, इस गिरावट के पीछे ठंड, घना कोहरा और तकनीकी कारणों से होने वाला इंजन फेल्योर सबसे बड़ी वजह रहे हैं।
रेलवे के आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर में उत्तर भारत के कई हिस्सों में लगातार घना कोहरा छाया रहा, जिससे ट्रेनों की रफ्तार काफी धीमी करनी पड़ी। दृश्यता बेहद कम होने के कारण कई रूट्स पर ट्रेनों को बार-बार रोका गया या सीमित गति से चलाया गया। इसका सीधा असर यह हुआ कि लंबी दूरी की मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें अपने निर्धारित समय से कई घंटे देरी से गंतव्य तक पहुंचीं।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि ठंड के मौसम में तकनीकी चुनौतियां भी बढ़ जाती हैं। कई जगहों पर इंजन में खराबी, ब्रेक सिस्टम और सिग्नलिंग से जुड़ी समस्याएं सामने आईं। कुछ मामलों में ट्रेनों को बीच रास्ते में रोककर इंजन बदलना पड़ा, जिससे देरी और बढ़ गई। इसके अलावा कोहरे के कारण सिग्नल स्पष्ट न दिखने से सुरक्षा के लिहाज से ट्रेनों की गति नियंत्रित रखनी पड़ी।
लेट ट्रेनों का सबसे ज्यादा असर यात्रियों पर पड़ा। पटना सिटी और बिहार के अन्य प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को घंटों प्लेटफॉर्म पर इंतजार करना पड़ा। कई यात्रियों ने बताया कि उनकी ट्रेनें 5 से 10 घंटे तक लेट रहीं, जिससे आगे की कनेक्टिंग ट्रेनें और निजी कार्यक्रम भी प्रभावित हुए। ठंड में लंबा इंतजार यात्रियों के लिए बड़ी परेशानी बन गया।
रेलवे प्रशासन का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है और कोहरे के दौरान किसी भी तरह का जोखिम नहीं लिया जा सकता। इसी कारण कई बार परिचालन को धीमा करना पड़ता है। अधिकारियों के मुताबिक, कोहरे के समय विशेष संचालन निर्देश लागू किए जाते हैं, जिनका सख्ती से पालन किया जाता है।
हालात से निपटने के लिए रेलवे ने कोहरे वाले इलाकों में फॉग सेफ्टी डिवाइस, अतिरिक्त लोको पायलट और तकनीकी स्टाफ की तैनाती की है। कंट्रोल रूम से ट्रेनों की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है, ताकि जहां संभव हो, देरी को कम किया जा सके। इसके बावजूद मौसम की मार के सामने परिचालन सामान्य रखना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
मौसम विभाग के अनुसार, जनवरी के शुरुआती दिनों में भी ठंड और कोहरे का असर जारी रह सकता है। ऐसे में रेलवे ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे यात्रा से पहले ट्रेन का लाइव स्टेटस जरूर जांचें और संभावित देरी को ध्यान में रखकर ही सफर की योजना बनाएं।
कुल मिलाकर, दिसंबर में समय पालन में आई भारी गिरावट ने भारतीय रेलवे की परिचालन चुनौतियों को उजागर कर दिया है। अब यात्रियों की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में मौसम सामान्य होने पर रेलवे कितनी जल्दी व्यवस्था पटरी पर ला पाता है और लेटलतीफी से राहत कब मिलती है।











