फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर ने टैक्स में राहत, बिजली बिल कम करने, सस्ते चावल की योजना बढ़ाने और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई का वादा किया। हालांकि विशेषज्ञों ने इन योजनाओं के लिए वित्तीय संसाधनों और सरकारी फंडिंग पर गंभीर सवाल उठाए।
मनिला: फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर ने अपने 2026 के स्टेट ऑफ द नेशन एड्रेस (SONA) में आम जनता को राहत देने के उद्देश्य से कई बड़े वादे किए। उन्होंने आयकर में छूट बढ़ाने, बिजली बिलों का बोझ कम करने, सस्ते चावल की योजना का विस्तार करने और भ्रष्टाचार के मामलों में बड़े नेताओं तक कार्रवाई पहुंचाने का संकल्प दोहराया। हालांकि, उनके लगभग डेढ़ घंटे लंबे भाषण के बाद आर्थिक विशेषज्ञों और राजनीतिक विश्लेषकों ने यह सवाल उठाया कि इन सभी योजनाओं के लिए सरकार धन की व्यवस्था कैसे करेगी। आलोचकों का कहना है कि भाषण में खर्च बढ़ाने की घोषणाएं तो थीं, लेकिन राजस्व बढ़ाने, खर्च नियंत्रित करने या वित्तीय अनुशासन बनाए रखने की कोई स्पष्ट रणनीति सामने नहीं आई।
भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई पर रहा विशेष जोर
राष्ट्रपति मार्कोस ने अपने संबोधन की शुरुआत देश में चर्चित बाढ़ नियंत्रण परियोजनाओं (Flood Control Projects) में कथित भ्रष्टाचार के मुद्दे से की। पिछले कुछ वर्षों से इन परियोजनाओं में फर्जी निर्माण, घटिया गुणवत्ता और लागत बढ़ाकर सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप लगते रहे हैं। मार्कोस ने कहा कि इस मामले में कई ठेकेदारों, लोक निर्माण विभाग (Department of Public Works and Highways) के वरिष्ठ अधिकारियों और कुछ सांसदों के खिलाफ मामले दर्ज किए जा चुके हैं तथा कुछ गिरफ्तारियां भी हुई हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि देश की भ्रष्टाचार निरोधक संस्था (Ombudsman) पूर्व संसद अध्यक्ष के खिलाफ भी कई मामलों में कार्रवाई के करीब पहुंच चुकी है। हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन यह संकेत पूर्व स्पीकर और उनके रिश्तेदार मार्टिन रोमुआल्डेज़ की ओर माना गया, जिन्होंने इन आरोपों से इनकार किया है। राष्ट्रपति ने स्पष्ट कहा कि उनका दायित्व परिवार या मित्रों के प्रति नहीं, बल्कि पूरे फिलीपींस के नागरिकों के प्रति है।
सरकार ने 25 अरब पेसो की संपत्ति सुरक्षित करने का दावा किया
मार्कोस ने कहा कि जांच के दौरान अब तक लगभग 25 अरब फिलीपीन पेसो मूल्य की धनराशि और संपत्तियों को जब्त, फ्रीज या सुरक्षित किया गया है। सरकार का दावा है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ यह अभियान सार्वजनिक धन की सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
टैक्स और बिजली बिल में राहत देने की घोषणा
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने मध्यम वर्ग और छोटे कारोबारियों को राहत देने के लिए कई कर सुधार प्रस्ताव पेश किए। उन्होंने कहा कि सरकार संसद से अनुरोध करेगी कि व्यक्तिगत आयकर छूट की सीमा 250,000 पेसो से बढ़ाकर 350,000 पेसो की जाए। इसके अलावा सूक्ष्म उद्यमों (Micro Enterprises) पर लगने वाले न्यूनतम कॉर्पोरेट आयकर को समाप्त करने का प्रस्ताव भी रखा गया। मार्कोस ने बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए बिजली बिल में शामिल "सिस्टम लॉस चार्ज" हटाने की भी घोषणा की। यह वह शुल्क होता है जो बिजली वितरण के दौरान होने वाले तकनीकी नुकसान या चोरी की भरपाई के लिए उपभोक्ताओं से वसूला जाता है।
सस्ते चावल की योजना का होगा विस्तार
फिलीपींस में बढ़ती महंगाई के बीच खाद्य सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा बनी हुई है। राष्ट्रपति ने घोषणा की कि सरकार की रियायती चावल योजना का दायरा बढ़ाया जाएगा। वर्तमान में लगभग 25 लाख परिवार इस योजना का लाभ ले रहे हैं, जिन्हें 20 पेसो प्रति किलोग्राम की दर से चावल उपलब्ध कराया जाता है। सरकार अब इस योजना का विस्तार कर इसे 80 लाख परिवारों तक पहुंचाना चाहती है। इस कदम का उद्देश्य बढ़ती खाद्य महंगाई से प्रभावित निम्न और मध्यम आय वर्ग को राहत देना है।
टैक्स बकाया पर एमनेस्टी योजना
मार्कोस ने यह भी घोषणा की कि जिन लोगों पर आयकर, उत्तराधिकार कर, दान कर या वैट (VAT) का बकाया है, उन्हें सीमित अवधि के लिए कर राहत (Tax Amnesty) दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे करदाताओं को राहत मिलेगी और लंबित कर मामलों का निपटारा आसान होगा।

विशेषज्ञों ने पूछा—पैसा आएगा कहां से?
राष्ट्रपति की घोषणाओं के बाद आर्थिक विशेषज्ञों ने सबसे बड़ा सवाल यही उठाया कि इन योजनाओं का वित्तीय स्रोत क्या होगा। पूर्व कृषि उप सचिव और नीति विशेषज्ञ फर्मिन एड्रियानो ने कहा कि भाषण में खर्च बढ़ाने वाली योजनाओं का उल्लेख तो किया गया, लेकिन यह नहीं बताया गया कि सरकार अतिरिक्त धन कैसे जुटाएगी। वित्तीय विश्लेषक जोनाथन रावेलास ने भी कहा कि लगातार करों में राहत और सब्सिडी बढ़ाने की घोषणाओं के बावजूद राजस्व बढ़ाने की कोई नई नीति सामने नहीं आई। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध, मध्य पूर्व के तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच फिलीपींस पहले से ही वित्तीय दबाव का सामना कर रहा है।
लोकप्रियता में गिरावट के बीच आया संबोधन
राष्ट्रपति मार्कोस का यह संबोधन ऐसे समय आया है जब उनकी लोकप्रियता में गिरावट दर्ज की गई है। हाल ही में जारी एक सर्वेक्षण के अनुसार राष्ट्रपति की प्रदर्शन रेटिंग और भरोसे का स्तर दोनों घटे हैं। इसी तरह उपराष्ट्रपति सारा दुतेर्ते-कार्पियो की लोकप्रियता में भी कमी आई है। उनके खिलाफ सार्वजनिक धन के कथित दुरुपयोग और अन्य आरोपों से जुड़ी सीनेट में महाभियोग प्रक्रिया भी जारी है। विश्लेषकों का मानना है कि जनता के बीच विश्वास बहाल करना राष्ट्रपति की प्राथमिकताओं में शामिल है।
दक्षिण चीन सागर विवाद पर भी दिया संदेश
अपने भाषण के अंतिम हिस्से में राष्ट्रपति मार्कोस ने दक्षिण चीन सागर विवाद का भी उल्लेख किया। हालांकि उन्होंने किसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका बयान हालिया कूटनीतिक विवाद के संदर्भ में देखा गया। उन्होंने कहा कि फिलीपींस अपनी संप्रभुता, सम्मान और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत मिले अधिकारों की रक्षा शांतिपूर्ण और कानूनी तरीकों से करता रहेगा। उन्होंने 2016 के अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण (Arbitral Tribunal) के फैसले का भी समर्थन दोहराया, जिसमें फिलीपींस के विशेष आर्थिक क्षेत्र से जुड़े अधिकारों को मान्यता दी गई थी।
आगे की चुनौती
राष्ट्रपति मार्कोस के भाषण में राहत, भ्रष्टाचार विरोधी कार्रवाई और सामाजिक कल्याण योजनाओं पर विशेष जोर दिया गया। हालांकि अब सबसे बड़ी चुनौती इन वादों को लागू करने के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था करना होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि संसद इन प्रस्तावों को मंजूरी देती है, तो सरकार को समानांतर रूप से राजस्व बढ़ाने और वित्तीय संतुलन बनाए रखने की भी स्पष्ट रणनीति पेश करनी होगी।












