प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड के सांसदों से मुलाकात कर बाढ़ की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने प्रभावित राज्यों को हरसंभव केंद्रीय सहायता का आश्वासन देते हुए कहा कि केंद्र सरकार राज्य सरकारों के साथ मिलकर राहत और पुनर्वास कार्यों में पूरा सहयोग करेगी।
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में आई बाढ़ की स्थिति की समीक्षा के लिए दोनों राज्यों के सांसदों से मुलाकात की। बैठक में बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों की वर्तमान स्थिति, राहत एवं बचाव कार्यों की प्रगति, बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान और प्रभावित लोगों को सहायता पहुंचाने के उपायों पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार दोनों राज्य सरकारों के साथ समन्वय बनाकर राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण कार्यों में हरसंभव सहयोग जारी रखेगी। उन्होंने प्रभावित नागरिकों की सुरक्षा और कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।
बैठक में शामिल रहे दोनों राज्यों के सांसद
प्रधानमंत्री से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री तथा अरुणाचल पश्चिम से सांसद किरेन रिजिजू, अरुणाचल पूर्व के सांसद तापिर गाओ, राज्यसभा सांसद ताई टागक, नागालैंड के लोकसभा सांसद एस. सुपोंगमेरेन जामीर और राज्यसभा सांसद फांगनोन कोन्याक शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री को दोनों राज्यों के विभिन्न जिलों में बाढ़ से उत्पन्न हालात की जानकारी दी और राहत कार्यों में केंद्र की निरंतर सहायता की आवश्यकता पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर साझा किया संदेश
बैठक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि उन्होंने अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में बाढ़ की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने लिखा कि केंद्र सरकार संबंधित राज्य सरकारों के साथ मिलकर सभी चुनौतियों का सामना करने के लिए लगातार काम करती रहेगी। साथ ही उन्होंने बाढ़ प्रभावित सभी लोगों की सुरक्षा और कुशलक्षेम की कामना भी की। प्रधानमंत्री के इस संदेश को पूर्वोत्तर राज्यों के लिए केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा रहा है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य जारी
अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में हाल के दिनों में लगातार भारी वर्षा के कारण कई इलाकों में बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं। अनेक स्थानों पर सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है, जबकि कई गांवों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। राज्य प्रशासन, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) और स्थानीय प्रशासन संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान चला रहे हैं। प्रभावित क्षेत्रों में खाद्य सामग्री, दवाइयां और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी जारी है।

तापिर गाओ ने जताया प्रधानमंत्री का आभार
अरुणाचल पूर्व के सांसद तापिर गाओ ने बैठक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल की सभी चिंताओं को गंभीरता से सुना और प्रभावित लोगों के लिए भारत सरकार की ओर से हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का सहयोग राहत एवं पुनर्वास कार्यों को तेज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय पर जोर
बैठक के दौरान इस बात पर भी बल दिया गया कि प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों की नियमित निगरानी करने और जरूरतमंद लोगों तक समय पर सहायता पहुंचाने को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।
पूर्वोत्तर में मानसून के दौरान बढ़ती चुनौतियां
पूर्वोत्तर भारत में मानसून के मौसम के दौरान भारी वर्षा के कारण बाढ़ और भूस्खलन आम चुनौती बन जाते हैं। पर्वतीय भूभाग, तेज बहाव वाली नदियां और लगातार बारिश के कारण कई क्षेत्रों में परिवहन, संचार और बिजली व्यवस्था प्रभावित हो जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जल निकासी व्यवस्था को मजबूत करने, मौसम पूर्वानुमान प्रणाली को और प्रभावी बनाने तथा आपदा प्रबंधन ढांचे को आधुनिक तकनीक से सशक्त करने की आवश्यकता है।
राहत और पुनर्वास पर रहेगा विशेष फोकस
केंद्र सरकार ने संकेत दिया है कि प्रभावित राज्यों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि राहत कार्यों में किसी प्रकार की कमी न रहे। पुनर्वास के तहत क्षतिग्रस्त सड़कों, पुलों, सार्वजनिक भवनों और अन्य बुनियादी ढांचे की मरम्मत के साथ-साथ प्रभावित परिवारों को सहायता उपलब्ध कराने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
आगे की रणनीति पर होगी लगातार निगरानी
प्रधानमंत्री मोदी की समीक्षा बैठक के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर राहत कार्यों की गति बढ़ाएंगी। मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त संसाधन भी उपलब्ध कराए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को समय पर राहत मिले और सामान्य जनजीवन जल्द से जल्द बहाल किया जा सके।











